बिहार में सियासी बदलाव के बाद तेजस्वी यादव नीतीश कुमार के साथ मिलकर भले ही उपमुख्यमंत्री बन गए हैं, लेकिन आरजेडी में सियासी खींचतान जारी है. तेजस्वी यादव जिस जगदानंद सिंह के लिए अपने बड़े भाई तेजप्रताप यादव से भिड़ गए थे और उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के पद पर दूसरी बार नियुक्त दी गई है, वही जगदानंद नाराज बताए जा रहे हैं. हालांकि, आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव उन्हें मनाने की कवायद में जुटे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जगदानंद सिंह नाराज क्यों हैं?
नीतीश कुमार की कैबिनेट से आरजेडी प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बेटे सुधाकर सिंह की छुट्टी हो जाने के बाद से जगदानंद का राजद से मन व्यथित है और पार्टी शीर्ष नेतृत्व के व्यवहार से असहज हो गए हैं. हालांकि, उनकी ऐसी नाराजगी कोई पहली बार प्रकट नहीं हुई है, लेकिन इस बार नीतीश कुमार के गठबंधन बदलकर आरजेडी के साथ आने के बाद से ही वह असहज दिख रहे हैं. इतना ही नहीं जेडीयू नेताओं के ग्रामीण बुजुर्ग वाले बयान ने कर दिया, जिसे जगदानंद सिंह ने अपने दिल पर ले लिया है.
बिहार की सियासत में मजबूत रिश्तों की कहानी जगदानंद सिंह और लालू यादव से होकर गुजरती है. जगदानंद संग लालू यादव का काफी पुराना रिश्ता हैं. हालांकि, रिश्ता नीतीश कुमार से भी रहा है, लेकिन नीतीश के साथ बदलते वक्त ने रिश्तों में खटास ला दी. फिलहाल अभी लालू ने 12वीं बार आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान संभाली तो जगदानंद दूसरी बार प्रदेश अध्यक्ष बने. ऐसे में जगदानंद सिंह के इस्तीफे का प्रस्ताव आरजेडी के लिए झटका साबित होगा.
जगदानंद सिंह ने अपने तौर-तरीकों से संकेत दे दिया है. तेजस्वी-नीतीश के बीच जब भी आत्मीयता दिखी, जगदानंद का रुख आक्रामक ही रहा है. ऐसे में नीतीश के एक बार साथ आने के बाद पहले सुधाकर सिंह ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया और फिर जगदानंद का प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा का प्रस्ताव बिहार में हलचल पैदा कर दी. लालू यादव से लेकर आरजेडी के तमाम नेताओं के बीच सियासी चर्चा तेज है.
लालू यादव अपने पुराने साथी जगदानंद सिंह का काफी सम्मान करते हैं. वो उन्हें खोना नहीं चाहेंगे. इसके लिए वो जगदानंद सिंह को मनाने का प्रयास कर रहे हैं. लालू यादव ने जगदानंद सिंह को दिल्ली बुलाया था, आरजेडी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होने के लिए. हालांकि, जगदानंद सिंह की ट्रेन छूट गई, जिसे लेकर भी तमाम तरह से कयास लगाए जा रहे हैं.
लालू-नीतीश की करीबी बढ़ने से हुए असहज
बता दें कि समाजवादी राजनीति करने वाले जगदानंद सिंह अपने बेटे सुधाकर सिंह के इस्तीफे के बाद से ही नाराज चल रहे हैं. उन्होंने आरजेडी कार्यालय आना बंद कर दिया है. कार्यालय से अपने कागज लेकर चले गए हैं. सियासी चर्चा है कि लालू-नीतीश की बढ़ती करीबी से जगदानंद सिंह पूरी तरह असहज हैं. वो पहले भी लालू के नीतीश के साथ जाने के पक्षधर नहीं रहे हैं.
पहले भी जब कभी तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार के बीच रिश्ते में प्रगाढ़ता आई. जगदानंद सिंह तीखे बयान देने से नहीं चूके. वहीं, जब-जब तेजस्वी ने नीतीश पर हमला बोला. जगदानंद सिंह खुशी से तेजस्वी के पक्ष में खड़े रहे. सियासी चर्चा है कि इस्तीफे की चर्चा के बीच लालू यादव ने जगदानंद सिंह को दिल्ली तलब किया है. हालांकि, जगदानंद अभी तक दिल्ली नहीं जा सके हैं. उनकी ट्रेन छूट गई है.
वहीं, आरजेडी के अंदर चर्चा है कि लालू यादव का लक्ष्य अभी 2024 का लोकसभा चुनाव है. इसलिए वे जदयू से अपने रिश्ते बिगाड़ नहीं सकते हैं. ऐसे में लालू फिलहाल जगदानंद सिंह को ही मनाने का काम करेंगे. सियासी जानकारों की मानें, तो लालू यादव से मुलाकात में सुधाकर सिंह के इस्तीफे की भी चर्चा होगी. जगदानंद सिंह को दोबारा अध्यक्ष बनाने वाले लालू यादव उन्हें समझाकर पुनः पार्टी कार्यालय भेजेंगे.
बिहार के जातिगत समीकरण के हिसाब से आरजेडी में जगदानंद सिंह का कद लगातार बढ़ा है. रघुवंश प्रसाद सिंह के बाद वे एकमात्र कद्दावर ठाकुर नेता है. जगदानंद सिंह का नीतीश कुमार से वैचारिक विरोध काफी पुराना है. एक समय नीतीश और जगदानंद दोनों ही लालू के बहुत करीबी थे. दोनों नेता पहली बार 1985 में विधायक बनें. कहा जाता है कि नीतीश और जगदानंद को आसपास ही सरकारी आवास भी मिला था. दोनों ने मिलकर लालू यादव को बिहार में नेता प्रतिपक्ष बनवाया था.
जब जगदानंद और नीतीश ने साथ-साथ अभियान चलाया था
बता दें कि लालू यादव को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने के लिए जगदानंद सिंह और नीतीश कुमार ने साथ-साथ अभियान शुरू किया था. उसके बाद नीतीश कुमार ने अलग होकर समता पार्टी बनाई. लालू के जेल जाने के बाद राबड़ी सरकार में सबसे ज्यादा पावरफुल मंत्री जगदानंद सिंह ही थे. सियासी जानकारों की मानें तो 2015 में स्थिति अलग थी. लालू महागठबंधन के खिलाफ रघुवंश प्रसाद सिंह की बयानबाजी रोक नहीं पाते थे. इस बार वैसा नहीं है लालू यादव के साथ तेजस्वी यादव भी हैं. सुधाकर सिंह का मंत्री पद से इस्तीफा और उस दौरान जेडीयू नेताओं की प्रतिक्रिया से आहत जगदानंद सिंह ने इस्तीफे का प्रस्ताव दे दिया है.
बिहार की सियासत में नीतीश कुमार से जगदानंद सिंह का रिश्ता काफी पुराना है. जगदानंद सिंह ने नीतीश की बहन की शादी में अगुवाई की थी. दोनों नेता में गहरी दोस्ती थी. बाद में दोनों में खटास हुई और नीतीश के अलग पार्टी बना लेने के बाद जगदानंद सिंह लालू के साथ रह गए. उसके बाद लालू और नीतीश में 36 का आंकड़ा रहा, जगदानंद सिंह लालू यादव के साथ डंटे रहे.
नीतीश कुमार ने एक समय जगदानंद और आरजेडी के खिलाफ उनके ही बेटे सुधाकर सिंह को बीजेपी से टिकट दिलवाकर खड़ा कर दिया था. जिसके बाद भी जगदानंद सिंह कभी बेटे के पक्ष में नहीं गए, लेकिन अब जब बेटा राजद में था और उसे मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा तो जगदानंद सिंह नाराज है. हालांकि, सुधाकर सिंह का लिखित त्यागपत्र लेकर उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के पास जगदानंद स्वयं गए थे, लेकिन माना जा रहा है कि उन्हें यह फैसला बेमन से करना पड़ा.