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छत्तीसगढ़ के जंगलों में हाथियों की मूवमेंट गांववालों को बताएगा AI बेस्ड ये ऐप, वन विभाग की पहल

छत्तीसगढ़ के जंगलों में हाथियों के मूवमेंट की हाईटेक मॉनिटरिंग शुरू कर दी गई है. इसके लिए एआई आधारित ‘छत्तीसगढ़ एलीफेंट ट्रैकिंग एंड अलर्ट एप’ विकसित किया गया है. पिछले 3 महीनों से टाइगर रिजर्व में इस ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे 10 किलोमीटर के दायरे में हाथियों के रियल टाइम मूवमेंट का अलर्ट भेजा जा रहा है.

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छत्तीसगढ़ में हाथियों के मूवमेंट की हाईटेक निगरानी (फाइल फोटो)
छत्तीसगढ़ में हाथियों के मूवमेंट की हाईटेक निगरानी (फाइल फोटो)

छत्तीसगढ़ के जंगलों में बीते कुछ सालों से हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है. इससे बचने के लिए वन विभाग ने अब एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विकसित किया है. इस ऐप के जरिए हाथियों के मूवमेंट के बारे में जानकारी मिलेगी. वन विभाग के अधिकारियों ने अपने इस ऐप का नाम 'छत्तीसगढ़ एलीफेंट ट्रैकिंग एंड अलर्ट' रखा है. 

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यह ऐप 'हाथी मित्र दल' (स्थानीय स्वयंसेवकों के समूह) द्वारा दिए गए इनपुट के इस्तेमाल करता है, जो अलर्ट कॉल और मैसेज भेजने के लिए जंबो की आवाजाही पर नजर रखता है. 

टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन ने कहा कि इससे मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि गरियाबंद और धमतरी जिलों में फैले रिजर्व में पिछले कुछ वर्षों से मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं देखी जा रही हैं. बीते एक दशक से उत्तरी छत्तीसगढ़ में ये घटनाएं चिंता का एक प्रमुख कारण बनी हुई हैं और पिछले कुछ वर्षों में मध्य क्षेत्र के कुछ जिलों से भी इनकी रिपोर्ट आ रही है. सरगुजा, रायगढ़, कोरबा, सूरजपुर, गरियाबंद, जशपुर और बलरामपुर जिले विशेष रूप से प्रभावित हैं.  

बीते तीन साल में मारे गए 220 लोग

बीते तीन साल में राज्य में हाथियों के हमलों में 220 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. दूसरी ओर पांच साल में 70 से अधिक हाथियों की मौत बीमारी और उम्र को लेकर बिजली के झटकों की वजह से हुई है. राहत की बात यह है कि इस साल किसी भी हाथी की मौत नहीं हुई. हाथी मित्र दल हाथियों के स्थान और आवाजाही के बारे में डेटा फीड करने के लिए बीते एक साल ओपन डेटा किट का उपयोग कर रहा है. यह ओडीके ऐप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों में इस्तेमाल होता है.  

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कैसे काम करेगा नया AI ऐप

उन्होंने कहा, "नया विकसित ट्रैकिंग और अलर्ट ऐप उन लोगों को ऑटोमेटड अलर्ट मैसेज और कॉल भेजने के लिए ओडीके ऐप में फीड किए गए इनपुट का उपयोग करेगा, जिनके मोबाइल नंबर और जीपीएस लोकेशन ऐप में स्टोर हैं." 

जैन ने कहा कि जब भी कोई हाथी किसी गांव के 10 किमी के दायरे में होगा तो उसके निवासियों को ऑटोमेटेड कॉल, टेक्स्ट संदेश और व्हाट्सएप अलर्ट मिलेंगे. बशर्ते उनके मोबाइल नंबर सिस्टम में रजिस्टर्ड हों. अब तक टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 400 ग्रामीणों के मोबाइल नंबर दर्ज हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को ऐप इंस्टॉल करने की आवश्यकता नहीं है, वे अपने मोबाइल नंबरों को संबंधित बीट गार्ड के माध्यम से जीपीएस लोकेशन के साथ पंजीकृत कर सकते हैं." 

मोबाइल ऐप का उपयोग अन्य जंगली जानवरों जैसे तेंदुए, भालू और जंगली भैंसों की उपस्थिति के बारे में अलर्ट भेजने के लिए भी किया जा सकता है.  

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