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राज्यसभा चुनाव में RJD के ऑफर पर LJP क्यों नहीं हुई तैयार, समझें पूरा गणित

बिहार में राज्यसभा चुनाव का अंकगणित फिलहाल एनडीए के पक्ष में दिख रहा है. एनडीए को 126 विधायकों का समर्थन हासिल है जबकि महागठबंधन के साथ 110 विधायक और सात अन्य हैं. ऐसे में एलजेपी अगर आरजेडी के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए चुनावी मैदान में उतरी तो भी एनडीए को मात देना मुश्किल होता. यही वजह है कि चिराग पासवान अपनी पार्टी के प्रत्याशी को राज्यसभा चुनाव में उतारने से पीछे हट गए और आरजेडी के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. 

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एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान
एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान
स्टोरी हाइलाइट्स
  • रामविलास पासवान के निधन से रिक्त राज्यसभा सीट
  • बीजेपी ने सुशील मोदी को बनाया राज्यसभा प्रत्याशी
  • आरजेडी के प्रस्ताव को चिराग ने अस्वीकार किया

बिहार में रामविलास पासवान के निधन से खाली हुई राज्यसभा सीट पर बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर सुशील कुमार मोदी बुधवार को नामांकन करेंगे. एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान ने साफ कर दिया है कि इस उपचुनाव में उनकी तरफ से कोई प्रत्याशी चुनाव में नहीं होगा. हालांकि, आरजेडी ने चिराग पासवान की मां रीना पासवान को महागठबंधन की तरफ से राज्यसभा सीट के लिए उम्मीदवार बनने का प्रस्ताव दिया था. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर आरजेडी के प्रस्ताव पर एलजेपी तैयार क्यों नहीं हुई? 

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एलजेपी ने ट्वीट कर लिखा, 'लोक जनशक्ति पार्टी व दलित सेना के संस्थापक रामविलास पासवान के निधन से रिक्त राज्यसभा सीट पर उपचुनाव है. राज्यसभा की यह सीट पार्टी संस्थापक के लिए थी जब पार्टी के संस्थापक ही नहीं रहे तो अब यह सीट बीजेपी किसको देती है यह उनका निर्णय है.' दूसरे ट्वीट में एलजेपी ने लिखा, 'आरजेडी के कई साथियों ने इस सीट पर एलजेपी प्रत्याशी को समर्थन करने की बात कही है. आरजेडी के समर्थन के लिए पार्टी आभार व्यक्त करती है, लेकिन इस राज्यसभा सीट पर एलजेपी का कोई भी व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ना चाहता है.'

राज्यसभा का गणित एनडीए के पक्ष में
बिहार में राज्यसभा चुनाव का अंकगणित फिलहाल एनडीए के पक्ष में दिख रहा है. एनडीए को 126 विधायकों का समर्थन हासिल है जबकि महागठबंधन के साथ 110 विधायक और सात अन्य हैं. ऐसे में एलजेपी अगर आरजेडी के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए चुनावी मैदान में उतरी तो भी एनडीए को मात देना मुश्किल होता. यही वजह है कि चिराग पासवान अपनी पार्टी के प्रत्याशी को राज्यसभा चुनाव में उतारने से पीछे हट गए और आरजेडी के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. 

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बीजेपी के प्रति चिराग की लॉयल्टी 
बिहार के वरिष्ठ पत्रकार संजय सिंह ने कहा कि चिराग पासवान राज्यसभा के अंकगणित को बेहतर तरीके से समझते हुए चुनावी मैदान में उतरकर बीजेपी के साथ अपनी दूरी और भी नहीं बढ़ाना चाहते थे. ऐसे में चिराग पासवान ने चुनाव न लड़ने का फैसला कर राजनीतिक तौर पर अपने लिए जहां केंद्रीय एनडीए में बने रहने का रास्ता साफ कर दिया है बल्कि बीजेपी के लिए अपनी लॉयल्टी का सबूत भी दे दिया है. इस तरह से उन्होंने पीएम मोदी के हनुमान अब भी बने रहने के मंसूबे भी जाहिर कर दिए हैं. 

आरजेडी की रणनीति 
दरअसल, एलजेपी को राज्यसभा सीट का ऑफर देकर आरजेडी एक तीर से कई समीकरण साधना चाहती थी. आरजेडी की यह पेशकश बीजेपी पर रामविलास पासवान के परिवार की अनदेखी का आरोप मढ़ने और सूबे के दलित समाज के प्रति अपनी सहानुभूति हासिल करने का दांव माना जा रहा था. साथ ही विधानसभा चुनाव के बाद बिहार की राजनीति में अलग-थलग पड़ी एलजेपी को आरजेडी इस प्रस्ताव के जरिए अपने खेमे में मिलाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा था. 

एलजेपी नहीं देना चाहती श्रेय
संजय सिंह कहते हैं कि एलजेपी भी इस बात को समझती थी अगर महागठबंधन के प्रस्ताव को स्वीकार कर वो चुनावी मैदान में उतरती तो इसका सियासी लाभ चिराग से ज्यादा तेजस्वी यादव को मिलने की संभावना थी. ऐसे में चिराग अपना इस्तेमाल फिलहाल बीजेपी के खिलाफ नहीं होना देना चाहते हैं. चिराग पासवान को देर से सही एनडीए में ही अपना भविष्य सुरक्षित दिखाई दे रहा है और आरजेडी का हिस्सा बनकर केन्द्र में अपने राजनीतिक भविष्य को खत्म नहीं करना चाहते हैं. ऐसे में चिराग भले ही जेडीयू के खिलाफ आक्रमक रुख अभी भी अपनाए हुए हों, लेकिन बीजेपी के प्रति नरम हैं. इसीलिए वो किसी और खेमे के साथ फिलहाल नहीं खड़े होना नहीं चाहते, जिससे उनके आगे की सियासी राह में कोई दिक्कत आए. 

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