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जीत का चांस सिर्फ 30 फीसदी, देश में 100 से ज्यादा ब्रांच... महादेव बेटिंग ऐप पर स्टिंग में हुए बड़े खुलासे

छत्तीसगढ़ वह राज्य है, जहां से महादेव बुक ऐप की शुरुआत हुई थी. इसका नेटवर्क अभी भी बहुत सक्रिय है. महादेव बेटिंग ऐप के एक्टिव सदस्य शोभित गुप्ता ने कहा कि बेटिंग ऐप की पूरे भारत में 100 से ज्यादा ब्रांच हैं. उसने कहा कि ये बहुत बड़ा प्लेटफॉर्म है, इसमें एक से लेकर 500 तक ब्रांच हैं,

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स्टिंग ऑपरेशन में बेटिंग ऐप के एक्टिव सदस्य ने बड़े खुलासे किए
स्टिंग ऑपरेशन में बेटिंग ऐप के एक्टिव सदस्य ने बड़े खुलासे किए

बॉलीवुड के बाद अब राजनीतिक गलियारों से महादेव बेटिंग ऐप घोटाले के तार जुड़ने के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत में संग्राम छिड़ गया है. जांच छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल तक पहुंच गई है. जांच एजेंसी सीएम बघेल को 508 करोड़ रुपये देने की जांच कर रही है. ईडी के दावों के बाद सियासत गरमाई हुई है. विधानसभा चुनाव के बीच बीजेपी हमलावर है. पीएम मोदी ने भी आज छत्तीसगढ़ के दुर्ग में चुनावी रैली की, तो महादेव बेटिंग ऐप का जिक्र कर भूपेश बघेल और कांग्रेस पर हमला बोल दिया. इस बीच आजतक के एक स्टिंग ने महादेव बेटिंग ऐप से जुड़ी कई और बातों का पर्दाफाश किया है.

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क्या है महादेव बेटिंग ऐप?

महादेव बेटिंग ऐप ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिए बनाया ऐप है. इस पर यूजर्स पोकर, कार्ड गेम्स, चांस गेम्स नाम से लाइव गेम खेलते थे. ऐप के जरिए क्रिकेट, बैडमिंटन, टेनिस, फुटबॉल जैसे खेलों और चुनावों में अवैध सट्टेबाजी भी की जाती थी. अवैध सट्टे के नटवर्क के जरिए इस ऐप का जाल तेजी से फैला और सबसे ज्यादा खाते छत्तीसगढ़ में खुले. इस ऐप से धोखाधड़ी के लिए एक पूरा खाका बनाया गया था. दरअसल, महादेव बेटिंग ऐप कई ब्रांच से चलता था. हर ब्रांच को सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल फ्रेंचाइजी के रूप में बेचते थे. यूजर को सिर्फ शुरुआत में फायदा और बाद में नुकसान होता. फायदे का 80% हिस्सा दोनों अपने पास रखते थे. सट्टेबाजी ऐप रैकेट एक ऐसी मशीन की तरह काम करता है, जिसमें एल्गोरिदम यह तय करता है कि ऐप में अपना पैसा लगाने वाले केवल 30% ग्राहक ही जीतें. 

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छत्तीसगढ़ से शुरू हुआ महादेव बेटिंग एप

छत्तीसगढ़ वह राज्य है, जहां से महादेव बुक ऐप की शुरुआत हुई थी. इसका नेटवर्क अभी भी बहुत सक्रिय है. महादेव बेटिंग ऐप के एक्टिव सदस्य शोभित गुप्ता ने कहा कि बेटिंग ऐप की पूरे भारत में 100 से ज्यादा ब्रांच हैं. उसने कहा कि ये बहुत बड़ा प्लेटफॉर्म है, इसमें एक से लेकर 500 तक ब्रांच हैं, इन 500 ब्रांचों को 500 लोग चलते हैं, इन 500 लोगों के नीचे भी कई लोग काम करते हैं. हर ब्रांच का 'लॉगिन आईडी' एक ही व्यक्ति को दिया जाता है. ऐप लॉगिन और पासवर्ड फ्रेंचाइजी को सौंप दिए जाते हैं, उन्हें बस कुछ लैपटॉप और मोबाइल फोन की जरूरत होती है. इस तरह ये ऐप काम करता है.

स्टिंग ऑपरेशन में बेटिंग एप से जुड़े एजेंट शोभित ने किए ये खुलासे

आजतक- क्या एक ब्रांच में सिर्फ एक लॉगिन आईडी और पासवर्ड की जरूरत होती है, 

शोभित- हां, एक ब्रांच के लिए चार अंकों का व्हाट्सएप पासवर्ड जरूरी होता है.

आजतक- ये 7 व्यक्ति कहां काम करते हैं?"

शोभित - वे किसी भी स्थान से काम कर सकते हैं

आजतक- क्या वे घर से काम कर सकते हैं?

शोभित गुप्ता - वे घर से काम नहीं कर सकते. घर पर वाई-फाई लगाने से पुलिस का ध्यान आकर्षित होगा. यही कारण है कि हम उन स्थानों को चुनते हैं जहां हम कम परिचित होते हैं, आमतौर पर नए क्षेत्रों में काम करते हैं. जांच से बचने के लिए बैंक खातों का एक नेटवर्क है. ऐप के सदस्य छोटे किसानों या मजदूरों के खातों को हैक कर लेते हैं. उन्हें सट्टेबाजी लेनदेन के लिए उपयोग करते हैं और बाद में बंद कर देते हैं.

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आजतक- क्या आपने किसी का अकाउंट लिया ?

शोभित- हां, हम किसी से भी अकाउंट ले लेते हैं. इसके एवज में हम उन्हें 5-10 हजार रुपये देते हैं और बदले में वे हमें अकाउंट दे देते हैं. तीन महीने तक इसका इस्तेमाल करने के बाद हम अकाउंट बदल देते हैं.

आजतक- इन मोबाइल नंबरों का क्या करते हैं?

शोभित- ये सभी फर्जी नंबर होते हैं.

आजतक- जो अकाउंट खोले जाते हैं, उनके लिए अपना नंबर देते हैं, कस्टमर का नंबर नहीं होता?

शोभित- हमने कस्टमर्स पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. अकाउंट खोलने के लिए हमें सिर्फ उनके आधार कार्ड और पैन कार्ड की जरूरत थी.

आजतक- तो फिर बैंक अकाउंट कैसे खोल देता हैं?

शोभित- अगर बैंक में कनेक्शन है, तो पूरे आसानी से अकाउंट खुल जाता है.

शोभित - यह कैसीनो के आकर्षण की तरह है. ये ऐसा खेल हैं, जहां आप 100 रुपये से 1200 रुपये जीत सकते हैं. उदाहरण के लिए आप अनुमान लगाते हैं कि नंबर 2 आएगा, तो आप 1200 रुपये जीत सकते हैं. हालांकि, नंबर 2 A से K के बीच सिर्फ एक है, जिससे जीतने की संभावना नहीं है. अगर आप एक घंटे तक लगातार खेलते हैं, तो आप हार जाएंगे और जीरो पर आ जाएंगे. कैसिनो को इसी तरह डिज़ाइन किया गया है.

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आजतक- सेटिंग्स ऐसी हैं कि नंबर 2 नहीं आएगा?"

शोभित- हां, इसका रेशो 70-30 है, जिसमें हाउस को 70% का फायदा है और खिलाड़ी को 30% का फायदा है.

आजतक- 70-30 अनुपात का क्या मतलब है?"

शोभित गुप्ता- इसका मतलब ये है कि चाहे आप कुछ भी करें, प्रोग्राम किए गए रिजल्ट नहीं बदलेंगे.

हिमांशु तिवारी का बेटिंग ऐप में क्या है रोल?

महादेव बुक ऐप चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हिमांशु तिवारी ने खुलासा किया कि अधिकांश ग्राहक अपना पैसा हार जाते हैं.

आजतक- आप कितने फीसदी लोगों को जीतने देते हैं और कितने प्रतिशत लोगों को हराते हैं?

हिमांशु तिवारी- 100 में से 10 या 5 लोग ही जीतते हैं. यह किस्मत की बात है. वे शुरू में जीत सकते हैं और फिर हारते ही हैं.

आजतक- क्या वे शुरू में जीतते हैं?

हिमांशु तिवारी- हां.

आजतक- उसके बाद क्या होता है? क्या इसमें कोई हेरफेर शामिल है?

हिमांशु तिवारी- यह ऊपरी स्तर से तय होता है. इसके बाद हिमांशु ने खुलासा किया कि कैसे पुलिस की छापेमारी भी सट्टेबाजी ऐप के संचालन को रोकने में विफल रही है. उसने बताया कि  पुलिस की छापेमारी हुई है, लेकिन हमारा ऐप आज भी चल रहा है.

आजतक- छापा पड़ने पर क्या आप ऊपरी स्तर (महादेव ऐप) को सूचना देते हैं?

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हिमांशु तिवारी- हम उन्हें सूचित नहीं करते; वे खुद ही पता लगा लेते हैं.

ईडी ने क्या दावा किया?

केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2 नवंबर को रायपुर में महादेव बेटिंग ऐप से जुड़े एक कैश कूरियर से 5.39 करोड़ कैश जब्त किया था. ईडी का दावा है कि यह पैसा कांग्रेस के चुनाव अभियान के लिए था और विशेष रूप से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के लिए था. जांच एजेंसी का आरोप है कि बघेल को ऐप प्रमोटर्स से अब तक 500 करोड़ से ज्यादा मिल चुके हैं. हालांकि उन्होंने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. सीएम बघेल ने कहा कि मुझे बदनाम करने के लिए ऐसा किया जा रहा है. 

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