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तेज प्रताप ने बताया किसके आशीर्वाद से हुआ उनका जन्म, लिखा- ये हैं वास्तविक बाबा...

बिहार में इन दिनों पंडित धीरेंद्र शास्त्री की कथा चल रही है. धार्मिक कार्यक्रम के बीच सियासी घमासान भी मचा हुआ है. सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता आमने-सामने हैं. इसी बीच मंत्री तेज प्रताप यादव ने एक ट्वीट कर धीरेंद्र शास्त्री पर निशाना साधा है. हालांकि, इसमें उन्होंने शास्त्री का नाम नहीं लिया. मगर, हालिया घटनाक्रम को देखते हुए लोग उन्हीं से जोड़ रहे हैं.

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बिहार सरकार में मंत्री तेज प्रताप यादव की फाइल फोटो.
बिहार सरकार में मंत्री तेज प्रताप यादव की फाइल फोटो.

बिहार के पटना में इन दिनों बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री की कथा चल रही है. इसको लेकर राज्य के सियासी गलियारों में घमासान भी मचा हुआ है.  बिहार सरकार में मंत्री तेज प्रताप यादव बाबा के कार्यक्रम का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि इस आयोजन के जरिए धीरेंद्र शास्त्री धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं.

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कथा शुरू होने से पहले तेज प्रताप यादव ने ऐलान किया था कि धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास करने वाले बाबा बागेश्वर को किसी भी हाल में पटना एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकलने देंगे. एयरपोर्ट पर ही धीरेंद्र शास्त्री को घेर लेंगे. हालांकि, बाबा बागेश्वर पटना के नौबतपुर स्थित तरेत मठ पहुंचकर हनुमंत कथा सुना रहे हैं.

तेज प्रताप ने ट्वीट में लिखी ये बात

इस सबके बीच सोमवार को तेज प्रताप ने धीरेंद्र शास्त्री या अन्य किसी का नाम लिए बिना एक ट्वीट किया. इसमें उन्होंने देवरहा बाबा की तस्वीर के साथ अपनी तस्वीर शेयर की. इस पर उन्होंने लिखा, "ये हैं वास्तिवक बाबा... ब्रह्मलीन ब्रह्मर्षि योगिराज देवरहा बाबा, सिद्ध योगी संत..". इसके साथ ही तेज प्रताप ने ये भी बताया कि देवरहा बाबा के आशीर्वाद से उनका जन्म हुआ है. उनके पिता (लालू यादव) अक्सर बाबा के दर्शन करने जाया करते थे.

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तरेत मठ में हनुमंत कथा सुना रहे हैं धीरेंद्र शास्त्री

तेज प्रताप ने अपने ट्वीट में नाम लेकर किसी पर निशाना तो नहीं साधा है मगर लोग इसे उनके और धीरेंद्र शास्त्री के बीच की तल्खी से ही जोड़ रहे हैं. गौरतलब है कि धीरेंद्र शास्त्री इन दिनों पटना के नौबतपुर स्थित तरेत मठ में हनुमंत कथा सुना रहे हैं.

 

इसमें भारी भीड़ और भीषण गर्मी में लोगों की तबीयत बिगड़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने सोमवार को आयोजित होने वाले दिव्य दरबार को स्थगित कर दिया था. उन्होंने कहा था कि कथा पूरे पांच दिन चलेगी. मगर, भारी भीड़ के बीच किसी प्रकार की अनहोनी न हो, इसके लिए दिव्य दरबार को बंद करने का फैसला लिया गया. फिर कभी बिहार आएंगे तो दिव्य दरबार लगाया जाएगा. 

 

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