बिहार में 14 साल पुराना भ्रष्टाचार का मामला उजागर होने के बाद सियासी दंगल मचा हुआ है. लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए नौकरी के बदले कथित जमीन घोटाला हुआ था, सीबीआई ने उसकी जांच तेज कर दी है. बुधवार को बिहार, दिल्ली और हरियाणा में कुल 25 ठिकानों पर सीबीआई ने छापेमारी की.
आरोप है कि रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव ने पटना के 12 लोगों को ग्रुप डी में चुपके से नौकरी दी और उनसे अपने परिवार के लोगों के नाम पटना में जमीनें लिखवा लीं. सीबीआई का दावा है कि लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती और हेमा यादव के नाम प्लॉट्स की रजिस्ट्री कराई गई और जमीन की मामूली कीमत नकद में चुकाई गई.
आवेदन देने के 3 दिन के अंदर नौकरी!
उधर रेलवे में जिन पदों पर भर्ती हुई, उसका न तो विज्ञापन निकाला गया और न ही सेंट्रल रेलवे को सूचना दी गई. आवेदन देने के 3 दिन के अंदर नौकरी दे दी गई.
इसी मामले में सीबीआई ने अब जांच तेज कर दी है. लेकिन आरजेडी का कहना है कि जिस दिन विधानसभा में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की नई सरकार का शक्ति परीक्षण होना था, उसी दिन सीबीआई ने ये छापेमारी की है लिहाजा ये बदले की कार्रवाई है.
दोनों पक्षों के आरोपों और दावों के बीच कई बड़े सवाल भी हैं कि आखिर रेलवे में ग्रुप डी के पदों पर भर्ती में घोटाला हुआ या नहीं, क्या लालू यादव के परिवार के लोगों को औने-पौने दाम पर जमीनें दी गईं. क्या घोटाले की रकम का इस्तेमाल गुरुग्राम की कंपनियों में भी हुआ या फिर केंद्रीय जांच एजेंसियां सिर्फ राजनीतिक कारणों से लालू यादव परिवार के खिलाफ जांच कर रही है.
तेजस्वी के करीबियों के ठिकानों पर छापे
सीबीआई ने आज पटना से लेकर मधुबनी, कटिहार तक और दिल्ली से लेकर गुरुग्राम तक छापेमारी की. इसमें कुल 25 ठिकाने शामिल थे. पटना में आरजेडी के विधान परिषद सदस्य और बिस्कोमान पटना के चेयरमैन सुनील सिंह, आरजेडी के पूर्व एमएलसी सुबोध राय, आरजेडी के राज्यसभा सांसद अशफाक करीम और फैयाज अहमद के ठिकानों पर छापे पड़े.
गुरुग्राम में तेजस्वी यादव के करीबी के ठिकानों पर छापे पड़े. गुरुग्राम में अर्बन क्यूब्स 71 नाम के मॉल में भी छापेमारी हुई. Whiteland Corporation नाम की कंपनी जिसका दफ्तर गुरुग्राम के सेक्टर 65 में है और Landbase Private Limited नाम की दूसरी कंपनी जिसका दफ्तर गुरुग्राम के सेक्टर 42 में है. ये दोनों कंपनियां तेजस्वी यादव के करीबी की बताई गई. इसपर सफाई देते हुए तेजस्वी यादव ने आज कहा कि मॉल से उनका कोई लेना-देना नहीं है और उसका उद्घाटन बीजेपी सांसद ने किया था. वह बोले कि उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश हो रही है. वहीं आरजेडी नेता सुनील सिंह ने सीबीआई की कार्रवाई को बदले की कार्रवाई करार दिया.
सीबीआई की जांच में अबतक क्या सामने आया?
बिहार से लेकर दिल्ली और हरियाणा तक सीबीआई की ये छापेमारी लालू यादव के जमाने में हुए कथित भ्रष्टाचार के आरोप में की जा रही है. सीबीआई ने 23 सितंबर 2021 को शुरू की गई अपनी प्राथमिक जांच में पाया कि लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए रेलवे में जिन लोगों को अवैध रूप से चतुर्थ श्रेणी की नौकरियां दी, उसके बदले उनसे औने-पौने दाम पर ज़मीनें ले ली गईं.
इस मामले में सीबीआई ने 18 मई 2022 को भ्रष्टाचार निरोधक कानून और आईपीसी की धारा 120बी के तहत एफआईआर दर्ज की थी. जिसमें लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव समेत उन 12 लोगों को भी आरोपी बनाया है जिसने लालू परिवार को जमीन देकर नौकरी ली.
इससे पहले दिल्ली, पटना और गुरुग्राम में छापे भी मारे थे. इसी दौरान सीबीआई ने लालू यादव के करीबी भोला यादव को गिरफ्तार भी किया था. आगे की पड़ताल में पता चला कि लालू यादव की पत्नी और बेटियों के नाम पटना में कुल 1 लाख वर्गफीट से ज्यादा की जमीन ली गई थी. सीबीआई के पास इसके सबूत भी मौजूद हैं.
नौकरी के बदले जमीन कांड क्या?
पटना में तीन सेल डीड राबड़ी देवी के नाम है. दो डीड फरवरी 2008 की है, जिसमें 3375-3375 वर्ग फीट के 2 प्लॉट हैं. तीसरी सेल डीड 2015 की है जिसमें 1360 वर्ग फीट का एक प्लॉट है. इसके अलावा पटना में ही 2007 की एक सेल डीड लालू की बेटी मीसा भारती के नाम है जिसमें उन्हें 80,905 वर्गफीट का प्लॉट दिया गया.
पटना में ही दो गिफ्ट डीड लालू की बेटी हेमा यादव के नाम है. जिसमें हेमा यादव को 3375 वर्गफीट का प्लॉट दिया गया. दूसरा 3375 वर्ग फीट का प्लॉट 2014 में हेमा यादव को गिफ्ट किया गया.
एक डीड एके इन्फोसिस्टम्स नाम की कंपनी के नाम किया गया जिसमें 9527 वर्ग फीट का प्लाट दिया गया. बाद में इस कंपनी की डायरेक्टर राबड़ी देवी बन गईं.
गौर करने की बात ये है कि जिन लोगों ने या जिनके परिवार वालों ने लालू के परिवार वालों को ये जमीनें दीं, उन सबको लालू यादव के मंत्री रहते हुए रेलवे में नौकरी दी गई.
कैसे हुआ भ्रष्टाचार?
सीबीआई की अब तक की तफ्तीश में पता चला है कि लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए. पटना के रहने वाले 12 लोगों को रेलवे के 6 अलग अलग ज़ोन में ग्रुप डी के अंदर पहले बतौर सब्स्टिट्यूट नौकरी दी गई. फिर उन्हें रेग्युलर कर दिया गया. आरोपियों को 2008-09 के बीच मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर, हाजीपुर में नौकरी दी गई. जबकि रेलवे ने कोई विज्ञापन तक नहीं निकाला. आवेदन देने के 3 दिन के अंदर भर्ती हो गई. सेंट्रल रेलवे को खबर तक नहीं दी गई.
कुल ऐसे सात मामले थे जिसमें नौकरी के बदले जमीन ली गई और ज्यादातर मामलों में जमीन खरीदने में नकद भुगतान किया गया. सीबीआई का आरोप है कि नौकरी के बदले जमीन के घोटाले में कुल 1 लाख 5,292 वर्ग फीट जमीन लालू यादव परिवार को मिली. सर्किल रेट के हिसाब से जमीन की कीमत कम से कम 4 करोड़ 39 लाख 80 हजार 650 रुपये है. जिसे उस वक्त सर्किल रेट से भी कम में नकद पैसे देकर खरीदा गया था.