भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे नीतीश कुमार कैबिनेट के शिक्षामंत्री मेवालाल चौधरी ने इस्तीफा दे दिया है. राज्यपाल ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. इस्तीफा देने के बाद मेवालाल चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार का सच्चा सिपाही होने के नाते उनकी छवि पर किसी तरह की आंच न आए, इसलिए मैंने खुद इस्तीफे की पेशकश की.
मेवालाल की जगह अशोक चौधरी को शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. मेवालाल चौधरी शपथ ग्रहण के बाद से ही विपक्ष की निशाने पर थे. गुरुवार को मेवालाल चौधरी ने कार्यभार संभाला था, लेकिन डेढ़ घंटे के भीतर ही उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया. मेवालाल के इस्तीफे के बहाने तेजस्वी ने नीतीश पर हमला बोला है.
तेजस्वी यादव ने ट्वीट करके कहा था, 'मा. मुख्यमंत्री जी, जनादेश के माध्यम से बिहार ने हमें एक आदेश दिया है कि आपकी भ्रष्ट नीति, नीयत और नियम के खिलाफ आपको आगाह करते रहें. महज एक इस्तीफे से बात नहीं बनेगी. अभी तो 19 लाख नौकरी,संविदा और समान काम-समान वेतन जैसे अनेकों जन सरोकार के मुद्दों पर मिलेंगे. जय बिहार,जय हिन्द.'
क्या है मामला
2017 में मेवालाल चौधरी पर भागलपुर के सबौर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति रहते हुए नौकरी में भारी घपले बाजी करने का आरोप है. उनके ऊपर आरोप है कि कुलपति रहते हुए उन्होंने 161 असिस्टेंट प्रोफेसर की गलत तरीके से बहाली की. इस मामले को लेकर उनके ऊपर प्राथमिकी भी दर्ज है.
तत्कालीन बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने उस वक्त मेवालाल चौधरी के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे. जांच में मेवालाल चौधरी के खिलाफ लगे आरोपों को सही पाया गया था. उन पर सबौर कृषि विश्वविद्यालय के भवन निर्माण में भी घपलेबाजी का आरोप है.
हालांकि इस बारे में बात करते हुए मेवालाल चौधरी ने कहा कि मेरे खिलाफ कोई चार्जशीट दायर नहीं हुई है ना ही मेरे खिलाफ कोर्ट की तरफ से आरोप सिद्ध हुआ है. मेरे खिलाफ कोई आरोप नहीं हैं.