बिहार की सियासत में पिछले डेढ़ दशक से नीतीश कुमार अगर सत्ता की धुरी बनाए हुए हैं, तो उसमें राज्य की महिलाओं का अहम रोल है. यही वजह है कि नीतीश बिहार की महिला वोटरों को अपने साथ मजबूती से साधकर रखना चाहते हैं. ऐसे में वो एक के बाद एक कदम उठा रहे हैं, जिससे महिलाओं की बीच उनकी लोकप्रियता बनी रहे. बिहार के इंजिनियरिंग कॉलेज में लड़कियों को आरक्षण की व्यवस्था किए जाने के बाद अब जेडीयू के प्रदेश संगठन में 33 फीसदी महिलाओं को जगह दी गई.
जेडीयू के बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने नई प्रदेश समिति की सूची जारी करते हुए कहा कि नई प्रदेश कमेटी में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है. पार्टी संगठन में 33 फीसदी हिस्सेदारी महिलाओं को दी गई है. उन्होंने कहा कि देश में जेडीयू एकमात्र ऐसी पार्टी है जो पार्टी संगठन में महिलाओं को 33 फीसदी हिस्सेदारी दी है.
उमेश कुशवाहा ने कहा कि जेडीयू ने महिलाओं को संगठन में एक तिहाई हिस्सेदारी दी है, क्योंकि नीतीश कुमार हमेशा से महिलाओं के अधिकार की बात करते हैं. कुशवाहा ने कहा कि हमने और हमारे संगठन ने नीतीश कुमार की इन बातों को पूरा करके दिखाया है. बिहार चुनाव के बाद से ही संगठन में भारी फेरदबल के कयास लगाए जा रहे थे.
जेडीयू प्रदेश संगठन की नई कमेटी में 29 उपाध्यक्ष, 60 महासचिव, 114 सचिव, एक कोषाध्यक्ष और 7 प्रवक्ता शामिल किए गए हैं. जेडीयू की नई टीम में उपेंद्र कुशवाहा के साथ आए कई चेहरों को संगठन में अहम जिम्मेदारी मिली है. पार्टी में उपाध्यक्ष पद पर जिन बड़े चेहरों को जगह मिली है उनमें पूर्व मंत्री लक्ष्मेश्वर राय, पूर्व मंत्री अजीत चौधरी, पूर्व मंत्री बीमा भारती, डॉ. रंजू गीता, ललन पासवान, रणविजय सिंह जैसे नाम शामिल हैं.
बता दें बिहार की नीतीश सरकार ने पिछले दिनों प्रदेश के मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में लड़कियों के लिए 33 फीसदी आरक्षण दिया था. देश में बिहार पहला राज्य है, जहां, कॉलेज में महिला आरक्षण की व्यवस्था है. बिहार में 2035 इंजीनियरिंग सीटें हैं और 1330 मेडिकल व बीडीएस सीटें हैं. राज्य सरकार 11 मेडिकल और 38 इंजीनियरिंग कॉलेज संचालित करती है.
नीतीश सरकार ने इससे पहले 2006 में लड़कियों के लिए प्राइमरी स्कूलों में 50 फीसदी और सेकंडरी स्कूल्स में 35 फीसदी सीटें आरक्षित की थीं. इसके अलावा राज्य सरकार पुलिस की नौकरियों में 35 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर चुकी है और अन्य सरकारी नौकरियों में भी 33 फीसदी महिलाओं के लिए आरक्षित हैं.
लड़कियों को उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार लड़कियों को स्नातक की परीक्षा पास करने के बाद 50 हजार रुपये का कैश इंसेटिव देती है. इसके अलावा महिला-केंद्रित योजनाएं जैसे कि लड़कियों के लिए साइकिल और स्कूल यूनिफॉर्म बहुत प्रचलित हैं जिस अब लड़कों के लिए भी उपलब्ध करा दिया गया है.