लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) में चाचा-भतीजे की लड़ाई जारी है. चाचा पशुपति पारस ने पार्टी पर कब्जे की लड़ाई में बाजी मारी तो चिराग पासवान ने सभी बागियों को बाहर करने का फरमान जारी कर दिया. दिल्ली से पटना तक चाचा-भतीजा के समर्थक सड़कों पर हैं. एलजेपी के अंदर जारी इस रस्साकस्सी पर जानिए संविधान एक्सपर्ट सुभाष कश्यप क्या कहते हैं-
आजतक से बातचीत में संविधान एक्सपर्ट सुभाष कश्यप ने कहा कि मैं पार्टी पर टिप्पणी नहीं करना चाहता, केवल कानूनी मुद्दे पर बात करूंगा, किसके पास पार्टी का नियंत्रण है और किसके पास किसी को निष्कासित करने का अधिकार है, यह पार्टी के संविधान पर निर्भर करता है, पार्टी के अधिकांश सदस्य ही पार्टी के नियंत्रण पर फैसला करेंगे.
संविधान एक्सपर्ट सुभाष कश्यप ने कहा कि एलजेपी के टिकट पर चुनाव जीतने वाले सांसद/विधायक निष्कासन के बाद भी सदन में पार्टी के सांसद/विधायक के रूप में बने रह सकते हैं, पार्टी का नियंत्रण किसके पास है, यह तय करने के लिए उन्हें अदालत जाना पड़ सकता है, चुनाव आयोग को यह तय करना होगा कि पार्टी का चुनाव चिन्ह किसे मिलेगा.
सुभाष कश्यप का कहना है कि अब एलजेपी का संविधान ही तय करेगा कि किसके हाथ में पार्टी की कमान रहेगी, हर पार्टी का अलग-अलग संविधान होता है, उसमें नेताओं के चयन और निकालने की गाइडलाइन होती है, एलजेपी के संविधान में भी अलग गाइडलाइन होगा, जिसके जरिए ही साफ हो पाएगा कि चाचा-भतीजे में किसके पास पार्टी की कमान रहेगी.
क्या है पूरा मामला
रामविलास पासवान की मौत के महज 8 महीने बाद ही लोक जनशक्ति पार्टी में चाचा-भतीजे की जंग छिड़ गई है. चाचा पशुपति पारस ने भतीचे चिराग पासवान को अध्यक्ष पद से हटाया तो भतीजे ने चाचा समेत सभी 5 बागी सांसदों को पार्टी से बाहर कर दिया. पार्टी पर कब्जे की जंग के तहत पारस गुट ने सूरज भान सिंह को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर नए अध्यक्ष का चुनाव करवाने की जिम्मेदारी सौंपी है.
एलजेपी के नए अध्यक्ष के लिए कल नामांकन होगा. वहीं चिराग समर्थकों का हंगामा होना तय है जैसा कि कल भी पटना में देखा गया है. एलजेपी में छिड़ी इसी लड़ाई पर पहली बार पशुपति कुमार पारस ने आजतक से बात की. उन्होंने चिराग पर कई सवाल उठाए. वहीं चिराग भी अपने चाचा पशुपति पारस पर हमलावर हैं.