नीतीश कुमार के मंत्री शहीदों का अपमान करने में जुट गए हैं. गुरुवार को बिहार के ग्रामीण कार्य मंत्री भीम सिंह से यह पूछा गया कि वे शहीदों के अंतिम संस्कार में क्यों शामिल नहीं हो सके. उन्होंने जवाब दिया, 'सेना और पुलिस में लोग मरने ही जाते हैं.' हालांकि, राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की फटकार के बाद भीम सिंह ने अपने बयान पर माफी मांग ली.
दरअसल, भीम सिंह से जब एयरपोर्ट न जाने बारे में एक रिपोर्टर ने पूछा तो उन्होंने कहा, 'जवान तो शहीद होने के लिए ही होते हैं. सेना में और पुलिस नौकरी किसलिए होती है. आप थोड़े ही शहीद होइएगा. लोग शहादत के लिए ही जाते हैं. यही उसकी भावना है.'
भीम सिंह ने उल्टे रिपोर्टर से ही सवाल कर डाला, 'आप क्यों नहीं गए नागरिक के तौर पर. आप ड्यूटी पर थे न. आपके बाबूजी गए थे वहां? आपके पिता नागरिक हैं न? आपके पिता गए वहां?'
जैसे ही भीम सिंह का यह बयान सामने आया बिहार में सियासी हंगामा मच गया. आरजेडी के विधायक भाई वीरेंद्र ने तो उनसे इस्तीफे की मांग कर ली. बीजेपी नेता राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपने मंत्री को बर्खास्त कर देना चाहिए. अपने मंत्री के कारनामे के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक्शन में आए. उन्होंने भीम सिंह के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और माफी मांगने को कहा.
जेडीयू महासचिव केसी त्यागी ने बताया, 'नीतीश कुमार इस बयान से आहत हैं. उन्होंने भीम सिंह को बयान वापस लेने को कहा है.'
नीतीश कुमार की नाराजगी के बाद भीम सिंह ने मीडिया के सामने माफी मांग ली. मीडिया के तमाम सवालों पर वह एक ही वाक्य कहते नजर आए, 'मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया. लेकिन मैं इस पूरे प्रकरण पर खेद प्रकट करता हूं.'
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के पुंछ में पाकिस्तानी सेना के हमले में शहीद हुए बिहार के चार जवानों का पार्थिव शरीर पटना पहुंचा तो राज्य सरकार का एक भी मंत्री जवानों को श्रद्धांजलि देने एयरपोर्ट नहीं पहुंचा.
राज्य के मंत्रियों की बेरुखी यहीं नहीं खत्म हुई. गुरुवार सुबह छपरा में शहीद जवान प्रेमनाथ सिंह और रघुनंदन के अंतिम संस्कार में भी राज्य का कोई मंत्री नहीं पहुंचा.
केंद्र ने भी दिखाई थी बेरुखी
हैरानी की बात यह रही कि शहीदों के सम्मान में कसमें खाने वाला एक भी मंत्री जवानों को श्रद्धांजलि देने एयरपोर्ट नहीं पहुंचा. बुधवार रात दिल्ली एयरपोर्ट पर पूरे सम्मान के साथ शहीदों के शव उतारे गए, पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए मौके पर न तो रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी मौजूद थे और न ही केंद्र सरकार का कोई और मंत्री. यह हाल तब है, जब संसद का मॉनसून सत्र चल रहा है और केंद्र सरकार का लगभग हर मंत्री दिल्ली में मौजूद है. बावजूद इसके एक भी मंत्री को इतनी फुरसत नहीं मिली कि शहीदों के सम्मान में एयरपोर्ट तक पहुंचता.