scorecardresearch
 

LJP में रार, पशुपति पारस चुने गए पार्टी के नेता, मनाने में जुटे चिराग

चाचा पशुपति पारस की बगावत से हतप्रभ चिराग पासवान उन्हें मनाने उनके घर पहुंचे, लेकिन यहां राजनीति बड़ा ही रोमांचक नजारा देखने को मिला. चिराग पशुपति घर के बाहर कार में इंतजार करते रहे. लेकिन उनके लिए घर का दरवाजा नहीं खुला. चिराग ने यहां 25 मिनट तक इंतजार किया.

Advertisement
X
चिराग पासवान चाचा पशुपति के घर 25 मिनट तक इंतजार किए.
चिराग पासवान चाचा पशुपति के घर 25 मिनट तक इंतजार किए.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • लोक जनशक्ति पार्टी की टूट पर पशुपति पारस बोले
  • पार्टी को तोड़ा नहीं, बचाया है, चिराग का स्वागत: पारस
  • चाचा से मिलने घर पहुंचे चिराग पासवान

दिवंगत नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी में दो-फाड़ हो गई है. रामविलास पासवान के भाई पशुपति पारस ने पांच सांसदों को साथ लेकर अब पार्टी पर अपना अधिकार जता दिया है, वहीं चिराग पासवान अब अलग-थलग हो गए हैं. पशुपति कुमार पारस को सर्वसम्मति से लोकसभा में लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) संसदीय दल का नेता चुना गया है.

Advertisement

बिहार की राजनीति में बीते दिन अचानक ही नया मोड़ सामने आ गया. लोक जनशक्ति पार्टी में टूट हो गई, इसी मसले पर सोमवार को पशुपति पारस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. पशुपति पारस ने कहा कि हमारे भाई चले गए, हम अकेले महसूस कर रहे हैं. 

सूत्रों के हवाले से खबर कि आज 3 बजे लोकसभा स्पीकर से जब एलजेपी के पांच सांसद मुलाकात करेंगे. सांसदों ने पशुपति पारस को अपना नेता चुना है, ऐसे में संसद में भी इसी प्रक्रिया को लागू करने के लिए ये मुलाकात हो रही है. 

बागी चाचा को मनाने की कोशिश
इस हलचल के बाद चाचा पशुपति पारस को मनाने के लिए चिराग पासवान उनके घर पहुंचे. रिपोर्ट के मुताबिक चिराग पासवान चाचा पारस के घर के बाहर 25 मिनट तक खड़े रहे तब जाकर उनके लिए दरवाजा खुला. दिल्ली में 12 जनपथ से चिराग पासवान अपने चाचा के घर पर पहुंचे, हालांकि बाद में वह वापस लौट गए. 

Advertisement

चिराग पासवान चाचा पशुपति पारस के घर के बाहर कार में बैठे बार बार कार का हॉर्न बजाते रहे, ताकि घर का दरवाजा खुले, लेकिन उनके चाचा के घर का दरवाजा 25 मिनट तक नहीं खुला. चिराग बार बार हॉर्न बजाते रहे, लेकिन घर का दरवाजा नहीं खुला. 

 

काफी देर बाद उनके चाचा के घर का दरवाजा खुला, लेकिन जानकारी मिली कि उनके चाचा पशुपति पारस घर पर मौजूद नहीं थे. अभी घर में चिराग के चचेरे भाई प्रिंस राज ही मौजूद हैं. चिराग अभी उनसे ही मुलाकात कर रहे हैं. चिराग पासवान के साथ एलजेपी बिहार के अध्यक्ष राजू तिवारी भी मौजूद हैं.

पार्टी तोड़ी नहीं, बचाई है-पारस

इससे पहले पशुपति पारस ने कहा कि पार्टी की बागडोर जिनके हाथ में गया, तब सभी लोगों की इच्छा थी 2014 में और इस बार भी हम एनडीए के साथ बने रहें. लोक जनशक्ति पार्टी बिखर रही थी, असमाजिक तत्व आ रहे थे, एनडीए से गठबंधन को तोड़ दिया और कार्यकर्ताओं की नहीं सुनी गई.

पशुपति पारस ने बताया कि हमारी पार्टी के पांच सांसदों की इच्छा थी कि पार्टी को बचाना जरूरी है. मैंने पार्टी तोड़ी नहीं है, पार्टी को बचाया है. जबतक मैं जिंदा हूं, पार्टी को जिंदा रखेंगे. मुझे चिराग पासवान से कोई दिक्कत नहीं है, अभी भी ओरिजनल पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी ही है. चिराग अभी तक पार्टी के अध्यक्ष हैं, लेकिन अब वह हमारे साथ आना चाहें तो आ सकते हैं. 

Advertisement

जनता दल (यू) के साथ जाने की बातों पर पशुपति पारस ने कहा कि मैं शुरुआत से एनडीए के साथ रहा हूं, हम एनडीए के साथ रहेंगे. पशुपति पारस ने कहा कि वह नीतीश कुमार को एक अच्छा लीडर मानते हैं, वह विकास पुरुष हैं. 

आपको बता दें कि पशुपति पारस द्वारा बीते दिन लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को चिट्ठी लिख पांचों सांसदों को अलग मान्यता देने की मांग की गई, साथ ही खुद को पार्टी लीडर बताया गया. पशुपति पारस का कहना है कि वह स्पीकर के जवाब का इंतजार कर रहे हैं.

लोक जनशक्ति पार्टी ने बिहार के विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए से खुद को अलग कर लिया था. हालांकि, विधानसभा चुनाव में पार्टी ने कोई खास प्रदर्शन नहीं किया, ऐसे में अब लंबे वक्त के बाद पशुपति पारस बड़ी भूमिका में नज़र आ रहे हैं. 


 

Advertisement
Advertisement