बिहार में शिक्षा मंत्री पद का कार्यभार संभालने के बाद अभी एक पहर भी नहीं गुजरी थी कि मेवालाल चौधरी को अपनी कुर्सी से हाथ धोना पड़ा. भ्रष्टाचार के आरोपों पर घिरे जेडीयू विधायक मेवालाल चौधरी नीतीश की कैबिनेट में सबसे अमीर मंत्री थे लेकिन उनके नाम के साथ मंत्री का पद सबसे कम समय के लिए लगा. सूत्रों के मुताबिक खुद नीतीश कुमार ने उन्हें इस्तीफा देने के लिए कहा.
वह महज डेढ़ से दो घंटे के लिए ही बिहार के शिक्षा मंत्री बने और फिर उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. एडीआर के मुताबिक मेवालाल चौधरी के पास 12.31 करोड़ रुपए की संपत्ति है. मंत्री पद की शपथ लेने के 72 घंटे के भीतर ही उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. गुरुवार को उन्होंने दोपहर 12:30 पर शिक्षा मंत्री का पद संभाला और फिर दो बजे तक उन्हें इस्तीफा देना पड़ा.
सूखे नहीं थे गुलदस्ते, नेम प्लेट भी नहीं बदली थी!
बिहार में विधायक मेवालाल चौधरी के घर उनके मंत्री बनने की खुशियां पल भर ही टिकीं और फिर अपना रास्ता बदल लिया. पदभार ग्रहण करने के कुछ ही देर बाद इस्तीफा देने वाले विधायक मेवालाल चौधरी के घर पर अभी ‘मंत्री’ की नेमप्लेट भी नहीं लगी थी. शुभचिंतकों के लाए हुए लड्डू और गुलदस्ते पड़े हुए थे, फूल मुरझाए भी नहीं थे और उनकी महक भी नहीं गई थी लेकिन उससे पहले ही उनकी मंत्री की कुर्सी चली गई.
भ्रष्टाचार का आरोप
बता दें कि 2017 में मेवालाल चौधरी पर भागलपुर के सबौर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति रहते हुए नौकरी में भारी घपलेबाजी करने का आरोप है. उनके ऊपर आरोप है कि कुलपति रहते हुए उन्होंने 161 असिस्टेंट प्रोफेसर की गलत तरीके से बहाली की. इस मामले को लेकर उनके ऊपर प्राथमिकी भी दर्ज है.
तत्कालीन बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने उस वक्त मेवालाल चौधरी के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे. जांच में मेवालाल चौधरी के खिलाफ लगे आरोपों को सही पाया गया था. उन पर सबौर कृषि विश्वविद्यालय के भवन निर्माण में भी घपलेबाजी का आरोप है. फरवरी 2017 में बिहार कृषि विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार द्वारा मेवालाल चौधरी के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की गई थी. उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 466, 468, 471, 309, 420 और 120 (डी) के तहत मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद जनता दल-यूनाइटेड ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था.