बिहार में पिछले साल बीजेपी और जदयू गठबंधन की नई सरकार बनी, जिसके बाद आरजेडी कोटे के पूर्व मंत्रियों को सरकारी बंगला खाली करने के लिए नोटिस जारी किया गया. आरजेडी के पूर्व मंत्रियों को बंगला खाली करने का नोटिस भवन निर्माण विभाग की तरफ से 20 सितंबर 2017 को जारी किया गया था.
आरजेडी कोटे के मंत्रियों द्वारा खाली किए गए बंगले बीजेपी कोटे के मंत्रियों को आवंटित किए जाने थे लेकिन आरजेडी के किसी भी पूर्व मंत्री ने बंगला खाली नहीं किया. अब आरजेडी के पूर्व मंत्रियों को बंगला खाली करना ही पड़ेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि पटना उच्च न्यायालय ने आदेश जारी किया है कि आरजेडी कोटे के 8 पूर्व मंत्री जिन्होंने अबतक अपने सरकारी बंगले को खाली नहीं किया है उन्हें 15 दिन के अंदर अपने-अपने सरकारी बंगलों को खाली करना है.
दरअसल, बंगले को खाली नहीं करने की जिद को लेकर आरजेडी कोटे के 8 पूर्व मंत्रियों ने पटना हाईकोर्ट में अर्जी डाली थी और इस मामले में फैसला सुनाते हुए पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश सुधीर सिंह ने आदेश जारी किया कि सभी 8 पूर्व मंत्रियों को अपना बंगला 15 दिनों के अंदर खाली करना है. न्यायाधीश सुधीर सिंह ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता अब बिहार सरकार में मंत्री नहीं रहे और मंत्री नहीं रहने के बाद वह केवल 1 महीने तक अपने सरकारी बंगले में रह सकते हैं.
न्यायाधीश ने कहा कि यह सभी आरजेडी के पूर्व मंत्री अब केवल विधायक हैं, इसलिए इन्हें विधायकों को आवंटित किए जाने वाले घर दिए जाएं. जिन 8 आरजेडी के पूर्व मंत्रियों ने पटना न्यायाधीश में अपने सरकारी बंगलों को नहीं खाली करने के लिए अर्जी डाली थी उनमें अब्दुल बारी सिद्दीकी, चंद्रिका राय, अब्दुल गफूर, शिव चंद्र राम, अनीता देवी, चंद्रशेखर, विजय प्रकाश और आलोक मेहता शामिल हैं.
गौरतलब है कि आरजेडी कोटे के एक और मंत्री प्रताप यादव ने पिछले ही हफ्ते अपना सरकारी बंगला खाली कर दिया है. लेकिन उनके भाई और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने अब तक अपना सरकारी बंगला खाली नहीं किया है.