बिहार के पूर्णिया में पुलिस के लिए सिर दर्द बना चुका इनामी बदमाश पवन सिंह आखिरकार स्पेशल टास्क फोर्स के हत्थे चढ़ गया. एक जमाने में रेलवे में नौकरी करने वाला पवन सिंह ने अपराध की दुनिया में ऐसा कदम रखा कि अच्छे-अच्छे लोग उससे खौफ खाने लगे थे.
दरअसल पवन सिंह ने पिता की हत्या होने के बाद हत्या के आरोपी की जान लेकर अपराध की दुनिया में पहला कदम रखा था. पवन सिंह मुंगेर जिले के जमालपुर रेलवे में आरपीएफ की नौकरी करता था. 2017 में पवन सिंह के पिता ज्ञानचंद सिंह की हत्या हो गई थी जिसके बाद पवन ने नागेश्वर मंडल की गोली मार कर अपने पिता की हत्या का बदला लिया.
पवन के पिता की हत्या के मामले में गांव के ही 17 लोगों पर थाने में हत्या का केस दर्ज हुआ था जिसमें शिक्षक नागेश्वर मंडल का भी नाम था जिसे बाद में कोर्ट ने रिहा कर दिया. यह बात पवन को बर्दाश्त नहीं हुई और उसने नागेश्वर मंडल की गोली मारकर हत्या कर दी.
पवन तभी से पुलिस की नजरों से फरार चल रहा था. इसके बाद उसने अलग-अलग जिलों में कई आपराधिक वारदातों को अंजाम दिया. पूर्णिया के टीकापट्टी थाना क्षेत्र से 25 हजार रुपये के इनामी बदमाश पवन सिंह को एसटीएफ की टीम ने दबोचा है.
पवन सिंह के साथ उसके एक अन्य साथी धीरज यादव को एसटीएफ टीम ने गिरफ्तार किया है. बताया जा रहा है कि पवन सिंह पूर्णिया पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था. पुलिस टीम के द्वारा सपहा गांव में पहुंचकर सबसे पहले पवन सिंह के घर की घेराबंदी की गई.
पुलिस की घेराबंदी देख पिछले दरवाजे से दो लोग अपने हाथ में हथियार लेकर भागने लगे जिसे एसटीएफ की टीम ने पुलिस बल के सहयोग से खदेड़कर पकड़ लिया.
तलाशी के दौरान पवन सिंह के कमरे से एक लोडेड पिस्टल और उसके पॉकेट से 10 जिंदा गोली बरामद किया गया. वहीं उसके सहयोगी से पुलिस ने एक देसी कार्बाइन और बैग से 10 गोली बरामद किया है.
पूर्णिया के एसपी आमिर जावेद ने बताया कि पवन सिंह की तलाश बीते तीन सालों से पूर्णिया पुलिस कर रही थी. इसने सबसे पहले अपने गांव के नागेश्वर मंडल की हत्या की थी, उसके बाद जुर्म की दुनिया में एक-एक कदम आगे बढ़ते हुए इसने लूट, डकैती, अपहरण, हत्या जैसे कई अपराधों को अंजाम दिया था. उसके खिलाफ पहले से कई केस दर्ज हैं. (इनपुट - अमित सिंह)