भारत के ज्यादातर राज्य मॉनसून के असमय आगमन और उम्मीद से कम बारिश के कारण परेशान हैं. इन राज्यों में बीते कई साल से कम बारिश एक गंभीर समस्या बनी हुई है. बिहार भी कई वर्षों से मानसून की कम बारिश और जलवायु परिवर्तन की समस्या जूझ रहा है.
प्रकृति की इस मार को देखते हुए बिहार के कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि वर्षा की कमी और जलवायु परिवर्तन को देखते हुए प्रदेश के गांवों को क्लाइमेट स्मार्ट बनाया जाएगा, ताकि बेहतर खेती हो सके. इसके लिए तत्काल चार कॉरिडोर भागलपुर मुंगेर स्टेट हाईवे, पूर्णिया कटिहार स्टेट हाईवे, दरभंगा समस्तीपुर स्टेट हाईवे और पटना नालंदा स्टेट हाईवे का चयन किया गया है.
इस परियोजना के तहत 8 जिलों के 100 गांवों का चयन किया जा रहा है. इसके लिए कुल खर्च 23 करोड़, 6 लाख 62 हजार रुपए आने की बात कही गई है. कृषि मंत्री प्रेम कुमार बुधवार को बामेती में जलवायु परिवर्तन को लेकर 'क्लाइमेट स्मार्ट गांव' पर आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन कर कर रहे थे.उन्होंने कहा कि इस योजना का लाभ 10 हजार किसानों को मिलेगा और इस योजना को 4 एजेंसियों के जरिए पूरे राज्य में लागू किया जाएगा. इनमें बीमा सिमिट, पूसा समस्तीपुर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्व विद्यालय, बीएयू सबौर और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के माध्यम से सफल कराया जाएगा. बाद के वर्षों में इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा.
इस योजना का तत्काल लाभ जिन 8 जिलों को मिलेगा उनमें पटना, नालंदा, मुंगेर, भागलपुर, कटिहार, पूर्णिया, दरभंगा एवं समस्तीपुर शामिल है. इन जिलों के कुल 100 गांवों के 10 हजार किसानों को इस योजना के तहत लाभ दिलाने का लक्ष्य है. इस परियोजना के तहत गेहूं, धान, मक्का, अरहर, मसूर आदि फसलों को प्रमुखता दी गयी है, जिनके ऊपर मौसम के बदलते मिजाज को ध्यान में रखते हुए खेती कराई जाएगी.
इस योजना का मुख्य लक्ष्य उत्पादन एवं उत्पादकता को बढ़ाना है. योजना के तहत किसानों को इसके लिए प्रशिक्षित करना, किसानों का समूह निर्माण करना और फसल की उन्नत तकनीकों का उपयोग करना शामिल है.
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