scorecardresearch
 

3.5 विधायक पर एक मंत्री पद, नीतीश सरकार के गठन का ये है फॉर्मूला

बिहार में इस बार जिस तरह का जनादेश आया है, उसमें जेडीयू कोटे के मंत्रियों की संख्या कम होगी जबकि बीजेपी खेमे के मंत्रियों की संख्या ज्यादा होगी. एनडीए में बीजेपी-जेडीयू-HAM-VIP चार दल शामिल हैं. ऐसे में एनडीए में सहयोगी दलों के बीच मंत्री पद को लेकर फॉर्मूला तय हुआ है कि साढ़े तीन विधायक पर एक मंत्री बनेंगे. इस लिहाज से नीतीश के कई पुराने मंत्रियों को इस बार कैबिनेट में जगह नहीं मिल सकेगी. 

Advertisement
X
नीतीश सरकार में जेडीयू कोटे के मंत्री कम होंगे
नीतीश सरकार में जेडीयू कोटे के मंत्री कम होंगे
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिहार के 243 सदस्यों में सिर्फ 36 मंत्री बने सकते हैं
  • बीजेपी कोटे से सबसे ज्यादा 21 मंत्री बनाए जाएंगे
  • जेडीयू कोटे से नीतीश कुमार सहित 12 मंत्री होंगे

बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का गठन आज होने जा रहा है. नीतीश 7वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. हालांकि, इस बार जिस तरह का जनादेश आया है, उसमें जेडीयू कोटे के मंत्रियों की संख्या कम होगी जबकि बीजेपी खेमे के मंत्रियों की संख्या ज्यादा होगी. एनडीए में बीजेपी-जेडीयू-HAM-VIP चार दल शामिल हैं. ऐसे में एनडीए में सहयोगी दलों के बीच मंत्री पद को लेकर फॉर्मूला तय हुआ है कि उसमें साढ़े तीन विधायक पर एक मंत्री बनेंगे. इस लिहाज से चारों दलों का प्रतिनिधित्व मिल जाएगा, लेकिन नीतीश के कई पुराने मंत्रियों को इस बार कैबिनेट में जगह नहीं मिल सकेगी. 

Advertisement

देखें: आजतक LIVE TV 

बता दें कि बिहार के 243 सदस्यों के विधानसभा में संवैधानिक प्रावधान के लिहाज से 15 फीसदी सदस्य मंत्री बनाए जा सकते हैं. इस लिहाज से बिहार में मुख्यमंत्री सहित कुल 36 मंत्री ही बन सकते हैं. इस बार बिहार चुनाव में एनडीए को 125 सीटें मिली हैं, जिनमें सबसे ज्यादा बीजेपी को 74 सीटें मिली हैं. वहीं, जेडीयू को 43, हिंदुस्तान आवाम मोर्चा को चार और विकास इंसाफ पार्टी को चार सीटें मिली हैं. ऐसे में उनकी संख्या के हिसाब से मंत्री पद मिलेगा. 

बीजेपी के हिस्से में सबसे ज्यादा मंत्री
एनडीए में मंत्री पद के साढ़े तीन विधायक पर एक मंत्री के फॉर्मूले के लिहाज से बीजेपी के हिस्से में सबसे ज्यादा 21 मंत्री पद आएंगे. वहीं, जेडीयू के विधायकों की संख्या के आधार पर ज्यादा से ज्यादा 12 मंत्री बनाए जा सकते हैं. इसके अलावा एनडीए में जीतनराम मांझी की पार्टी को एक और मुकेश सहनी के कोटे में एक मंत्री पद मिलेगा. हालांकि, नीतीश कुमार खुद सीएम बने रहे हैं, तो जेडीयू के कोटे में 11 मंत्री पद आएंगे. 

Advertisement

जेडीयू के कई मंत्री की कुर्सी खतरें में
बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू कोटे के 14 मंत्रियों ने चुनाव लड़ा था, जिनमें से आठ मंत्रियों को हार का मुंह देखना पड़ा है जबकि 6 मंत्री जीतने में सफल रहे हैं. बिजेंद्र यादव, श्रवण कुमार, बीमा भारती, नरेंद्र नारायण यादव, महेश्वर हजारी जीते और मदन सहनी जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं, जो नीतीश सरकार में मंत्री थे. इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधरी अपनी सीट पर जीत दर्ज कर सके हैं, लेकिन इस बार स्पीकर बनने के बजाय मंत्री बनने वाले नेताओं में शामिल हैं. एमएलसी कोटे से नीरज कुमार ने भी चुनाव में जीत हासिल की है और साथ ही अशोक चौधरी भी मंत्री बनने वाले नेताओं की फेहरिस्त में शामिल हैं. 

 

एनडीए सरकार में जेडीयू कोटे से कुल 11 मंत्री बनाए जा सकते हैं, जिसमें नीतीश कुमार के लिए क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण साधने की चुनौती है. इस लिहाज से कुई पुराने मंत्रियों को इस बार कैबिनेट में जगह नहीं मिल सकेगी. वहीं, बीजेपी के पास अपने सियासी समीकरण साधने के लिए पर्याप्त संख्या हो रही है. बीजेपी दो डिप्टी सीएम के साथ विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर अपने किसी नेता को बैठना चाहती है. 

वहीं, एनडीए के सहयोगी हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के चार विधायक जीतकर आए हैं. HAM अध्यक्ष जीतनराम मांझी खुद मंत्री बनने से इनकार कर चुके हैं, जिसके बाद उनके बेटे संतोष मांझी को मंत्री पद दिया जा सकता है. संतोष मांझी मौजूदा समय में विधान परिषद सदस्य हैं. वहीं, विकास इंसाफ पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी खुद चुनाव हार गए हैं, लेकिन उनके चार विधायक जीते हैं. ऐसे में उनके कोटे में भी एक मंत्री पद आ रहा है, जिस पर खुद उनके मंत्री बनने की संभावना है. 

Advertisement

बीजेपी ने एनडीए सीट शेयरिंग फॉर्मूले में वीआईपी को 11 विधानसभा सीटें और एक एमएलसी सीट देने का वादा किया गया था. ऐसे में माना जा रहा है कि मुकेश सहनी खुद विधान परिषद सदस्य होंगे और नीतीश सरकार में मंत्री बन सकते हैं. इसके अलावा एकलौते निर्दलीय विधायक सुमित सिंह ने भी एनडीए को समर्थन दिया है, लेकिन समीकरण ऐसे हैं, जिसके लिहाज से उनका फिलहाल मंत्री बनना मुश्किल लग रहा है. 

 

Advertisement
Advertisement