आपने महानगरों या फिर किसी बड़े शहर के नाम को बदलने के बारे में जरूर सुना होगा. लेकिन अब बिहार के रोहतास जिले में गांवों के नाम बदलने की होड़ लग गई है. इसके पीछे गांव वालों की सोच ये है कि नाम का अपना महत्व होता है. चाहे वो अपना हो या किसी और का. नाम किसी भी व्यक्ति, वस्तु व स्थान की पहचान होता है. वह उसकी विशेषता को बताता है. यदि किसी जगह का नाम ऐसा हो जिसे सुनने में बेइज्जती महसूस हो तो बुरा तो लगेगा ही. रोहतास के कुछ गांवों के नाम भी अजीब है. यही वजह है कि ग्रामीण अब अपने गांव का नाम ही बदलने में लगे हैं.
ऐसे हैं नाम
रोहतास जिले में कई ऐसे गांव हैं, जिनके नाम बड़े ही अजीब तरह के हैं. जिसे सुनने में अब लोगों को बुरा लगता है. रोहतास जिले के राजपुर प्रखंड में गांव के नाम कुछ इस प्रकार हैं नचनिया, बकरा, लौंड़ी, तुर्की, कपरफुट्टी, बजरमरवा, सलमा. जिसे बदलने की कवायद शुरू हो गई है.
ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित
इन गांव के युवाओं का कहना है कि गांव का नाम सुनकर कई बार उन्हें सभा में शर्मिंदगी-सी महसूस होती है. महिलाओं को भी अपने गांव का नाम सुनकर अजीब लगता था. अब आलम ये है कि गांव का नाम बदलने के लिए ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर उसे धार्मिक, ऐतिहासिक या संत महात्माओं के नाम पर रखने के लिए प्रक्रिया शुरु कर दी गई है.
नौहट्टा प्रखंड के तुर्की गांव के लोगों ने 16 वर्ष पूर्व गांव का नाम बदलने की योजना के तहत पहले आपसी सहयोग से देवी मंदिर की स्थापना की फिर गांव का नाम बदल देवीपुर कर दिया. तब से यह गांव देवीपुर के रूप में जाना जा रहा है. इस साल 26 जुलाई को राजपुर के नचनिया गांव के ग्रामीणों के आवेदन पर पंचायत समिति ने इस गांव का नाम बदलकर काशीपुरी करने का प्रस्ताव पारित किया. इसकी सूचना राज्य सरकार को भी दे दी गई है.
राजा-महाराजा के नामों पर होगा गांवों का नाम
रोहतास प्रखंड के लौड़ी, बंडा, सलमा, बजरमरवा गांव का नाम बदलने के लिए भी ग्रामीण सक्रिय हैं. वहीं रोहतासगढ़ पंचायत के कपरफुट्टी, नकटी सहित कई अन्य गांवों के लोगों का कहना है कि यह क्षेत्र सांस्कृतिक विरासत का केंद्र रहा है. खरवार राजा यहां सैकड़ों वर्ष राज किए हैं. इन गांवों का नाम भी राजा-महाराजाओं के नाम पर किया जाएगा.
सरकार का होगा अंतिम फैसला
रोहतास के जिला परिषद अध्यक्ष नथुनी पासवान ने कहा कि पहली बैठक में नचनिया गांव का नाम सर्वसम्मति से बदल कर काशीपुरी कर दिया गया है. जिन गांवों के नाम बदलने का प्रस्ताव पंचायत समितियों के माध्यम से जिला परिषद की बैठक में लाया जाएगा, उसे पारित कराकर नाम बदलने के लिए सरकार के पास आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजा जाएगा.