लोकसभा चुनाव में भले ही एक साल का वक्त बाकी है, लेकिन बिहार में सियासी तपिश लगातार बढ़ती जा रही है. नीतीश कुमार के राजनीतिक पाला बदलने के बाद से बीजेपी आक्रामक तरीके से सियासत करती नजर आ रही है. मिशन-2024 के मद्देनजर जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने अपनी 32 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी के जरिए नीतीश की सोशल इंजीनियरिंग को पार्टी संगठन में अमलीजामा पहनाने की कवायद की है. ऐसे में देखना है कि जेडीयू ने संगठन में जिस तरह से पिछड़े, अतिपिछड़े, मुस्लिम और महादलित समुदाय को तवज्जो दी है, क्या उसके जरिए बीजेपी से 2024 में पार पा सकेंगे?
जेडीयू की 32 सदस्यीय टीम का गठन
जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने मंगलवार को अपनी 22 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम का ऐलान किया. एक उपाध्यक्ष तो 22 महासचिव, सात राष्ट्रीय सचिव और एक कोषाध्यक्ष बनाए गए है. जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में नीतीश कैबिनेट से सिर्फ एक मंत्री संजय झा को ही जगह मिल पाई है, जबकि आरजेडी और बीजेपी से आए हुए नेताओं को भी ललन सिंह ने अपनी टीम में खास अहमियत दी है. इसके अलावा जेडीयू के राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार के मद्देनजर यूपी, गुजरात, झारखंड जैसे राज्यों के नेताओं को भी जगह दी गई है.
ओबीसी-मुस्लिम पर जेडीयू का फोकस
ललन सिंह ने जेडीयू संगठन में अपने कोर वोटबैंक का पूरा ख्याल रखा है. ओबीसी और मुस्लिम को सबसे ज्यादा जगह दी गई है. ललन सिंह की राष्ट्रीय टीम में आधे से ज्यादा पद ओबीसी और अतिपछड़े समुदाय से आने वाले नेताओं को दिया गया है. जेडीयू संगठन में 16 ओबीसी और अतिपछड़े समुदाय के लोग हैं, जिसमें आठ कुर्मी-कुशवाहा तो छह अतिपिछड़ा वर्ग की अलग-अलग जातियों से हैं. इसके अलावा दो यादव और पांच मुस्लिम नेताओं को जेडीयू टीम में जगह देकर एम-वाई समीकरण को साधने का दांव चला है.
दलित-सवर्ण समुदाय का रखा ख्याल
जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में चार सवर्ण नेताओं को जगह दी गई है, जिसमें भूमिहार समुदाय से लेकर राजपूत, ब्राह्मण और कायस्थ समुदाय से एक-एक नेता को संगठन में रखा गया है. भूमिहार समाज से आने वाले ललन सिंह के हाथों में पार्टी की कमान है तो ब्राह्मण समुदाय आने वाले संजय झा को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है. ललन सिंह और संजय झा के बारे में माना जाता है कि दोनों ही नेता जोड़-तोड़ की राजनीति में माहिर है और नीतीश कुमार के करीबी. इसके अलावा दलित समुदाय से तीन नेताओं को संगठन में रखा गया है, जिसमें दो महादलित है. सांसद आलोक कुमार सुमन को पार्टी कोषाध्यक्ष बनाया गया है, जो दलितों में रैदास समुदाय से आते हैं.
उपेंद्र कुशवाहा का काउंटर प्लान
जेडीयू से बगावत कर अपनी अलग पार्टी बनाने वाले उपेंद्र कुशवाहा की सियासत को बिहार में बेअसर करने के लिए नीतीश कुमार ने बड़ा दांव चला है. कुशवाहा समुदाय से आने वाले चार नेताओं को जेडीयू महासचिव बनाया गया है, जिसमें संतोष कुमार कुशवाहा, रामसेवक सिंह, भगवान सिंह कुशवाहा और राजकुमार शर्मा के नाम शामिल हैं. उपेश कुशवाहा को बिहार प्रदेश अध्यक्ष की कमान पहले से ही सौंप रखी है. नीतीश कुमार की सियासी बुलंदी के पीछे कुशवाहा समुदाय के लोगों की भूमिका अहम रही थी.
नीतीश कुमार ने एक समय लालू प्रसाद यादव के एम-वाई (यादव-मुस्लिम) समीकरण के जवाब में कुर्मी-कोइरी (लव-कुश) फॉर्मूला बनाया था. कुर्मी और कुशवाहा समुदाय को जेडीयू ने अपने साथ मिलाकर मजबूत वोटबैंक बनाया था. ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा के अलग होने के बाद कुशवाहा समुदाय के वोटों को साधे रखने के चार राष्ट्रीय महासचिव बनाकर बड़ा सियासी संदेश दिया. इसी तरह से नीतीश ने अपनी जातीय कुर्मी समुदाय के चार नेताओं को संगठन में शामिल किया है. महासचिव और सचिव दो-दो बनाए हैं. इसके अलावा निषाद समुदाय का भी खास ख्याल रखा है तो कहार और नई जैसी जातियों को भी जगह दी है.
नीतीश की सोशल इंजीनियरिंग
जेडीयू संगठन में नीतीश कुमार की सोशल इंजीनियरिंग को ललन सिंह ने संगठन में उतारने की कवायद की है. नीतीश की सियासत का आधार ओबीसी और अतिपिछड़ी जातियों के साथ-साथ महादलित वोटों पर टिका है. बीजेपी का पूरा फोकस बिहार में नीतीश के इसी वोटबैंक में सेंधमारी का प्लान है, जिसके मद्देनजर जेडीयू किसी तरह का कोई जोखिम भरा कदम नहीं उठाना चाहती है. इसीलिए राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पिछड़े और अतिपिछड़ी जातियों को खास तवज्जे दी गई है. बिहार में 56 फीसदी से ज्यादा ओबीसी और अतिपिछड़ी जातियों का वोट है. इसके अलावा सवर्ण जातियों को भी साधे रखने के लिए पूरी कोशिश की है, लेकिन इस बात को समझते हुए कि यह बीजेपी का कोर वोटबैंक है.
जेडीयू टीम में किसे मिलेगी जगह?
जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव आफाक अहमद खान की तरफ से जारी की गई लिस्ट में संजय झा, संतोष कुशवाहा, रामनाथ ठाकुर, अली अशरफ फातमी, गिरधारी यादव, रामसेवक सिंह कुशवाहा, चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी, दसई चौधरी, गुलाम रसूल बलियावी , आरपी मंडल, विजय कुमार मांझी, भगवान सिंह कुशवाहा, कहकशां परवीन, राजकुमार शर्मा, अशफाक अहमद, कमर आलम, हरीश चंद्र पाटिल इंजीनियर सुनील, राजीव रंजन प्रसाद, धनंजय सिंह, हर्षवर्धन और राज सिंह मान को जेडीयू का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है. वहीं, जेडीयू के राष्ट्रीय सचिव के तौर पर रवींद्र प्रसाद सिंह, राजीव रंजन प्रसाद, संजय वर्मा, अनूप पटेल, दयानंद राय, संजय कुमार शामिल हैं तो आलोक कुमार सुमन कोषाध्यक्ष बने हैं. केसी त्यागी को जेडीयू संगठन में जगह नहीं मिल सकी है.