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सीएम भूपेश बघेल के हाथ पर जब एक-दो नहीं पूरे आठ बार चला चाबुक...देखें Video

छत्तीसगढ़ में गौरा-गौरी पूजा मनाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है. इस अवसर पर अपने हाथों पर सोटा यानी चाबुक खाने की मान्यता है. गोवर्धन पूजा के अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने हाथों पर चाबुक की मार सही.

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छतीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गौरा-गौरी पूजा में अपने हाथों पर सहे चाबुक के वार
छतीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गौरा-गौरी पूजा में अपने हाथों पर सहे चाबुक के वार
स्टोरी हाइलाइट्स
  • चाबुक की मार खाने से सभी तरह के दुख दूर होते हैं
  • सोटा मारने वाला व्यक्ति बैगा जाति का होता है
  • वर्षों से चली आ रही है परंपरा

छत्तीसगढ़ (Chattisgarh) में गौरा-गौरी पूजा (Gaura-Gauri Puja) मनाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है. गोवर्धन पूजा के मौके पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) ने अपने हाथों पर चाबुक की मार सही. इस अवसर पर अपने हाथों पर सोटा खाने की मान्यता है. लोगों का कहना है कि ऐसा करने से सभी तरह के दुख और परेशानियां दूर हो जाती हैं.

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हाथ पर सहे चाबुक के वार

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में आज गोवर्धन पूजा के अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने हाथों पर चाबुक की मार सही. इसको देखने के लिए वहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे. कार्यक्रम गौरा गौरी पूजा के रूप में आयोजित किया गया था. कार्यक्रम में मौजूद एक बैगा समुदाय के सदस्य ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के हाथों पर 8 बार चाबुक से वार किया. मान्यता है कि ऐसा करने से किसी भी तरह की आफत दूर रहती है और खुशहाली आती है. 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दिवाली पर्व के दूसरे दिन दुर्ग जिले के जंजगिरी गांव में आयोजित गौरा-गौरी तिहार पूजा में शामिल हुए. उन्होंने गांववालों के साथ मिलकर गौरा गौरी की पूजा की. गौरा गौरी पूजा छत्तीसगढ़ प्रदेश में सालों से हो रही है. इस दौरान उन्होंने सोटा परंपरा का भी पालन किया. 

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सोटा खाने से हो जाते हैं सभी कष्ट दूर
 
सोटा अपने हाथ में मारने की स्थानीय परंपरा है. सोटा मारने वाला व्यक्ति बैगा जाति का होता है. लोगों का मानना है कि जो कोई सोटा से मार खा लेता है, उसके ऊपर देवता चढ़ते हैं. उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. उसके घर की सभी दिक्कतें और परेशानियां भी दूर होती हैं. किसी भी तरह की आफत उसके पास नहीं आती. इसीलिए वहां पर सोटा से मार खाने की लोगों में उत्सुकता रहती है. हालांकि कुछ लोग इसे अंधविश्वास कहते हैं, लेकिन यह परंपरा वर्षों से अपने पुराने रूप में ही चली आ रही है. 

लक्ष्मी पूजा के साथ-साथ दीप पर्व का शुभारंभ हुआ, घर-घर मे दीप जलाए गए, बच्चों ने खूब फटाखे फोड़े. छत्तीसगढ़ में परम्परा रही है कि लक्ष्मी पूजन की रात गौरा-गौरी की स्थापना होती है, जिसका आयोजन आदिवासी समाज द्वारा किया जाता है. इस मौके पर नृत्य व संगीत का कार्यक्रम होता है और दूसरे दिन गोवर्धन पूजा गोठान दिवस को तौर पर मनाई जाती है.


 

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