पटना में आरजेडी कार्यकारिणी की बैठक खत्म हो गई है. बैठक के ठीक बाद मीडिया को संबोधित करते हुए पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद ने कहा कि जनता परिवार का विलय हो गया है और इसमें छह पार्टियां होंगी. हालांकि लालू प्रसाद ने यह भी कहा कि इस बाबत औपचारिक ऐलान सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव करेंगे.
गौरतलब है कि जनता परिवार के महाविलय को लेकर लंबे समय से अटकलें और कयास लगाए जा रहे हैं. दिलचस्प यह है कि लालू प्रसाद का ताजा बयान ऐसे समय आया है, जब बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू नेता नीतीश कुमार दिल्ली में मुलायम सिंह यादव से मुलाकात करने आए हैं. दोनों नेताओं के बीच मुलाकात भी हो गई है. लेकिन मुलाकात में क्या कुछ बात हुई इस बाबत कोई जानकारी सामने नहीं आई है.
दूसरी ओर, रविवार को पटना में कार्यकारिणी की बैठक के बाद लालू प्रसाद ने कहा, 'बस आप यह समझिए कि विलय हो गया है. अब एक ही चिन्ह होगा और सभी बाकी चिन्ह खत्म हो जाएंगे. मुलायम सिंह इसका औपचारिक ऐलान करेंगे. बाकी जो भी औपचारिक घोषणाएं हैं सभी मुलायम सिंह करेंगे.'
सूत्रों का कहना है कि जनता परिवार के विलय को लेकर आरजेडी में कई नेता आपत्ति जता चुके हैं. इन नेताओं का कहना है कि वो जनता दल यूनाइटेड के उन नेताओं के साथ मिलकर कैसे काम सकते हैं, जो वर्षों से उनके धुर विरोधी रहे हैं. माना जा रहा है कि कार्यकारिणी की बैठक में लालू इन सभी अंसतुष्ट नेताओं को भी विलय के लिए राजी किया है.
साइकिल पर होगा परिवार सवार
नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव ने पहले ही साफ कर दिया है कि जनता परिवार का विलय समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में होगा. खबर यह भी है कि जो नई पार्टी बनेगी उसे 'समाजवादी जनता पार्टी' के नाम से जाना जाएगा और सपा की 'साइकिल' ही इस पार्टी का चुनाव चिन्ह होगा. नई पार्टी के अध्यक्ष की भूमिका में मुलायम सिंह नजर आएंगे. हालांकि, पार्टी का झंडा क्या होगा, यह अभी तय नहीं हो सका है.
बीजेपी के लिए चुनौती बनेगा महागठबंधन
विलय का सबसे बड़ा सियासी फायदा राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यूनाइटेड को होगा. अब तक चुनाव में दोनों ही पार्टियां आपस में भिड़ती रहीं, कई बार एक दूसरे के वोट बैंक को नुकसान भी पहुंचाया. अगर विलय हो जाता है तो दोनों पार्टियों के वोट बैंक का साथ आना तय माना जा रहा है. ऐसे में यह गठबंधन राज्य में बीजेपी को मजबूत चुनौती देने की स्थिति रहेगा और बीजेपी विधानसभा चुनाव में हार जाती है तो इसका असर उत्तर प्रदेश चुनावों में भी दिखेगा.