छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य नागरिक आपूर्ति निगम में कथित आर्थिक अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) के गठन का निर्णय किया है. राज्य के कृषि और जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे ने मंगलवार को बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए.
चौबे ने बताया कि मंत्रिमंडल ने छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम में आर्थिक अनियमिताओं की उच्च स्तरीय जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) के गठन का निर्णय लिया है. यह टीम आई.जी. स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में काम करेगी.
राज्य के कृषि मंत्री ने बताया कि एंटी करप्शन ब्यूरो ने नागरिक आपूर्ति निगम के घोटालों की जांच की थी. जांच का आधार छापे के दौरान मिली डायरी के छह पन्नों को बनाया गया था. जबकि शेष 107 पेज को छोड़ दिया गया था.
चौबे ने बताया कि जांच में प्रभावित अधिकारी अनिल टुटेजा ने इस मामले में राज्य शासन के सामने एक आवेदन लगाया था. जिसके बाद एसीबी के महानिदेशक ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी. जिसमें कहा गया कि इस डायरी के शेष 107 पेज में जिन नामों और तथ्यों का जिक्र है उसकी जांच नहीं की गई है. सिर्फ छह पेजों के आधार पर जांच की रिपोर्ट तय की गई है.
उन्होंने बताया कि नागरिक आपूर्ति निगम घोटाले की जांच के संदर्भ में मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया है. इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराना आवश्यक है. मामले की जांच के लिए आईजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया जाएगा और उस डायरी में उल्लेखित सभी नामों को जांच के दायरे में लाया जाएगा.
राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने न्यूज एजेंसी भाषा को बताया कि वर्ष 2015 में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने नागरिक आपूर्ति निगम के दफ्तरों में छापा मारा था. इस दौरान ब्यूरो ने भारी मात्रा में नगद और एक डायरी बरामद की थी. डायरी में कुछ रसूखदार लोगों के नाम थे. बाद में इस मामले में ब्यूरो ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के दो अधिकारियों आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा समेत 18 लोगों को आरोपी बनाया था.
अधिकारियों ने बताया कि पिछले दिनों नई सरकार के गठन के बाद आरोपी अधिकारी अनिल टुटेजा ने राज्य सरकार से इस मामले में जांच की मांग की थी. उनकी मांगों को ध्यान में रखकर राज्य सरकार ने एंटी करप्शन ब्यूरो से अभिमत मांगा था, जिसके आधार पर राज्य सरकार ने इस मामले की एसआईटी से जांच कराने का फैसला किया है. राज्य के सत्ताधारी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है.
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि नागरिक आपूर्ति निगम घोटाला लगभग 36 हजार करोड़ रूपए का घोटाला है और इसमें कई लोग शामिल हैं, जिन्हें बचाने की कोशिश की गई है. एसआईटी जांच से सच सामने आ सकेगा. त्रिवेदी ने कहा कि पूर्व में जांच के दौरान मिली डायरी के कुछ पन्नों तक ही जांच सीमित रखी गई थी. लेकिन अब उम्मीद है कि इस मामले की विस्तृत जांच होगी.
बीजेपी ने लगाया राजनीति का आरोप
इधर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा है कि मुख्यमंत्री बघेल एक तथ्यहीन मामले को तूल देकर 'बदलापुर की राजनीति' कर रहे हैं. कौशिक ने कहा कि नागरिक आपूर्ति निगम घोटाले का प्रकरण पूर्व से ही न्यायालय के अधीन है, यदि कोई सबूत इनके पास हो तो इन्हें कोर्ट में पेश करना चाहिए. यह तो आरोपी का सहारा लेकर बदले की राजनीति का संकेत दे रहे हैं.
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राज्य सरकार राज्य के सौहार्दपूर्ण राजनीतिक वातावरण को प्रदूषित करने की दिशा में बढ़ रही है. नागरिक आपूर्ति निगम घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री बघेल शुरू से पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर अपने इरादे जताते रहे हैं और एक तथ्यहीन मामले को तूल देकर 'बदलापुर की राजनीति' कर रहे हैं.
कौशिक ने कहा कि इस मामले में विपक्षी नेता के तौर पर स्वयं बघेल और नेता प्रतिपक्ष रहे टीएस सिंहदेव अनिल टुटेजा की गिरफ्तारी की मांग करते रहे हैं. आज उसी टुटेजा के कहने पर बघेल और सिंहदेव राजनीतिक प्रतिशोध की व्यूह रचना कर रहे हैं. अपने षड्यंत्र के तहत मुख्यमंत्री बघेल टुटेजा के साथ सरकारी गवाह जैसा व्यवहार कर आरोपी की आड़ ले रहे हैं.