Politics of Bihar: बिहार की राजनीति में इन दिनों उथल-पुथल मची हुई है. सोमवार सुबह खबर आई कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी (JDU) के विधायकों को फरमान जारी किया है कि वे अगले 72 घंटे पटना छोड़कर कहीं ना जाएं. इस बात के सामने आने के बाद बिहार की सियासत में हड़कंप मच गई.
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने भी एक बयान जारी करके हलचल बढ़ा दी है. सोमवार को राजद की तरफ से कहा गया है कि बिहार की राजनीति के लिए अगले 72 घंटे भारी होने वाले हैं. राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि बिहार में एनडीए की नाव डगमगा गई है. नीतीश के जातीय जनगणने के स्टैंड पर तेजस्वी उनके साथ खड़े हैं. इसलिए बिहार की राजनीति करवट बदल सकती है.
हालांकि, जदयू ने विधायकों को 72 घंटे पटना में रहने का फरमान देने से इनकार कर दिया है. जनता दल यूनाइटेड के एमएलसी नीरज कुमार ने कहा कि विधानमंडल का सदस्य होने के बाद भी उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. औपचारिक या अनौपचारिक रूप से ऐसा कोई फरमान जारी नहीं हुआ है.
सहयोगी पार्टी हम ने भी किया किनारा
72 घंटे वाले फरमान से जदयू के सहयोगियों ने भी इनकार किया है. जदयू की सहयोगी और पूर्व सीएम जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा ने ऐसे किसी भी फरमान से इनकार किया है. हम के प्रधान महासचिव दानिश रिजवान ने कहा कि बिहार में कोई राजनीतिक संकट नहीं है. 2025 तक एनडीए सरकार चलेगी. जेडीयू ने अपने विधायकों को 72 घंटों का कोई फरमान जारी नहीं किया गया है.
आरसीपी सिंह को राज्यसभा भेजने पर सस्पेंस
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने पुराने सहयोगी और केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह को तीसरी बार राज्यसभा भेजेंगे या नहीं इसको लेकर सस्पेंस बरकरार है. आरसीपी सिंह के भविष्य को लेकर बिहार के राजनीतिक गलियारे में जबरदस्त हलचल है. एक तरफ 24 मई से राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है. वहीं, दूसरी तरफ 27 मई को बिहार में जातीय जनगणना कराने के मुद्दे पर नीतीश ने सर्वदलीय बैठक बुला ली है.
जातीय जनगणना के पक्ष में नहीं भाजपा
बीजेपी कई बार स्पष्ट कर चुकी है कि वह जातीय जनगणना कराने के पक्ष में नहीं है. ऐसे में आरसीपी सिंह के भविष्य और जातीय जनगणना कराने के मुद्दे पर होने वाली सर्वदलीय बैठक को लेकर बिहार का राजनीतिक तापमान चढ़ा हुआ है.