
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे भले ही आ गए हैं लेकिन राज्य में राजनीतिक हलचल अभी भी जारी है. गुरुवार को पटना में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर महागठबंधन के नेताओं की बैठक हुई. इस बैठक में राजद नेता तेजस्वी यादव ने विधायकों को संबोधित किया और दावा किया कि सरकार उनकी ही बनने जा रही है.
तेजस्वी यादव ने अपने विधायकों से अपील की है कि वो अगले एक महीने तक पटना में ही रहें. सूत्रों की मानें तो तेजस्वी यादव को गठबंधन में से कांग्रेस के कुछ विधायकों के छिटकने की आशंका है, ऐसे में वो पूरी तरह सतर्क रहना चाहते हैं. इसी बैठक में तेजस्वी यादव को महागठबंधन का नेता चुना गया था.
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दरअसल, अभी महागठबंधन को अभी भी उम्मीद है कि एनडीए में सबकुछ ठीक नहीं हो रहा है और वो इस बात का इंतजार करेंगे कि मंत्रिमंडल में जीतन राम मांझी, मुकेश सहनी की पार्टियों को कितनी हिस्सेदारी मिलती है. क्योंकि अगर एनडीए में कुछ खटपट होती है तो महागठबंधन उसका फायदा उठा सकता है.
महागठबंधन की बैठक के बाद तेजस्वी यादव ने कहा कि जनता का समर्थन महागठबंधन के साथ है, हमें करीब 130 सीटें मिली हैं. लेकिन नीतीश कुमार ने छल-कपट से सरकार बना ली है. तेजस्वी ने कई सीटों पर काउंटिंग में धांधली का आरोप लगाया.
राज्यपाल को नव निर्वाचित सदस्यों की सूची
इस बीच बिहार में 17वीं विधानसभा के लिए आम निर्वाचन 2020 के परिणाम की घोषणा के बाद गुरुवार यानी 12 नवंबर को राज्यपाल फागू चौहान को बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और उनकी टीम ने नव निर्वाचित सदस्यों की सूची सौंपी. इन दस्तावेजों में विधानसभा चुनाव और प्रक्रिया से जुड़ी हरेक जानकारियां होती हैं.
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एचआर श्रीनिवास ने लोकतांत्रिक परंपरा और आयोग की नियमावली के मुताबिक राज्यपाल को आधिकारिक तौर पर जानकारी दी. राज्यपाल को निर्वाचन आयोग की ओर से मिली इसी सूची से पता चलता है कि किस दल और गठबंधन के पास कितनी सीटें हैं. इसके बाद ही राज्यपाल फागू सबसे बड़े दल या गठबंधन के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं.
कांग्रेस के प्रदर्शन पर उठे सवाल
आपको बता दें कि बिहार में महागठबंधन को इस बार 110 सीटें मिली हैं और लगातार सरकार पर जबरन कई प्रत्याशियों को हराने का आरोप लगाया गया. महागठबंधन में राजद को 75 और लेफ्ट पार्टियों को 16 सीटों पर जीत मिली है. इसके अलावा महागठबंधन के कुछ नेताओं ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल खड़े किए हैं.
खुद कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने कहा कि कांग्रेस को सच स्वीकारना चाहिए, ये मानना चाहिए कि उनकी वजह से ही महागठबंधन की जीत नहीं हो पाई है. महागठबंधन के ही साथी दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि कांग्रेस का स्ट्राइक काफी कम रहा, अगर उनको दी गई सीटें अगर राजद-लेफ्ट को मिलतीं तो नतीजा कुछ और होता.
गौरतलब है कि कांग्रेस इस बार 70 सीटों पर चुनाव लड़ी और सिर्फ 19 पर जीत पाई. कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस माहौल के बीच दिल्ली से कुछ नेताओं को पटना भेजा है, ताकि पार्टी में किसी तरह का रोष ना पैदा हो. (इनपुट: उत्कर्ष / संजय सिंह)