चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पिछले साल 2 अक्टूबर को जनसुराज पदयात्रा की शुरुआत की थी. चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर के जनसुराज का कुनबा लगातार बढ़ता ही जा रहा है. प्रशांत किशोर की ओर से जनसुराज को राजनीतिक दल बनाने का ऐलान अभी नहीं किया गया है लेकिन रिटायर हो चुके प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के इस अभियान से जुड़ने का सिलसिला तेज हो गया है.
बिहार पुलिस में अलग-अलग पदों पर रह चुके भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 12 पूर्व अधिकारी जनसुराज से जुड़ गए हैं. पूर्व आईपीएस अधिकारियों ने जनसुराज के जरिए बिहार के सिस्टम में बदलाव का विश्वास जताया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक पूर्व पुलिस अधिकारियों ने जनसुराज की तारीफ करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे सेवा के मूल्य बहाल होंगे और राजनीति में सुराज आएगा.
जनसुराज से जुड़े ये अधिकारी
प्रशांत किशोर के जनसुराज से जुड़े अधिकारियों में डीजी, आईजी और डीआईजी स्तर के अधिकारी शामिल हैं. 2004 बैच के सेवानिवृत्त आईजी (होमगार्ड) रहे समस्तीपुर के जितेंद्र मिश्रा, 1979 बैच के पूर्व आईपीएस डीजी रहे वैशाली के एसके पासवान, 1983 बैच के आईपीएस पूर्व डीआईजी (कम्युनिकेशन) सारण निवासी केबी सिंह जनसुराज से जुड़ गए हैं.
प्रशांत किशोर के जनसुराज से जुड़ने वाले पूर्व आईपीएस अधिकारियों में बेगूसराय निवासी आईजी (विजिलेंस) रहे उमेश सिंह, सुपौल निवासी पूर्व डीआईजी अनिल सिंह और शिव कुमार झा, सीवान निवासी पूर्व डीजी अशोक कुमार सिंह के नाम भी शामिल हैं. सहरसा निवासी पूर्व डीजी राकेश कुमार मिश्रा, पटना के सीपी किरण, भोजपुर के मोहम्मद रहमान मोमिन के साथ ही शंकर झा और दिलीप मिश्रा भी जनसुराज के साथ जुड़ गए हैं.
जनसुराज से जुड़े थे 6 पूर्व आईएएस
प्रशांत किशोर के जनसुराज अभियान से भारतीय प्रशासनिक सेवा के छह पूर्व अधिकारी भी जुड़ गए थे. छह पूर्व आईएएस अधिकारी 2 मई को पीके के जनसुराज के साथ जुड़ गए थे. पीके के जनसुराज से जुड़ने वाले पूर्व आईएएस अधिकारियों में अजय कुमार द्विवेदी, अरविंद कुमार सिंह, ललन यादव, तुलसी हजार, सुरेश शर्मा और गोपाल नारायण सिंह के नाम शामिल हैं.
गौरतलब है कि प्रशांत किशोर 2 अक्टूबर 2022 से जनसुराज पदयात्रा पर निकले हैं. जनसुराज के राजनीतिक पार्टी में तब्दील होने को लेकर प्रशांत किशोर ने अभी तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया है लेकिन जिस तरह से वे नीतीश कुमार समेत सभी राजनीतिक दलों पर हमले कर रहे हैं. उसे इस बात के संकेत माना जा रहा है कि पीके जनसुराज को राजनीतिक पार्टी में तब्दील करेंगे.