
लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) में फूट के बाद से आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है. लोक जनशक्ति पार्टी किसके पास है? यह विवाद अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि पटना में पोस्टर के जरिए पार्टी में फूट के लिए नीतीश को विलेन और चिराग को हीरो बनाने का सिलसिला शुरू हो गया है.
अमर आजाद नाम के एक पार्टी प्रवक्ता ने दो पोस्टर जारी किया है, बिहारी फिल्म और बिहारी चक्रव्यूह के नाम से. बिहारी फिल्म वाले पोस्टर में लिखा गया है- चिराग दलित होके हमें 71 से 41 सीट पर ला दिया.... उपाय करते हैं.
नीतीश कुमार को इस फिल्म का निदेशक बताते हुए उनकी तस्वीर के नीचे लिखा गया है- तोड़ दो परिवार और पार्टी को. ललन सिंह को मुखबीर बताते हुए लिखा गया है- जी हुजूर. वहीं सूरजभान सिंह को विलेन बताते हुए लिखा गया है- मार दो पीठ में खंजर. जबकि पशुपति पारस को मोहरा और चिराग पासवान को हीरो बताया गया है.
वहीं एक अन्य पोस्टर में चिराग को अभिमन्यु दिखाया गया है, जो नीतीश कुमार और बागी सांसदों के रचे चक्रव्यूह में फंसे दिखाई पड़ रहे हैं.
LJP में बीते कई दिनों से मचे बवाल के बीच चिराग पासवान ने रविवार को दावा किया कि उनकी पार्टी एकजुट है. चिराग ने 'आजतक' से खास बातचीत में कहा है कि पार्टी की परिभाषा देखें तो वह संगठन से बनती है. महासचिव, प्रकोष्ठों के अध्यक्षों आदि से पार्टी बनती है. सांसद-विधायक तो आते-जाते रहते हैं. दुनिया की शायद ही कोई ऐसी पार्टी होगी, जिसमें से लोग गए नहीं होंगे. यहां पर यह दुख हुआ कि अपनों ने धोखा दिया.
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद चिराग पासवान ने कहा कि दो प्रदेश अध्यक्ष के अलावा, दूसरे गुट में और कोई भी नहीं गया. दिल्ली और जम्मू-कश्मीर को छोड़कर बाकी सभी इस बैठक में शामिल थे. जो यहां नहीं आ सका, वह वर्चुअली मीटिंग में शामिल हुआ. उन्होंने विश्वास जताया कि एलजेपी का सिंबल वही जीतेंगे. उन्होंने कहा, ''पार्टी के सिंबल की लड़ाई है ही नहीं, मुझे पूरा विश्वास है कि वह मेरे ही पक्ष में आएगा. अब पार्टी नई ऊंचाइयों पर जाएगी, यह मेरा विश्वास है.
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चिराग की बैठक से नाराज चाचा पशुपति
वहीं चिराग के चाचा पशुपति पारस, इस बैठक पर नाराज हो गए हैं. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने चिराग पासवान के साथ बैठक में भाग लिया है, उन सबको पार्टी नोटिस भेजेगी और सस्पेंड करेगी. पशुपति ने कहा कि चिराग पासवान के अध्यक्ष बनने के बाद नई कार्यकारिणी की घोषणा नहीं हुई है. 2015 में कार्यकारिणी के बाद नई घोषणा नहीं की गई. 2015 की लिस्ट में से कई लोग पार्टी छोड़कर जा चुके हैं या उनकी मृत्यु हो चुकी है. पार्टी की तरफ से चुनाव आयोग को नए अध्यक्ष के चुनाव के सभी दस्तावेज भेज दिए गए हैं. अब चुनाव आयोग और जो भी दस्तावेज मांगेगा वो हम लोग उन्हें देंगे.
क्या है विवाद
पिछले दिनों LJP में तब बवाल शुरू हो गया, जब पशुपति पारस समेत पांचों सांसदों ने खुद को चिराग पासवान से अलग कर दिया था. पारस ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर खुद को संसदीय दल का नेता बनाने की अपील की थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया था. बाद में चिराग पासवान ने पशुपति पारस द्वारा लिए गए फैसले को पार्टी के संविधान के खिलाफ बताया. यही नहीं दोनों नेता चुनाव आयोग तक पहुंच गए.