बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शराब माफिया से सख्ती से निपटने की बात करते हैं तो वहीं दूसरी तरफ शराब की तस्करी और आपूर्ति के साथ ही नकली शराब का उपयोग भी जारी है. इसकी वजह से पूर्ण शराबबंदी वाले बिहार में शराब के सेवन से लोगों की मौत की खबरें भी लगातार आ रही हैं. सिर्फ सारण जिले में ही जनवरी से अब तक शराब के सेवन से कम से कम 50 लोगों की मौत हो चुकी है.
सारण जिले में अब तक तीन ऐसी बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं जिनको लेकर जिला प्रशासन भी ये स्वीकार कर चुका है कि मौत की वजह शराब का सेवन था. अगर छिटपुट घटनाओं को भी जोड़ लिया जाए तो शराब के सेवन से मरने वालों का आंकड़ा सौ के भी पार चला जाएगा. नकली शराब को लेकर सारण पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है.
सारण उत्पाद विभाग के मुताबिक शराब तस्करी को लेकर हो रहे एक्शन के कारण माफिया अब नकली शराब का निर्माण कर रहे हैं जिसमें ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जा रहा है. ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का इस्तेमाल पशु से दूध निकालने के लिए किया जाता रहा है. ये इंजेक्शन भी प्रतिबंधित है लेकिन इसके बावजूद बाजार में ये आसानी से सुलभ है.
कहा जा रहा है कि शराब कारोबारी शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाले जावा और गुड़ को फर्मेंटेट करने के लिए उसमें ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन मिला रहे हैं. ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का उपयोग कर शराब कारोबारी कम समय में अधिक शराब का उत्पादन कर ले रहे.
सारण जिले के उत्पाद अधीक्षक रजनीश ने बताया कि आमतौर पर ऑक्सीटोसिन किसी भी प्रक्रिया को तेज कर देता है या समय से पहले रिजल्ट ला देता है. ये उत्प्रेरक का काम करता है. यही कारण है कि शराब कारोबारी चोरी-छिपे बाजार में मिलने वाले ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन को लेकर शराब बनाने के लिए फर्मेंटेशन में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं.
जहरीली शराब के पीछे क्या
सारण के उत्पाद अधीक्षक ने हालांकि, ये भी साफ किया कि शराब के जहरीली होने में ऑक्सीटोसिन का कोई ज्यादा रोल नहीं है. जहरीली शराब के लिए ऑक्सीटोसिन नहीं, मेंथिल अल्कोहल जिम्मेदार है. बताया जा रहा है कि ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का इस्तेमाल सब्जी की खेती में भी चोरी-छिपे उपज का आकार तेजी से बढ़ाने के लिए किया जा रहा है जो स्वास्थ्य के लिहाज से नुकसानदेह है.
लगातार एक्शन से टूटी माफिया की कमर
जहरीली शराब से हो रही मौत और ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन जैसी चीजों का उपयोग कर नकली शराब बनाए जाने के पीछे पुलिस-प्रशासन के अधिकारी तस्करी के खिलाफ लगातार एक्शन को वजह बता रहे हैं. पुलिस-प्रशासन से जुड़े लोग ये दावा कर रहे हैं कि अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस टीमें शराब माफिया के खिलाफ लगातार एक्शन ले रही हैं. ड्रोन कैमरे से लोकेशन की सटीक जानकारी और लाइव तस्वीरें छापेमारी टीम को मिल जा रही हैं जिससे छापेमारी कर उसे नष्ट करने में सहायता मिल रही है. गौरतलब है कि बिहार में अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है.