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बिहार बीजेपी ने कतरे बिहारी बाबू के पर, नहीं दी चुनाव समिति में जगह

लगता है कभी 'नमो' का विरोध करना अब बिहारी बाबू को भारी पड़ने लगा है, तभी तो पहली बार शत्रुघ्न सिन्हा राज्य चुनाव अभियान समीति से बाहर कर दिए गए. नये अध्यक्ष ने उन्हे उस 31 सदस्यीय चुनाव अभियान समिति में नहीं रखा है, जो चुनाव के लिए उम्मीदवार चुनने में अपना अहम रोल निभाती है.

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लगता है कभी 'नमो' का विरोध करना अब बिहारी बाबू को भारी पड़ने लगा है, तभी तो पहली बार शत्रुघ्न सिन्हा राज्य चुनाव अभियान समीति से बाहर कर दिए गए. नये अध्यक्ष ने उन्हे उस 31 सदस्यीय चुनाव अभियान समिति में नहीं रखा है, जो चुनाव के लिए उम्मीदवार चुनने में अपना अहम रोल निभाती है.

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पिछले 22 सालों में ये पहला मौका है जब शत्रुघ्न सिन्हा उस चुनाव समिति का हिस्सा नहीं होंगे. शत्रुघ्न सिन्हा को बाहर रखने के फैसले ने विपक्ष को भी बीजेपी पर हमला करने का मौका दे दिया है.

शत्रुघ्न सिन्हा को बिहार बीजेपी के चुनाव समिति से बाहर करना बीजेपी के गले हड्डी बनता जा रहा है. शुक्रवार को जारी सूची मे शत्रुघ्न सिन्हा का नाम नहीं होना चौंकाने के लिए काफी था. ऐसे में जबकि इस सूची में रविशंकर प्रसाद, राजीव प्रताप रूडी और शाहनवाज हुसैन समेत राज्य के तमाम बड़े नेताओं को जगह मिली है.

हालांकि शत्रुघन् सिन्हा ने अबतक अपनी नाराजगी नहीं जताई है पर माना जा रहा है कि बीजेपी के भीतर उनके पर कतरने की शुरुआत हो चुकी है. बीजेपी प्रवक्ता विनोदानंद झा कहते हैं, 'ये सही है कि उन्हें जगह नहीं मिली है, लेकिन उनकी उपयोगिता हमारे लिए कम नहीं होगी.' हर बात पर अपनी राय रखने वाले बीजेपी नेता गिरिराज सिंह को समझ नहीं आ रहा कि आखिर शत्रुघ्न सिन्हा को बाहर क्यों किया गया. वो कहते हैं, 'मैं नहीं जानता कि उनका नाम कैसे नहीं आया, ये अध्यक्ष से पूछना चाहिए. उन्हें नहीं लिया गया या उन्हें छोड़ा गया है, इसकी वजह तो सिर्फ बिहार बीजेपी अध्यक्ष ही बता सकते हैं.'

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शत्रुघन सिन्हा जो पटना साहब से सांसद हैं, उनके पर कतरे जाने पर विपक्ष को बैठे बिठाए मुद्दा मिल गया है. कांग्रेस के मुताबिक बीजेपी की ये फितरत है कि वो युज एंड थ्रो करती है. यही वजह है कि पहले आडवाणी को छोड़ा और अब आडवाणी के लोगों को ठिकाने लगा रही है.

कांग्रेस प्रवक्ता राकेश कुमार सिंह कहते हैं, 'देखिए यूज एंड थ्रो करना बीजेपी कि पुरानी फितरत है. वो अपने नामचीन नेताओं का इस्तेमाल कर फिर उन्हें फेंक देती है. आडवाणी के साथ उन्होंने यही किया और अब शत्रुघ्न सिन्हा के साथ कर रहे है.' वहीं जेडी-यू के महासचिव कहते हैं, 'शत्रुघ्न सिन्हा को पार्टी लाइन के खिलाफ बोलने की सजा मिली है. देखिए एक तो बिहारी बाबू को पार्टी लाइन के खिलाफ बयान देने की आदत है, दूसरे बीजेपी उन्हें ठिकाने लगाना चाहती थी, ऐसे मे ये हुआ तो हमें कोई आश्चर्य नहीं है.'

बहरहाल शत्रुघ्न सिन्हा इस समय मुंबई में हैं पर तय है कि बिहार बीजेपी के इस फैसले ने कईयों को चौंका दिया है. अब बड़ा सवाल ये है कि क्या ये शत्रुघ्न सिन्हा के टिकट काटने का संदेश तो नहीं है. दरअसल इस बात पर चर्चा अब गर्म होती जा रही है कि शत्रुघ्न सिन्हा का टिकट काटा जा सकता है.

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