वैशाली का विशुन राय कॉलेज अपनी माफियागिरी की वजह से बीते कई वर्षों से सरकार की रडार पर था. इस कॉलेज के पहले के टॉपर्स पर भी सवाल उठे थे. लेकिन रूबी राय और सौरभ श्रेष्ठ के मामले में पहली बार कॉलेज सरकार के सीधे निशाने पर है. टॉप करवाने के इस खेल को लेकर बड़ा खुलासा अब हुआ है. बताया जाता है कि कॉलेज इसके लिए परीक्षा के बाद छात्रों की कॉपी ही बदल देता था.
इसमें कोई शक नहीं है कि मामले में बिहार सरकार और परीक्षा समिति की घोर किरकिरी हो रही है. ऐसे में सवाल यह उठते हैं कि आखिर फुलप्रूफ सुरक्षा होने के बावजूद कॉलेज टॉप करवाने के लिए कॉपी बदलने की अपनी सेंटिंग में कैसे सफल रहा?
सरकार के रडार पर रहने के बावजूद कॉलेज ने की धांधली
सरकार के सूत्रों के मुताबिक, पूरे वैशाली जिले की कॉपी जांच के लिए कैमूर भेजी गई थी, वहीं विशुन राय कॉलेज की कॉपी को पटना के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले राजेंद्र नगर जांच केंद्र पर लाई गई थी. बीते साल के इसी कॉलेज के टॉपर पर सवाल उठे थे. इसलिए सरकार ने इस बार इस कॉलेज के लिए खास इंतजाम तक किए थे, लेकिन इस बार भी इस कॉलेज की कापियों में सेंध लग गई. सूत्रों के मुताबिक टॉपरों की पूरी कॉपी ही बदल दी गई है, इस कॉपी पर नंबर तो एक हैं लेकिन पूरी कॉपी अलग है.
कहां हुआ कॉपियों में फेरबदल
सरकारी तंत्र इस बात से हलकान है कि सरकार की रडार पर होने के बावजूद कॉपियों में फेरबदल कहां और कैसे हो गया. सूत्रों की माने तो ये फेरबदल परीक्षा सेंटर पर हुआ या फिर पटना के जांच सेंटर पर. बहुत ही सफाई से इन कॉपियों को बदल दिया गया . इस बार परीक्षा कदाचार मुक्त था. पिछले साल मैट्रिक परीक्षा के नकल की तस्वीरें दुनियाभर में वायरल हुई थी और बिहार सरकार की जमकर किरकिरी हुई. तो इस बार परीक्षा इतनी कड़ाई से ली गई कि इंटर परीक्षा में 50 फीसदी छात्र फेल कर गए. हजारों की तादाद में छात्रों ने परीक्षा बीच में ही छोड़ दी. पूरे परीक्षा की विडियो रिकॉर्डिंग की गई, लेकिन आखिर कॉपियां कहां बदली गई और किसके इशारे पर इतना बड़ा काम हुआ?
पटना में ही कॉपी बदले जाने का शक
जाहिर है कोई छोटा-मोटा शख्स इस काम को अंजाम नहीं दे सकता. ऐसे में कहीं न कहीं किसी बड़ी मछली का हाथ जरूर है. सूत्रों के मुताबिक कॉपियों में फेरबदल का काम पटना में ही किया गया होगा जहां कुछ खास लोगों को ही जाने की इजाजत थी. ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि उसकी जांच रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हो जाएगा कि आखिर किस शख्स के इशारे पर टॉपर्स की माफियागिरी सरकार की नाक के नीचे हो गया.
शिक्षा मंत्री ने माना कि सिस्टम में कुछ 'ब्लैक शिप'
राज्य के शिक्षामंत्री अशोक चौधरी ने 'आज तक' के खास बातचीत में माना कि सिस्टम में कुछ ब्लैक शिप हैं, जिन्होंने पूरे व्यवस्था के साथ खिलवाड़ किया है. सरकार के स्तर पर भी भारी चूक हुई है. इसने कदाचार मुक्त परीक्षा के तमाम दावों की बखिया उधेड़ दी है. ऐसे में जल्द ही वो तमाम चेहरे सामने आएंगें जिनकी मिलीभगत से इसे अंजाम दिया गया है.