कोरोना की तीसरी लहर में सबसे ज्यादा प्रभाव बच्चों पर पड़ने की आशंका के बीच वैक्सीनेशन की मांग जोर पकड़ रही है. बच्चों की वैक्सीन कोवैक्सीन का पटना के एम्स अस्पताल में चल रहा है.
पटना के एम्स में सात और बच्चों को कोवैक्सीन की पहली खुराक दी गई. कोरोना वायरस की महामारी की तीसरी लहर से पहले देश में बच्चों के ऊपर वैक्सीन का ट्रायल तेजी से हो रहा है.
पटना एम्स में 3 जून को बच्चों के खिलाफ वैक्सीन का ट्रायल शुरू किया गया था और उसी दिन तीन बच्चों को वैक्सीन की पहली डोज लगाई गई थी. वैक्सीन के ट्रायल के लिए लगातार बच्चों की स्क्रीनिंग हो रही है और उन्हें पूरी तरीके से स्वस्थ पाए जाने के बाद ही उन्हें वैक्सीन का पहला टीका लगाया जा रहा है.
शनिवार को कुल 21 बच्चों की स्क्रीनिंग रिपोर्ट आई थी जिनमें से 12 बच्चों की एंटीबॉडी पहले से काफी बनी हुई थी. इसी कारण से बाकी बचे हुए 9 बच्चों में से 7 को वैक्सीन का पहला टीका दिया गया.
कोवैक्सीन की पहली डोज इन 7 बच्चों को देने के साथ ही अब पटना में कुल 10 बच्चों को वैक्सीन का पहला डोज दिया जा चुका है. इन सभी बच्चों को वैक्सीन की अगली डोज 28 दिनों के बाद लगाई जाएगी. पटना एम्स की मानें तो उनका टारगेट है कि कुल सौ बच्चों के ऊपर कोवैक्सीन का ट्रायल किया जाए. इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने भी पटना एम्स में कोवैक्सीन का ट्रायल बच्चों पर शुरू होने को लेकर प्रसन्नता जताई थी.
बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा था कि बच्चों को कोरोनावायरस से सुरक्षित रखने के लिए यह एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है. गौरतलब है कि कोरोना की तीसरी लहर में कोरोना की चपेट में सबसे ज्यादा बच्चों के आने की आशंका के बीच सुप्रीम कोर्ट भी वैक्सीनेशन को लेकर सवाल पूछ चुका है.