केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने अपना अंतिम पैगाम बीजेपी को भेज दिया है. पैगाम में दिनकर की कविता का उदाहरण देते हुए कहा गया कि अगर न्याय देना है तो ज्यादा दो अगर उसमें कोई बाधा हो तो केवल हमारा सम्मान दे दो.
दिनकर की कविता में यह उस समय का वर्णन किया गया है जब कृष्ण महाभारत टालने के उद्देश्य से कौरवों से मिलने गए थे और केवल पांच गांवों की मांग की थी ताकि युद्ध न हो. उसी कविता के जरिए आरएलएसपी ने अपने आधिकारिक ट्विटर से एक अंतिम पैगाम के नाम पर देने की कोशिश की है कि कम से कम हमारा सम्मान तो दे दो.
@BJP4India को #रालोसपा का अंतिम पैगाम:
" दो न्याय अगर तो, ज्यादा दो ।
पर, इसमें यदि बाधा हो ।
तो दे दो केवल हमारा सम्मान,
रखो अपनी धरती तमाम । "@abpnewshindi @ZeeBiharNews @News18Bihar @News18Bihar @ndtv @aajtak @CNNnews18 @PTI_News @TOIIndiaNews @htTweets
— RLSP (@RLSPIndia) November 25, 2018Advertisement
आरएलएसपी 2014 के चुनाव में तीन सीटों पर चुनाव लड़ी जिन पर उसने जीत हासिल की थी. अब वह ज्यादा सीट की मांग कर रही है. पार्टी ने अपने अंतिम पैगाम में यही कहने की कोशिश की है कि अगर न्याय से देना है तो तीन से ज्यादा दो लेकिन उसमें भी अगर बाधा हो तो हमारा सम्मान दे दो यानि जितने पर पहले लड़े थे उतना दे दो. हालांकि एनडीए में उन्हें दो सीट देने की पेशकश हुई है.
उपेंद्र कुशवाहा लगातार कह रहे हैं कि वह नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं, लेकिन अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं करेंगे. कुशवाहा दो बार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मिलने का समय मांग चूके हैं लेकिन उन्हें समय नहीं मिला. बताया जाता है कि चुनाव में व्यस्त होने के कारण अमित शाह ने उन्हें समय नहीं दिया. हालांकि कहा ये जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ कुशवाहा के बयान से अमित शाह खफा हैं. उनका मानना है कि कुशवाहा ने बिना मतलब विवाद पैदा किया. लेकिन अब उपेंद्र कुशवाहा सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलना चाहते हैं. उन्होंने पीएम से मिलने के लिए सोमवार का समय मांगा है.
एनडीए में सहयोगी और लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष रामविलास पासवान भी कुशवाहा को गठबंधन में बनाए रखने की पैरवी कर रहे हैं. लेकिन दूसरी तरफ उनके बेटे चिराग पासवान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ एकजुटता का इजहार कर रहे हैं. और कुशवाहा को नसीहत दे रहे हैं कि उन्हें गठबंधन की बातों को सार्वजनिक नहीं करनी चाहिए. पासवान ने अमित शाह से बात कर कुशवाहा को एनडीए में बनाए रखने के लिए रास्ता निकालने की गुजरिश भी की है.