बिहार के पूर्णिया जिले में शनिवार शाम एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर बीरेंद्र कुमार ने खुद को गोली मारकर खुदकुशी कर ली. पहले-पहल ऐसा कोई कारण नहीं दिखता, जिससे उनकी खुदकुशी के कारणों पता चल सके. पुलिस की नौकरी थी, बेटा आईआईटी रूड़की में पढ़ता है. लेकिन जब खबर फैली और मानवाधिकार आयोग ने नोटिस जारी किया तो भ्रष्टाचार और घूसखोरी की ऐसी कहानी सामने आई, जिसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा.
बीरेंद्र की पत्नी चंदा देवी रोते हुए परिवार की आर्थिक बदहाली पर कहती हैं, 'मेरे पति को महीनों से वेतन नहीं मिला था. वह ऊब चुके थे. बेटा आईआईटी में पढ़ता है और हमारे पास उसकी फीस के लिए पैसे नहीं हैं. वेतन आया तो विभाग के लोगों ने घूस मांगा, लेकिन जब घर चलाने के लिए पैसे नहीं हैं तो घूस कहां से दें.'
देश में घूसखोरी और भ्रष्टाचार से निपटने के लिए पुलिस है, कानून है. लेकिन जब पुलिसकर्मी को अपने वेतन के लिए ही घूस देना पड़े तो क्या कहने. जानकारी के मुताबिक, बीरेंद्र सिंह को बीते दो वर्षों से वेतन नहीं मिला था. हाल ही वेतन आया और वह स्थानीय पुलिस अकाउंट्स विभाग पहुंचे तो अकाउंट क्लर्क ने उनसे 40 हजार रुपये घूस की मांग की.
हालांकि, मंगलवार को बिहार पुलिसमैन एसोसिएशन के प्रदर्शन के बाद बीरेंद्र कुमार का वेतन उनके परिवार को सौंप दिया गया, लेकिन अफसोस कि यह सब देखने के लिए परिवार के मुखिया की आंखें अब हमेशा के लिए बंद हो चुकी हैं. मामला बढ़ता देख अब स्थानीय प्रशासन ने भी मामले की जांच और बेटे को नौकरी का भरोसा दिलाया है.
दूसरी ओर, घटना के बाद अकाउंट सेक्शन पर आरोपों की झड़ी लग गई है. एक अन्य एएसआई ने कहा कि विभाग के लोग हमें भ्रष्ट मानते हैं और अक्सर घूस की मांग करते हैं. मामले में अकाउंट सेक्शन के हेड क्लर्क सकलदीप सिंह को निलंबित कर दिया गया है.