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विशेष राज्‍य के दर्जे की मांग को लेकर गरमाई बिहार की सियासत

सीमान्ध्र को विशेष राज्य का दर्जा देने के फैसले के बाद बिहार में राजनीति गरमा गई है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 1 मार्च को बिहार बंद रखने की अपील जनता से की है, तो उसके बाद बीजेपी ने 28 फरवरी को रेल का चक्का जाम करने के ऐलान में तनिक देरी नहीं लगाई. दोनों की नाराजगी केन्द्र के रवैये को लेकर है.

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नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

सीमान्ध्र को विशेष राज्य का दर्जा देने के फैसले के बाद बिहार में राजनीति गरमा गई है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 1 मार्च को बिहार बंद रखने की अपील जनता से की है, तो उसके बाद बीजेपी ने 28 फरवरी को रेल का चक्का जाम करने के ऐलान में तनिक देरी नहीं लगाई. दोनों की नाराजगी केन्द्र के रवैये को लेकर है.

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सीमांध्र को एक दिन में विशेष राज्य का दर्जा मिल गया, जबकि बिहार पिछले कई सालों से कई स्तरों पर इसकी कोशिश कर चुका है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं. खासकर नीतीश कुमार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए लगातार कोशिश करते रहे हैं. बीजेपी विशेष राज्य के लिए तो नहीं, विशेष पैकेज की बात करती रही है. लेकिन अब राजनैतिक परिस्थिति बदलने से उसने भी सुर बदल लिए हैं.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केन्द्र के भेदभाव वाले रवैए पर गहरी नाराजगी जाहिर की है. नीतीश कुमार ने कहा कि केन्द्र मनमाने ढंग से एक दिन में सीमांध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दे रही है, जबकि बिहार पिछले डेढ़ साल से विशेष राज्य के दर्जे के लिए संघर्ष कर रहा है, उसकी अनदेखी की जा रही है.

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केन्द्र की इसी मनमानी के खिलाफ 1 मार्च को पूरे बिहार को बंद करने का ऐलान करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि अब वो चुप नहीं बैठेंगे. बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए उन्होंने 1 करोड़ 18 लोगों का हस्ताक्षर अभियान चलाया. पटना और दिल्ली में अधिकार रैलियां की. केन्द्र ने इसकी समीक्षा के लिए रघुराम राजन कमेटी बनाई. हालांकि वो कमेटी की अनुशंसा से सहमत नहीं थे, फिर भी बिहार को पिछड़ेपन के आधार पर विशेष राज्य का दर्जा मिले इसके लिए वे तत्पर थे. लेकिन केन्द्र ने अपने सहयोगियों के कहने पर इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया.

यही नहीं, वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने पिछले साल के बजट भाषण और आर्थिक सर्वेक्षण में बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की चर्चा की थी. रघुराम राजन कमेटी की रिपोर्ट को वित्त मंत्री ने खुद सार्वजनिक किया. लेकिन 26 नवंबर, 2013 को होने वाली वित्त सचिव के साथ बैठक को अचानक रद्द कर दिया गया. उसके बाद बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने पर कोई चर्चा नहीं हुई.

दूसरी ओर, सीमांध्र को सोनिया गांधी के कहने पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक दिन में विशेष राज्य का दर्जा दे दिया. बिहार पिछडा है, देश के अनुपात में तेजी से चलने के बावजूद इसे 25 वर्षों का समय लगेगा बराबरी तक आने में. ऐसे में जब बिहार विशेष राज्य के दर्जे को पाने के लिए सभी क्राइटेरिया पूरा करता है, तो इसे विशेष राज्य का दर्जा क्यों नहीं? इसी मसले पर विरोध जताने के लिए बिहार में 1 मार्च को कामकाज बंद रखा जाएगा.

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नीतीश कुमार ने बिहार की जनता से अपील की वह इस दिन कोई काम न करे और अपना विरोध केन्द्र के प्रति जाहिर करे.

उधर, बिहार के मुख्यमंत्री के बिहार बंद के ऐलान के ठीक बाद बीजेपी ने भी विशेष राज्य के मुद्दे पर बिहार में 28 फरवरी को रेल चक्का जाम करने का ऐलान कर दिया. हालांकि बीजेपी ने विशेष राज्य के मुद्दे की बजाए विशेष पैकेज की मांग हमेशा करती रही है, लेकिन अब जबकि सीमांध्र को विशेष राज्य का दर्जा मिल रहा है और नीतीश कुमार ने इस मुद्दे को पहले ही हथिया लिया है, बीजेपी के पास विशेष राज्य की मांग का समर्थन करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है.

बीजेपी नीतीश कुमार पर यही आरोप लगा रही है कि जब विशेष राज्य का दर्जा का मामला बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों से सभी दलों के समर्थन से पास हुआ था, तो फिर नीतीश कुमार ने इस मुद्दे को केवल जेडीयू का क्यों बना दिया? बीजेपी के वरिष्ठ नेता और विधानमंडल में प्रतिपक्ष के नेता सुशील कुमार मोदी ने केन्द्र की भेदभाव की नीति पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि नीतीश कुमार इसी कांग्रेस के भरोसे बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाना चाह रहे हैं. उन्‍होंने दावा किया कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा केवल बीजेपी ही दिला सकती है.

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