देश में 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के टीकाकरण अभियान के शुरू होने के काफी समय के बाद भी बिहार के सहरसा जिले के इस गांव में लोगों ने टीका नहीं लगवाया है. सहरसा के इस गांव के लोगों में वैक्सीन को लेकर किस प्रकार की भ्रांतियां और गलतफहमी है इसकी पड़ताल करने के लिए आजतक की टीम इस गांव में पहुंची. पतरघट प्रखंड के करियत गांव के निवासी 18 वर्षीय अमन कुमार पूछने पर बताते हैं कि भविष्य में भी उनका टीका लेने का कोई इरादा नहीं है, क्योंकि उनको लगता है कि टीका लेने के बाद व्यक्ति की मौत हो जाती है.
अमन कुमार ने कहा, “हम लोगों ने कोरोना वायरस का टीका नहीं लगवाया है, क्योंकि लोगों का कहना है कि टीका लगाने के बाद व्यक्ति मर जाता है और मरने से तो सब को डर लगता है.”
टीकाकरण की अफवाह
सहरसा के करियत गांव के एक और निवासी 35 वर्षीय मनोज कुमार यादव ने भी कोरोना का टीका नहीं लगाया है. उन्होंने टीका क्यों नहीं लगवाया है यह पूछने पर वह नाराज हो जाते हैं और सवाल पूछते हैं कि अगर टीका लेने के बाद किसी की मौत हो जाएगी तो क्या सरकार उनको पूछने आती है?
मनोज कुमार कहते हैं, “हम कोरोना वायरस का टीका नहीं लगाएंगे. मेरी मर्जी है. जब आदमी मर जाता तो है तो क्या सरकार देखने के लिए आती है?”
शहरी इलाकों में लोगों के अंदर उत्साह
गौरतलब है कि बिहार में कोरोना टीकाकरण को लेकर एक तरफ जहां शहरी इलाकों में लोगों के अंदर उत्साह नजर आता है, वहीं ग्रामीण इलाकों में अमन कुमार और मनोज कुमार यादव जैसे लोग कई तरह की भ्रांतियां और दुष्प्रचार के कारण टीका लेने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं.
41 वर्षीय प्रणव कुमार ने भी कोरोना का टीका नहीं लगवाया है. उनका मानना है कि सरकार सही वैक्सीन को बेच रही है और ग्रामीण इलाकों में लोगों को गलत वैक्सीन दिया जा रहा है.
गलत टीका लगाया जा रहा है: ग्रामीण
करियत गांव के निवासी प्रणव कुमार ने कहा, “ग्रामीण इलाकों में जो टीका लगाया जा रहा है वह गलत टीका है. हम लोग देख रहे हैं कि जो भी व्यक्ति टीका लगवा रहा है वह मरता ही है. सरकार ने सही टीका बेच दिया है और गलत वैक्सीन लोगों को दिया जा रहा है. मोबाइल और व्हाट्सएप पर लगातार आ रहा है कि वैक्सीन लगाने से लोग मर जाता है.”
1500 की आबादी वाले करियत गांव के लोगों से जब आजतक द्वारा बातचीत की गई तो लगभग सभी ने अब तक वैक्सीन नहीं लेने की बात बताई. इस गांव के लोग संक्रमण को लेकर पूरी तरीके से लापरवाह भी नजर आए और लगभग सभी ने ना तो मास्क पहना था और ना ही सामाजिक दूरी के नियमों का पालन कर रहे थे.
जो भी व्यक्ति वैक्सीन लगाता है वह मर जाता है: सुधांशु
21 साल के सुधांशु कुमार कहते हैं, “सुनते और देखते हैं कि जो भी व्यक्ति वैक्सीन लगाता है वह मर जाता है.” वहीं 1 वर्षीय कौशल कुमार का कहना है, “सुनते हैं कि वैक्सीन को लेकर काफी धांधली हो रहा है और लोगों को घटिया वैक्सीन दिया जा रहा है. इसी कारण से सब लोग डर रहे हैं. वैक्सीन लेने के बाद लोगों को बुखार आ जा रहा है. सरकार सही वैक्सीन भेज रही मगर ग्रामीण इलाकों तक सही वैक्सीन नहीं पहुंच रहा है.”
वहीं अखिलेश कुमार कहते हैं, “वैक्सीन को लेकर देख रहे हैं कि जो भी इसे लेता है वह पहले बीमार पड़ता है और फिर मर जाता है. वैक्सीन लेकर फिर क्या करेंगे?” एक अन्य गांव के निवासी ने कहा, “अगर कोई व्यक्ति गंभीर बीमारी से पीड़ित है तो सरकार के द्वारा वैक्सीन देने से पहले कोई डॉक्टर नहीं आता है जांच करने के लिए ताकि जांच के बाद लोगों को वैक्सीन दिया जाए.”
वैक्सीन को लेकर कई तरह की शंका और गलतफहमी: डॉ. बबीता कुमारी
वही पतरघट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. बबीता कुमारी भी मानती हैं कि ग्रामीण इलाकों में लोगों के अंदर वैक्सीन को लेकर कई तरह की शंका और गलतफहमी है, जिसकी वजह से टीकाकरण की रफ्तार धीमी है. डॉ. बबीता कुमारी ने कहा, “हम लोग लगातार प्रयास कर रहे हैं और जन जागरूकता ग्रामीण इलाकों में कर रहे हैं ताकि लोगों के अंदर वैक्सीन को लेकर जो भी गलतफहमी है वह दूर हो.”