बिहार में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और राज्य में तेजी से बढ़ती हुई अपराधिक घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए DGP आर एस भट्टी ने नए दिशा निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत अब प्रदेश में पेशेवर अपराधियों और बड़ी अपराधिक घटनाओं की जांच की जिम्मेदारी अब पुलिस अधीक्षकों को सौंपी गई है.
पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि किसी भी थाने में अगर साधारण अपराध की घटनाएं दर्ज की जाती हैं, तो उसका निपटारा थानेदार 15 दिनों में करेंगे. वहीं दूसरी तरफ डीजीपी के आदेश के मुताबिक पेशेवर अपराधी तथा सनसनीखेज और बड़े अपराध से जुड़े मामलों की अंतिम रिपोर्ट से लेकर ट्रायल तक की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक करेंगे.
DGP के आदेश के मुताबिक पुलिस अधीक्षक रोजाना दर्ज होने वाली FIR का सबसे पहले खुद अवलोकन करेंगे. साथ ही ये फैसला भी करेंगे कि केस स्पेशल कैटेगरी का है या नहीं. बता दें कि पुलिस थानों में केस दो तरह के होते हैं. एसआर (विशेष केस) और नॉन एसआर यानी अविशेष केस. विशेष केसों की रिपोर्ट जिलों के एसपी के पास जाती है, जबकि अविशेष केसों की रिपोर्ट इंस्पेक्टर के पास जाती है.
नए आदेश में कहा गया है कि अभी एफआईआर में दर्ज धाराओं के आधार पर विशेष केसों को चिह्नित किया जा रहा है, इससे विशेष केसों की संख्या में लगतार वृद्धि जो रही है. लिहाजा पुलिस अधीक्षक पेशेवर अपराध के नियंक्षण पर पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं. साथ ही जांच पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. साथ ही कुछ विशेष केसों की जांच पुलिस अधीक्षक अब एसडीपीओ को भी दे सकेंगे. ऐसे केस की फाइनल रिपोर्ट भी एसडीपीओ के स्तर पर ही तैयार होगी.