छत्तीसगढ़ के कोरबा में बैंक मेनेजर के साथ मिलकर नकली नोट खपाए जाने का मामला उजागर हुआ है. नकली नोट का जखीरा बांग्लादेश से आता था और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की चेस्ट में जमा हो जाता था. पुलिस ने एक बैंक मैनेजर समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है. इनके पास से 40 लाख रुपये के नकली नोट भी बरामद हुए हैं. पुलिस के मुताबिक राज्य के कई बैंकों में बांग्लादेशी घुसपैठियों ने बैंककर्मियों के साथ साठ-गांठकर नकली नोटों की भारी भरकम रकम खपाई है.
छत्तीसगढ़ पुलिस ने आरोपियों को रंगे हाथों उस समय धर दबोचा, जब ये यूनाइटेड बैंक ऑफ़ इंडिया की कोरबा शाखा में करीब 40 लाख के नकली नोट जमा कर रहे थे. ये नोट बैंक के चेस्ट में जमा हो रहे थे, क्योंकि इनके साथ इस बैंक का मैनेजर अशोक कुमार मित्रा भी शामिल था. सिर्फ इसी बैंक में ही नहीं, बल्कि HDFC बैंक के कुछ कर्मचारी भी इस तरह के कारोबार में शामिल थे. लिहाजा पुलिस ने HDFC बैंक से जुड़े इस एक शख्स को भी गिराफ्तार किया है.
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब स्टेट बैक ऑफ इंडिया ने बैंक के एक ग्राहक के 53 हजार रुपये नकली पाए. इस ग्राहक ने यह रकम यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया से निकाली थी. शिकायत के बाद हरकत में आई पुलिस ने जब जांच शुरू की तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गयी. प्रारंभिक जांच में बैक कर्मियों के शामिल होने की पुष्टि के बाद पुलिस ने बैंक मैनेजर को धर दबोचा.
पुलिस ने बयान में बताया है कि आरोपी लगभग 2005 से ये काम कर रहे हैं. यूनाईटेड बैंक का मेनेजर अशोक मित्रा जिसकी उम्र 57 साल है, उसका रोल काफी अहम है. वो ही नकली नोटों को खपाने का काम करता रहा है. वह नकली नोटों को असली नोटों से चेंज करने के लिए 20 प्रतिशत कमिशन के आधार पर काम करता था. यह काफी बड़ा अपराध है. बैंक की दृष्टि से भी और लोगों को भी विश्वाश को भी तोड़ने का काम किया है.
पुलिस के मुताबिक़ बांग्लादेशी घुसपैठियों ने राज्य के कई जिलो में बैंककर्मियों के साथ सांठगांठ कर करोड़ों की रकम खपाई है. यह घुसपैठिये कोलकाता और आसाम से नकली नोटों की खेप लेकर आते हैं. कोरबा के अलावा बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, धमतरी और बस्तर में सरकारी और गैर सरकारी बैंको में घुसपैठियों ने भारी-भरकम रकम खपाई है. पुलिस पूछतांछ में जुटी है.