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बिहारः मिथिलांचल और कोसी की लाइफलाइन दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल खुद लाइफ सपोर्ट पर

दरभंगा का डीएमसीएच अस्पताल अब तक कई भूकंपों को झेल चुका है और इस कारण से इसकी नींव पूरी तरह से खोखली हो चुकी है, फिर भी जान जोखिम में डालकर मरीज अपना इलाज करवाने यहां पहुंचते हैं.

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DMCH की जर्जर हालत (फोटो- आजतक)
DMCH की जर्जर हालत (फोटो- आजतक)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोरोना काल में लोगों की लाइफलाइन DMCH
  • जर्जर हो चुकी है DMCH की बिल्डिंग्स
  • 100 से ज्यादा संक्रमितों का चल रहा इलाज

मिथिलांचल और कोसी की लाइफलाइन कहे जाने वाला सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल दरभंगा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (DMCH) खुद ही लंबे वक्त से लाइफ सपोर्ट पर चल रहा है. डीएमसीएच में दरभंगा समेत आसपास के तकरीबन आधा दर्जन जिलों के मरीज यहां पर इलाज करवाने पहुंचते हैं. कोरोना काल में इस अस्पताल में 100 से भी ज्यादा संक्रमित मरीजों का इलाज भी चल रहा है, मगर इस मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था ऐसी है कि कोई भला चंगा आदमी भी यहां आकर बीमार हो जाएगा.

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आजतक की टीम शुक्रवार को डीएमसीएच पहुंची और अस्पताल के सर्जिकल भवन की तस्वीरें अपने कैमरे में कैद की. सर्जिकल भवन पिछले कई सालों से जर्जर हालत में है. भवन निर्माण विभाग ने कई दफा इसे खाली करवाने का निर्देश जारी किया है मगर इसके बावजूद भी यहां पर मरीजों का इलाज होता है.

डीएमसीएच अस्पताल अब तक कई भूकंपों को भी झेल चुका है और इस कारण से इसकी नींव पूरी तरीके से खोखली हो चुकी है, फिर भी जान जोखिम में डालकर मरीज अपना इलाज यहां करवाने पहुंचते हैं.

डीएमसीएच के मेडिकल सुपरीटेंडेंट डॉक्टर मणि भूषण शर्मा ने कहा, “हम लोगों ने कुछ समय के लिए सर्जिकल भवन को खाली करवाया था मगर कोरोना मरीजों के ज्यादा संख्या में आने के कारण दोबारा से सर्जिकल भवन में मरीजों का इलाज शुरू किया गया है. हम लोग रिस्क लेकर मरीजों को यहां इलाज कर रहे हैं और भगवान ने चाहा तो यह भवन कभी नहीं गिरेगा.”

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दरभंगा के बीजेपी विधायक संजय सराओगी ने कहा, “जो एजेंसी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल बना रही है उसने राज्य सरकार को अब तक हैंडओवर ही नहीं किया है. एजेंसी का काम काफी धीरे चल रहा है और मैंने इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया. अगर यह मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल जल्दी तैयार हो जाता है तो यहां के मरीजों को इलाज कराने के लिए बाहर नहीं जाना होगा.”

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डीएमसीएच के जर्जर हालात को देखते हुए 2016 में केंद्र और बिहार सरकार के साझा सहमति से ₹160 करोड़ की लागत से मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल का निर्माण कार्य शुरू हुआ मगर जिस अस्पताल को 2018 तक बनकर तैयार हो जाना चाहिए था उसका निर्माण कार्य ढाई साल के बाद भी अब तक पूरा नहीं हो सका है. 

2016 में 200 बेड के इस मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था. सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में डॉक्टरों की भी बहाली हो चुकी है.

 

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