छत्तीसगढ़ में बस्तर के कई इलाके ऐसे हैं, जो बारिश के चार महीनों के दौरान टापू में तब्दील हो जाते है. ये इलाके चारों ओर से पानी से घिर जाते हैं, आवाजाही पूरी तरह से ठप्प पड़ जाती है. सिर्फ हेलिकॉप्टर के जरिये ही इन गांवों में पहुंचा जा सकता है. आदिवासी आबादी वाले इन गांवों में बारिश के पहले पूरे चार माह के लिए भोजन पानी का इंतजाम कराने की जिम्मेदारी प्रशासन के कंधों पर है.
खास बात यह है कि ये सभी इलाके घोर नक्सल प्रभावित हैं. इन इलाकों में खाद्य सामग्री और दवाइयों के लूटे जाने की भी आशंका बनी रहती है. नक्सली अपने दल के लिए राशन और दवाइयों के जखीरे को अपने कब्जे में लेने से नहीं चूकते. दूसरी ओर प्रशासन की कोशिश होती है कि ग्रामीण आबादी तक खाद्य सामग्री और दवाइयां सुरक्षित रूप से पहुंचा दी जाएं ताकि बारिश के चार माह आदिवासियों को इसके लिए दो चार ना होना पड़े.
फिलहाल दंतेवाड़ा के दर्जन भर से ज्यादा इलाको में रशद पहुंचाने का काम जोरों पर है. मॉनसून के दस्तक देने के बाद इन सभी गांवों का उनके जिला मुख्यालयों से संपर्क टूट जायेगा. लिहाजा ऐसे गांवों में बारिश शुरू होने के पहले ही पूरे चार माह की रशद पहुंचाने का काम जोरों पर है.
दंतेवाड़ा के पाहुरनार, तुमरिगुंडा, चेरपाल और कौरगांव की करीब 6 हजार आबादी के लिए कुल 2124.30 क्विंटल राशन का भंडारण हो गया है. अब वर्षाकाल के चार महीने राशन के लिए इन ग्रामीणों को भटकना नहीं पड़ेगा. हालांकि प्रशासन की कोशिश है कि जल्द ही इन इलाकों के स्कूलों, आश्रम-छात्रावास के लिए चावल और दूसरी खाद्य चीजों का भंडारण भी हो जाये.
बता दें कि बस्तर में इंद्रावती नदी के तटीय इलाके टापू में तब्दील हो जाते है. बरसाती नदी की वजह से इन इलाकों में आवाजाही ठप्प पड़ जाती है. लगभग 25 से 30 हजार आदिवासी ग्रामीण पूरे चार माह तक अपने गांव में कैद हो जाते हैं. इन चार महीनों तक आदिवासियों की जिंदगी सामान्य बनाये रखना प्रशासन के जिम्मे होता है.
दूसरी ओर दंतेवाड़ा के गीदम के सोनारपारा और छिंदनार में इंद्रावती नदी पर बनने वाले पुल का काम अब बारिश के बाद शरू होगा. लोगों को उम्मीद थी कि इस चुनावी साल में उन्हें बारिश में अपने इलाकों में कैद नहीं होना पड़ेगा, लेकिन PWD विभाग समय पर इन इलाकों में पुल निर्माण का कार्य शुरू नहीं कर पाया.
इस इलाके के दोनों ही बड़े पुलों के निर्माण की जिम्मेदारी सेतु विभाग को दी गई है. सोनारपारा नदी पर पुल बनाने की घोषणा मुख्यमंत्री रमन सिंह ने वर्ष 2012 में की थी, लेकिन घोषणा के बाद पुल निर्माण की पूरी प्रक्रिया ठंडे बस्ते में डाल दी गई. इससे लोगों में नाराजगी है. फिलहाल चार माह तक का राशन पानी का इंतजाम हो जाने से आदिवासी खुश हैं.