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Biharsharif: दर्जनों प्रवासी पक्षियों की मौत से दहशत, कारणों का खुलासा नहीं

बिहारशरीफ कोर्ट परिसर और थाना कार्यालय के आसपास रह रहे दर्जनों प्रवासी पक्षियों की अचानक मौत हो गई. पक्षियों की मौत से लोगों में दहशत फैल गई. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई और घटनास्थल का निरीक्षण शुरू कर दिया. इस दौरान डीएफओ के. नेशामणि ने बताया कि मौके से कई नमूने लिये गये हैं.

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प्रवासी पक्षियों की मौत का कारण नहीं हुआ स्पष्ट.
प्रवासी पक्षियों की मौत का कारण नहीं हुआ स्पष्ट.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • प्रवासी पक्षियों की मौत का कारण नहीं हुआ स्पष्ट
  • जांच के लिए नमूनों को भेजा गया कोलकाता
  • वन विभाग की टीम कर रही मामले की जांच

बिहारशरीफ कोर्ट परिसर और थाना कार्यालय के पास एक साथ दर्जनों प्रवासी पक्षियों की मौत से दहशत फैल गई. सूचना के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई. पक्षियों के मरने का कारण फिलहाल पता नहीं चल सका है. वन विभाग की टीम मरे हुए पक्षियों को अपने साथ ले गई. इन प्रवासी पक्षियों की मौत का कारण पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है.  

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बिहारशरीफ कोर्ट परिसर और थाना कार्यालय के आसपास रह रहे दर्जनों प्रवासी पक्षियों की अचानक मौत हो गई. पक्षियों की मौत से लोगों में दहशत फैल गई. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई और घटनास्थल का निरीक्षण शुरू कर दिया.

इस दौरान डीएफओ के. नेशामणि ने बताया कि मौके से कई नमूने लिये गये हैं. उन नमूनों को जांच के लिए कोलकाता लैब में भेजा जाएगा. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पक्षियों की मौत का कारण पता चल सकेगा. बताया जा रहा है कि पक्षी रोग विशेषज्ञों की टीम भी इस मामले में जांच करेगी. 

घोंघिल नाम से जाने जाते ये पक्षी 
वन विभाग के विशेषज्ञों ने बताया कि मरने वाले पक्षियों में अधिकतर एशियन ओपनबिल प्रजाति के हैं. ये पूरी तरह मांसाहारी होते हैं. इनका संबंध स्टार्क प्रजाति से है. इन पक्षियों का मुख्य आहार घोंघा है. घोंघा खाने की आदत के कारण इसे घोंघिल नाम से भी जाना जाता है. 

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मौत के हो सकते हैं कई कारण
वन्य जीव शोधकर्ता इस मामले में बताते हैं कि पक्षियों की अचानक मौत के कई कारण हो सकते हैं. मौसम की मार, अचानक कोई बीमारी से ग्रसित हो जाना या फिर भोजन की कमी. इन पक्षियों की मौत का कारण क्या है, अब ये तो जांच के बाद ही पता चल सकेगा.

हर वर्ष आते हैं ये पक्षी
घोंघिल नाम के ये पक्षी हर वर्ष नालंदा जिले के सिविल कोर्ट, नालंदा कॉलेज के परिसर, बिहार थाना व अन्य जगहों पर प्रवास के लिए आते हैं. इन पक्षियों के आने का समय अगस्त माह होता है. यहां आने के साथ ही प्रजनन के लिए घोंसला निर्माण का काम शुरू कर देते हैं. ये पक्षी भारत उपमहाद्वीप के अलावा दक्षिण-पूर्व एशियाई देश, चीन, आस्ट्रेलिया, कंबोडिया, थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, म्यांमार, मलेशिया व सिंगापुर में भी भारी संख्या में पाए जाते हैं.

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