बिहार में जहरीली शराब कांड के बाद आजतक की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम ने 2022 की सबसे बड़ी तहकीकात की. आजतक की SIT टीम ने अपनी जान जोखिम में डालकर खुफिया कैमरे में बिहार का सनसनीखेज सच कैद किया. इस दौरान कई खुलासे हुए. बिहार में शराब कैसे बनती है? कैसे बिकती है? इन सभी सवालों के जवाब इस जांच के दौरान मिले. खुफिया कैमरे पर कच्ची शराब फैक्ट्री के कर्मचारी ने खुद कहा कि यहां आकर पुलिस वाले भी पीते हैं. फैक्ट्री के कर्मचारी ने बताया कि बहुत बड़े-बड़े लोग, कोर्ट से आने वाले लोग भी यहां शराब पीने आते हैं.
हमारी यह तहकीकात बिहार सरकार और सरकारी सिस्टम में खामियों पर सीधी चोट है. दरअसल बिहार में जहरीली शराब से अब तक 70 से ज्यादा मौत हो चुकी हैं. सूबे के मुख्यमंत्री का कहना है कि शराब पीने वाली की नियती मृत्यु है...सवाल ये है कि बिहार में शराबंदी है तो कच्ची शराब की फैक्ट्रियों पर आंखें मूंदकर बैठे जिम्मेदारों का क्या है. हमारी तहकीकात के दौरान शराब माफिया और सफेदपोशों के नेक्सेस का सनसनीखेज खुलासा हुआ यानी पूरा खेल शराब माफियाओं के गॉड फादर के इशारे पर चल रहा है.
बिहार में पूरी तरह से बंद है शराब
बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद अधिनियम, 2016 के तहत पूरे बिहार में शराबबंदी है. बिहार में शराब की बिक्री, शराब का उत्पादन और शराब का सेवन तीनों को ही अपराध की श्रेणी में रखा गया है. शराबबंदी के बावजूद हमारी तहकीकात में कच्ची शराब के धंधा के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ. कच्ची शराब का धंधा करने वाले कई चेहरे सामने आए. हमारी तहकीकात का मकसद कच्ची शराब के गैरकानूनी ठिकानों का सच दुनिया के सामने सामने लाना है.
प्रशासन की नाक के नीचे बनती है कच्ची शराब
बिहार के छपरा में जिला पुलिस अधीक्षक के दफ्तर से करीब पांच किलोमीटर दूर आजतक के अंडरकवर रिपोर्टर दियारा इलाके में पहुंचे. हमें पुख्ता जानकारी मिली कि नदी के दूसरी ओर पुलिस-प्रशासन के नाक के नीचे कच्ची शराब की कई फैक्ट्री खुलेआम चल रही हैं. आजतक के रिपोर्टर इस जगह ग्राहक बनकर पहुंचे थे. वहां पहुंचकर आजतक के रिपोर्टर कच्ची शराब की फैक्ट्री का नजारा देखकर दंग रह गए. खुलेआम शराब तैयार की जा रही थी, भट्टी चल रही थी और प्लास्टिक की पन्नियों में कच्ची शराब की खेप की पैकिंग जारी थी. हमारी मुलाकात पैकिंग कर रहे खेसारी लाल यादव से हुई. कच्ची शराब की फैक्ट्री में काम कर रहे खेसारी लाल यादव ने पूरी रेट लिस्ट समझा दी. साथ ही उन्होंने गारंटी दी कि फैक्ट्री में पैक हुई शराब से कोई खतरा नहीं है.
बातचीत में खेसारी खुलता चला गया और ये तक समझा दिया कि कच्ची शराब बनाने का पूरा फॉर्मूला क्या है. अब सवाल ये है कि कच्ची शराब की फैक्ट्री का मालिक कौन हैं, यानी किसके इशारे पर ये पूरा धंधा चल रहा है तो हमें एक चौंकाने वाला सच पता चला. मतलब ये कि पूरे खेल की ये छोटी मछली हैं, जबकि पैकिंग के बाद शराब की डिलिवेरी किसे होती हैं, इसकी जानकारी टॉप सीक्रेट रखी जाती है. बिहार में खुलेआम कच्ची शराब का धंधा चल रहा है, हमारे रिपोर्टर ने जो देखा और खुफिया कैमरे में जो सच कैद हुआ, वो बिहार पुलिस के दावों की पोल खोलता है, मतलब ये कि पुलिस फुल एक्शन में है और कच्ची शराब माफियाओं पर नॉन-स्टॉप पर कार्रवाई की जा रही है. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही दिखी.
कितनी है इस शराब की कीमत?
इस कच्ची शराब के दाम पर भी आपको नजर डालनी चाहिए. बता दें कि 500 रुपये में 7 लीटर नकली शराब बेची जाती है. मतलब ये कि करीब 71 रुपए में एक लीटर कच्ची शराब यहां से सप्लाई की जाती है. दावा ये है कि एक छोटी सी फैक्ट्री में भी रोजाना 500 लीटर तक नकली शराब आसानी से तैयार की जाती है और इसे तैयार करना कुछ घंटों का काम है.
बातचीत में कच्ची शराब बनाने वाले खेसारी ने ये समझाने की कोशिश की कि यहां तैयार हुई कच्ची शराब से कोई नुकसान नहीं होने वाला. नकली शराब फैक्ट्री में काम करने वाल कर्मचारी ने एक और बड़ा खुलासा किया. खेसारी लाल यादव ने हमें गारंटी दी कि पुलिस से लेकर कोर्ट-कचहरी से जुडे लोग यहां आते हैं. मतलब ये कि गैरकानूनी धंधा सबकी नजर में हैं. यहां तक कि अब इस धंधे से जुड़े लोगों को जेल और कानून का डर भी नहीं है.
इन सवालों की तलाश अब भी जारी
हालांकि कुछ दिन पहले छपरा के पुलिस अधीक्षक खुद अपनी पीठ थपथपा रहे थे. इस दावे के साथ कि पूरे जिल में एक्शन जारी है. ऐसे में सवाल यह है कि मिलीभगत के बिना ये धंधा धड़ल्ले से नहीं चल सकता, खुद धंधे से जुड़े लोग कबूल कर रहे हैं कि सालों से खेल जारी है. सवाल ये भी है कि आखिर बिहार पुलिस छापेमारी की ये तस्वीरें स्क्रिप्टेड तो नहीं? सवाल ये भी है कि कानून के लंबे हाथ आखिर शराब माफियाओं के गिरेबां तक क्यों नहीं पहुंच रहे हैं? आखिर शराब माफियाओं का गॉडफादर कौन हैं?
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