बिहार के कोसी नदी में आई बाढ़ से सुपौल, सहरसा और मधेपुरा के कई इलाके काफी प्रभावित हुए. इलाके के दर्जनों गांव पूरी तरह से जलमग्न है. बाढ़ पीड़ितों का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन या सरकार की तरफ से उन्हें कोई मदद नहीं मिल रही है. सहरसा जिले के महिषी प्रखंड अंतर्गत बीरगांव में आजतक की टीम पहुंची और गांव की भी जमीनी हकीकत जानी.
ग्रामीणों का कहना था कि जिस तरीके से बाढ़ का पानी उनके गांव और घर में घुसा है, उसके कारण अगले 3 से 4 महीने उन्हें ऐसे ही जल बंदी बन कर रहना पड़ेगा. बीरगांव के ही रहने वाले दिहाड़ी मजदूर के घर के भीतर बाढ़ का 2 फीट पानी भर गया है. इसके कारण उनके परिवार को 24 घंटे पानी में ही जीवन गुजारना पड़ रहा है. ऐसे में परिवार के सामने खाने-पीने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है.
खाने पीने के लिए भी कुछ नहीं है हमारे पास
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से उन्हें अबतक किसी तरह की को मदद नहीं मिल रही है. हमारे पास खाने पीने के लिए भी कुछ नहीं है और कोई प्रशासनिक मदद भी नहीं मिली है.
नीतीश को विपक्षी दलों की बैठक पर है ध्यान
बाढ़ प्रभावितों को लेकर सहरसा के पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला करते हुए कहा है कि उनका सारा ध्यान मुंबई में होने वाली विपक्षी दलों की बैठक पर है. नीतीश कुमार कैसे संयोजक बने इसी पर उनका ध्यान है. बिहार में लोग बाढ़ से तबाह हैं, इसको लेकर सरकार का कोई ध्यान नहीं है. बस मुख्यमंत्री जी को सत्ता प्रेम है.