बिहार में शराबबंदी को लेकर मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद जो फैसले लिए गए उसको लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है. शराबबंदी की समीक्षा बैठक के बाद सरकार की ओर से एक बार फिर यह स्पष्ट हो गया कि प्रदेश में शराब बंदी लागू रहेगी और पहले से लागू शराबबंदी कानून को और ज्यादा सख्ती से पालन कराया जाएगा.
हालांकि, पहले से चल रहे शराबबंदी कानून को और ज्यादा सख्ती से लागू कराने के अलावा सरकार ने कोई बड़ा ऐलान नहीं किया है और इसी को लेकर विपक्ष शराबबंदी की समीक्षा बैठक को केवल एक दिखावा बता रहा है.
आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा है कि राज्य सरकार की तरफ से जारी बयान में मंगलवार को कहा गया कि किसी इलाके में शराबबंदी कानून का उल्लंघन होता है तो उसके लिए संबंधित थाना के एसएचओ को निलंबित किया जाएगा या फिर संबंधित गांव के चौकीदार पर कार्रवाई होगी जो नाकाफी है.
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मृत्युंजय तिवारी ने आरोप लगाया कि एसएचओ और चौकीदार के खिलाफ कार्रवाई करके राज्य सरकार उन बड़ी मछलियों को बचाने की कोशिश कर रही है जो कि शराब तस्करी में शामिल है.
तिवारी ने कहा, 'शराबबंदी को लेकर हुई नीतीश कुमार की समीक्षा बैठक खोदा पहाड़ निकली चुहिया जैसी है. बिहार में जहरीली शराब मिल रही है और लोग पीने से मर रहे हैं मगर सरकार कार्रवाई केवल थाना प्रभारी और चौकीदार पर कर रही है. सत्ता संरक्षण में शराब माफिया का धंधा चल रहा है और इस पर तो सरकार लगाम लगा नहीं पा रही है और ऐसी समीक्षा बैठक केवल भ्रमित करने के लिए है.'
वहीं जनता दल यूनाइटेड ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि जमीन पर शराबबंदी को सफल बनाने के लिए एसएचओ और चौकीदार की भूमिका सबसे ज्यादा अहम है. जेडीयू के प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा, 'शराबबंदी के क्रियान्वयन में एसएचओ और चौकीदार की भूमिका बहुत जरूरी है. शराबबंदी कानून की प्रासंगिकता इसी को लेकर है कि जो भी इस में शिथिलता बरत रहे उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए.'