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उपेंद्र कुशवाहा का जेडीयू में बने रहना अब संभव नहीं! इन 3 रास्तों में से किसे चुनेंगे?

बिहार की सियासत में सियासी उठापटक जारी है. उपेंद्र कुशवाहा इन दिनों नीतीश कुमार के गले की फांस बन गए हैं. जेडीयू के खिलाफ जिस तरह से मोर्चा खोल रखा है, उससे लगता है कि अब बहुत दिनों तक नीतीश के साथ नहीं रहेंगे. ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा का अगला राजनीतिक ठिकाना क्या बनेगा. अपनी पार्टी बनाएंगे या फिर बीजेपी में करेंगे एंट्री?

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नीतीश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा
नीतीश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा

बिहार में सियासी बदलाव के बाद से ही राजनीतिक तपिश बढ़ गई है. महागठबंधन में वापसी के बाद से सीएम नीतीश कुमार एक्टिव हैं तो उनकी ही पार्टी नेता उपेंद्र कुशवाहा ने बगावत की राह पर कदम बढ़ दिए हैं. उपेंद्र कुशवाहा ने जिस तरह से नीतीश के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और जेडीयू के साथ-साथ आरजेडी को भी निशाने पर लेना शुरू कर दिया. ऐसे में देर-सबेर कुशवाहा का जेडीयू से नाता टूटना तय है. जेडीयू को छोड़ते हैं तो उपेंद्र कुशवाहा के पास राजनीतिक विकल्प क्या हैं? 

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बिहार की राजनीतिक उठापटक जारी है. महागठबंधन और बीजेपी के बीच शह-मात का खेल चल रहा. उपेंद्र कुशवाहा के भविष्य के कदमों को लेकर लगातार अटकलें लग रही हैं. ये चर्चाएं उस वक्त बढ़ गईं थीं जब बीजेपी के तीन नेताओं ने एम्स में कुशवाहा से मुलाकात की थी. हालांकि, उपेंद्र कुशवाहा ने इसे सिर्फ शिष्टाचार मुलाकात बताई थी, लेकिन उसके बाद से जिस तरह से जेडीयू और नीतीश कुमार को लेकर बयान दे रहे हैं. ऐसे में बीजेपी के साथ जितने दिनों का सफर तय करना था वो कर चुके हैं और अब फिर से जुदा होने की तैयारी में है? 

क्या बीजेपी में जाएंगे कुशवाहा?
उपेंद्र कुशवाहा अगर जेडीयू छोड़ते हैं तो फिर उनका सियासी ठिकाना बीजेपी बनेगी. यह बात इसीलिए कही जा रही है कि दिल्ली एम्स में कुशवाहा जब भर्ती थे तो बीजेपी के तीन नेता रंजन पटेल, संजय टाइगर और योगेंद्र पासवान ने मुलाकात की थी. बिहार बीजेपी के नेता भी उपेंद्र कुशवाहा को पार्टी में लेने की इच्छा जता चुके हैं. जेडीयू और आरजेडी के बीच गठबंधन होने के चलते कुशवाहा के पास सिर्फ बीजेपी ही पार्टी बचती है, जिसके साथ जाने का उम्मीदें बनती हैं. बीजेपी के अलावा फिलहाल कोई ऐसा दल नहीं है, जिसके साथ जुड़कर वो अपनी राजनीतिक पारी को आगे बढ़ा सकें. 

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नीतीश के साथ रिश्ते टूटने के बाद से बीजेपी को भी एक ओबीसी नेता की तलाश है. इस तरह से उपेंद्र कुशवाहा के बीजेपी में जाने की तमाम उम्मीदें दिख रही है. इसके अलावा कुशवाहा समुदाय से सम्राट चौधरी को बीजेपी आगे बढ़ा रही है. बीजेपी के दूसरे ओबीसी नेता भी कुशवाहा को पार्टी में लाने के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं. हालांकि, राजनीति में ये सारे समीकरण समय के साथ बदलते रहते हैं. ऐसे में अब देखना है कि कुशवाहा और बीजेपी के बीच किस तरह से रिश्ते बनते हैं? 

कुशवाहा अपनी पार्टी को दोबारा करेंगे जिंदा? 
बिहार विधानसभा चुनाव के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) का जेडीयू में विलय कर दिया था. जेडीयू से एक बार फिर अलग होते हैं तो अपनी पार्टी को दोबारा से खड़ी कर सकते हैं. कुशवाहा  ने आरएलसपी के जरिए 2014 के चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन कर नीतीश कुमार का सफाया कर दिया था. तीन लोकसभा सीटें जीतने में सफल रहे थे और केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री भी बने थे. बीजेपी के लिए बिहार की सियासत में कुशवाहा और पासवान बड़ा सहारा बने थे. 

बिहार में एक बार फिर से उसी तरह से राजनीतिक हालत बन गए हैं, जिसके चलते ही माना जा रहा है कि कुशवाहा किसी दूसरे की पार्टी में जाने के बजाय खुद की पार्टी को दोबारा से जिंदा करें. हालांकि, आरएलएसपी को लेकर अरुण कुमार के साथ कानूनी लड़ाई चल रही है. इतना ही नहीं कुशवाहा के साथ जुड़े रहे तमाम नेता भी साथ छोड़ चुके हैं. ऐसे में कुशवाहा के लिए अपनी पार्टी को खड़ी करने आसान नहीं है, क्योंकि सियासी समीकरण काफी बदल गए हैं. 

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कुशवाहा क्या नई पार्टी बनाएंगे
बिहार की सियासत में आरएलएसपी की स्थिति फिलहाल ऐसी नहीं कि उपेंद्र कुशवाहा उसे को दोबारा से खड़ी करें. वो कानूनी दांवपेच में उलझने के बजाय अपनी नई पार्टी लांच करने का दांव चल सकते हैं. कुशवाहा ओबीसी समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं और उनके समुदाय का अच्छा खासा वोट है, जो बीजेपी और महागठबंधन के बीच बंटता रहा है. कुशवाहा समुदाय को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के मुद्दे पर वो दांव चल सकते हैं. बिहार में ओबीसी नेताओं की एक लॉबी ऐसी है, जो नीतीश और बीजेपी दोनों के साथ नहीं जाना चाहती है. ऐसे में लोगों के लिए वो विकल्प दे सकते हैं. 

हालांकि, उपेंद्र कुशवाहा के लिए नई पार्टी बनाना और फिर से खड़ा करना आसान नहीं है. कुशवाहा खुद इतने बार सियासी पल्टी मार चुके हैं कि उनके साथ राजनीतिक भरोसे की भी दिक्कत है. बिहार में बीजेपी, जेडीयू और आरजेडी जैसी मजबूत पार्टियां हैं, जिनके रहते हुए लोग उनके साथ क्यों जाना चाहेंगे. कुशवाहा 2020 के चुनाव में बसपा, ओवैसी, राजभर की पार्टी के साथ गठबंधन कर भी कोई असर नहीं दिखा सकें. ऐसे में जब अब जीतनराम मांझी से लेकर आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां तक जेडीयू के साथ हैं तो बीजेपी पासवान की पार्टी को फिर से एक करने में लगी है. ऐसे में कुशवाहा क्या सियासी कदम उठाएंगे यह तो वक्त ही बताएगा? 

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