बिहार में जहरीली शराब पीने से मौतों का मामला गरमा गया है. छपरा, सारण, सिवान और बेगूसराय में अब तक 72 मौतें हो गई हैं. इस बीच, बीजेपी नेता सुशील मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोला है. सुशील मोदी ने कहा कि शराबबंदी के कानून में ये प्रावधान है कि अगर जहरीली शराब से मौत होती है तो मृतक को 4 लाख रुपए और बीमार होने पर 2 लाख रुपए मुआवजा दिया जाएगा. ये राशि शराब बेचने वाले से वसूल की जाएगी.
नीतीश कुमार की सरकार में डिप्टी सीएम रहे सुशील कुमार मोदी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि उनके पूर्व बॉस (नीतीश) जिद्दी हैं. शराब त्रासदी के पीड़ितों को मुआवजे के लिए शराबबंदी कानून में प्रावधान है. मोदी ने 2016 के बिहार आबकारी अधिनियम के एक खंड का हवाला दिया और कहा- संदिग्ध नकली शराब के सेवन से मरने वालों के परिवार के सदस्यों को चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने पर विचार किया जा सकता है. जबकि बीमार होने वालों को 40,000 रुपये मिल सकते हैं.
'मरने वालों की संख्या 100 पार कर गई'
उन्होंने आरोप लगाया कि जहरीली शराब त्रासदी में मरने वालों की संख्या 100 से अधिक है. मैं कल जान गंवाने वालों के परिवार से मिलकर आया हूं. सरकार मौतों के आंकड़े छिपाने की कोशिश में लगी है. प्रशासन लोगों को डरा रहा है ताकि वे बिना पोस्टमार्टम के शवों का अंतिम संस्कार कर दें.
सुशील मोदी ने कहा- ज्यादातर पीड़ित दलित, महादलित और समाज के पिछड़े तबके से होने के बावजूद नीतीश कुमार क्रूर और संवेदनशील हो गए हैं और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने से इनकार कर दिया है. नीतीश कुमार कहते हैं कि जो पीएगा वह मर जाएगा लेकिन अगर किसी ने कानून का उल्लंघन किया है और शराब का सेवन किया है तो क्या सरकार उसे मरने के लिए छोड़ देगी? यहां तक कि अपराधियों को भी अस्पताल में इलाज कराने का अधिकार है. बीजेपी बख्शने वाली नहीं है.
उन्होंने कहा- हम यह सुनिश्चित करेंगे कि पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाए और इसके लिए हमारी पार्टी किसी भी हद तक जाएगी. मोदी ने राज्य सरकार के आंकड़ों पर भी सवाल किए. सरकार ने कहा कि 2016 से राज्य में शराबबंदी लागू होने के बाद से सिर्फ 23 लोगों की मौत शराब पीने से हुई है.राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) का डेटा तैयार किया गया है. सरकार का दावा हास्यास्पद है. सरकार मौतों की संख्या को छिपाना चाहती है.
सारण में शराब तस्कर गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस की एसआईटी टीम ने सारण में अखिलेश राय उर्फ अखिलेश कुमार यादव नाम के एक शराब तस्कर को गिरफ्तार किया है. अखिलेश के पास से शराब कारोबार से जुड़ा 2,17000 कैश और अहम दस्तावेज बरामद किए हैं. इससे पहले भी अखिलेश पर उत्पाद अधिनियम के तहत 4 केस दर्ज हो चुके हैं. आरोपी पर जहरीली शराब कांड में मशरक और इसुआपुर में भी अलग-अलग दो केस दर्ज हुए हैं.
'शराब त्रासदी में बिहार के मरे, पाकिस्तान के नहीं'
वहीं, इस मामले में सियासत भी तेज हो गई. बिहार विधान परिषद में नेता विपक्ष ने कहा कि जहरीली शराब त्रासदी में मरने वाले बिहार के हैं, पाकिस्तान के नहीं. बिहार की जनता ने आपको (नीतीश कुमार) सीएम बनाया है, इसलिए यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप उनके लिए काम करें. आपको इस त्रासदी में जान गंवाने वालों के परिवारों को मुआवजा देना चाहिए.
दूसरे राज्यों से तुलना करना शर्मनाक: अनिल विज
हरियाणा सरकार में गृह मंत्री अनिल विज ने बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी के बयान पर हमला बोला है. विज ने कहा कि बिहार के उपमुख्यमंत्री द्वारा अपने राज्य में जहरीली शराब से होने वाली मौतों की तुलना भाजपा शासित राज्यों में अन्य जहरीली शराब त्रासदियों से करना 'शर्मनाक' है. बिहार के उपमुख्यमंत्री बहुत ही शर्मनाक बात कह रहे हैं. यदि आपने शराब पर प्रतिबंध लगा दिया है तो यह अच्छी बात है, लेकिन यह आपकी जिम्मेदारी है कि किसी भी राज्य से आपके राज्य में आने वाली शराब को रोका जाए.
विज ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश से बिहार में सप्लाई की जाने वाली नकली शराब के मसले पर तेजस्वी यादव के बयान पर पलटवार किया है. विज ने कहा- आप कह रहे हैं कि आप अपनी जिम्मेदारी निभाने में असमर्थ हैं और पूरी तरह से विफल हैं और अपनी कमजोरियों को दूसरों पर थोप रहे हैं.
जदयू ने त्रासदी में मरने वालों की तुलना बम बनाने वालों से की
जदयू संसदीय बोर्ड के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने सारण जहरीली शराब त्रासदी के पीड़ित परिवार के सदस्यों को मुआवजा देने की भाजपा की मांग को 'गैर जिम्मेदाराना' बताया है. कुशवाहा ने मरने वालों की तुलना बम बनाने वालों से कर दी. उन्होंने पूछा- अगर बम बनाते वक्त किसी की मौत होती है तो क्या सरकार मुआवजा देती है? सरकार अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के लिए खड़ी नहीं हो सकती है.
कुशवाहा ने आगे कहा-अगर कोई अवैध रूप से बम बना रहा है और वो मारा जाता है तो क्या ये सरकारी मुआवजे का मामला बनता है? एक विपक्षी दल को बिना सोचे-समझे मांगों को नहीं उठाना चाहिए. जिस तरह से भाजपा व्यवहार कर रही है, वह गैर-जिम्मेदाराना है.
क्या है पूरा मामला
सारण जहरीली शराब त्रासदी में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई है. बिहार में अप्रैल 2016 में शराबबंदी लागू होने के बाद से यह सबसे बड़ी घटना है. हालांकि, कई अपुष्ट रिपोर्टों में मरने वालों की संख्या 50 से ज्यादा बताई गई है. अगस्त से विपक्ष में बैठी भाजपा विधानसभा में चल रहे शीतकालीन सत्र में जहरीली शराब त्रासदी का मामला उठा रही है और पीड़ितों के लिए मुआवजे की मांग को लेकर सड़कों पर उतर रही है. हालांकि, मुख्यमंत्री लगातार मुआवजा देने से इंकार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मुआवजा शराबबंदी के उद्देश्य को विफल कर देगा. राज्य की महिलाओं की मुखर मांग के बाद सभी दलों के बीच आम सहमति से शराबबंदी का फैसला लिया गया था.