छत्तीसगढ़ में सरकारी शादियों को लेकर बवाल मचा हुआ है. राज्य की बीजेपी सरकार 'मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना' के तहत हर साल सामूहिक विवाह करवाती है, लेकिन इस बार विवाह के मुहूर्त को लेकर पेंच फंस गया है. सरकार ने विवाह की तिथि 20 जुलाई निर्धारित की है, जबकि विवाह के शुभ मुहूर्त 17 जुलाई को ही खत्म हो जाएंगे. लिहाजा दूल्हा- दुल्हनों ने बैगेर मुहूर्त फेरे लेने से इंकार कर दिया है. दरअसल अब अक्टूबर महीने में ही विवाह के मुहूर्त शुरू होंगे. दूसरी ओर राज्य में विधानसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता लग जाएगी, ऐसे में विवाह की नई तिथि को लेकर अफसर पसोपेश में हैं.
छत्तीसगढ़ में 'मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना' ने राज्य के सभी 27 जिलों में विवाह योग्य वर वधुओं की मुसीबत बढ़ा दी है. सरकार ने विवाह की तिथि 20 जुलाई निर्धारित की है. सरकार के महिला और बाल विकास विभाग ने इस योजना के तहत विवाह करने के इच्छुक सभी लड़के और लड़कियों की कुंडली भी तैयार कर ली है, लेकिन विवाह की तारीख को लेकर लड़के- लड़कियों के अलावा उनके परिजनों ने भी इस तिथि में शादी करने से इंकार कर दिया है.
बिना मुहुर्त शादी से दूल्हा-दुल्हन ने किया इंकार
महिला और बाल विकास विभाग को वर्ष 2017-18 में राज्य भर में 14,800 जोड़ों के विवाह का लक्ष्य मिला है. विभाग ने इस लक्ष्य को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. उसने शादी की तैयारियों को अंतिम रूप भी दे दिया लेकिन आखिरी वक्त दूल्हा- दुल्हन और उनके परिजनों ने जब विवाह के मुहूर्त को लेकर अपने पंडितों से चर्चा की तो उनके अरमानो पर पानी फिर गया. बैगेर मुहूर्त कोई भी शादी के लिए राजी नहीं हुआ. बल्कि महिला एवं बाल विकास विभाग को लड़के और लड़कियों ने दो टूक कह दिया कि अशुभ मुहूर्त में उनकी शादी हुई तो लेने के देने पड़ जाएंगे, उनका वैवाहिक जीवन भी खटाई में पड़ जाएगा. कोरबा जिले में सभी 160 जोड़ों ने विवाह से इंकार कर दिया है.
कोरबा के डीपीओ एपी किसपोटा के मुताबिक पंडितों और ज्योतिषाचार्यों ने इस तिथि में विवाह को वर्जित बताया है. इसकी जानकारी विभाग के बड़े अफसरों को दी गई है. सरकार के निर्देश का इंतजार किया जा रहा है. दूसरी ओर इस योजना के तहत विवाह के लिए तैयारी कर रही सुलक्षणा ने 20 जुलाई के बजाए किसी अन्य शुभ तिथि में शादी करने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग को पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने अशुभ घड़ी में विवाह से होने वाले क्लेश और बाधाओं का जिक्र किया है.
कोरबा के ही विकास साहू ने 20 जुलाई को शादी करने से साफ इंकार करते हुए अंदेशा जाहिर किया है कि अशुभ मुहूर्त में शादी भारी न पड़ जाए. उधर ज्योतिषाचार्य प्रियाशरण त्रिपाठी के मुताबिक विवाह के मौके पर शुभ मुहूर्त का बड़ा महत्व है. उनके अनुसार हिंदू रीतिरिवाज और वैदिक विधियों में सदियों से विवाह के शुभ मुहूर्त की परंपरा चली आ रही है. उन्होंने बताया कि अशुभ मौकों पर किया गया विवाह फलदायक नहीं होता, क्योंकि विवाह एक महत्वपूर्ण संस्कार है, इसलिए शुभ घड़ी का इंतजार वर वधु और उनके परिजनों को करना चाहिए.
दूल्हा-दुल्हन के परिजन भी सरकार से नाराज
सिर्फ कोरबा ही नहीं बल्कि रायगढ़, बिलासपुर, अंबिकापुर, जशपुर, सूरजपुर, मुंगेली, बालोद, दुर्ग और महासमुंद के 811 जोड़ों ने भी 20 जुलाई को सरकारी शादी में फेरे लेने से इंकार कर दिया है. दरअसल विवाह का शुभ मुहूर्त 17 जुलाई को सिर्फ सुबह के 10 बजकर 40 मिनट तक है, इसके बाद सूर्य कर्क रेखा में प्रवेश कर जाएगा अर्थात विवाह के लिए अशुभ घड़ी की शुरुआत हो जाएगी. हिंदू पंचांग के अनुसार 23 जुलाई से देव शयन की शुरुआत होगी, देव शयन की यह अवधि 16 अक्टूबर तक प्रभावशील रहेगी इसके बाद फिर विवाह का मुहूर्त शुरू होगा. दूल्हा- दुल्हन और उनके परिजन सरकार को भी आड़े हाथो ले रहे हैं कि उसे शुभ मुहूर्त में ही लग्न लगानी चाहिए थी.
ये है मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत राज्य सरकार प्रत्येक जोड़ों पर 60 हजार तक की रकम खर्च करती है. इसमें हर एक दंपत्ति को बतौर उपहार टेबल फैन, अलमारी, डिनर सेट, पलंग और गद्दा दिया जाता है. यही नहीं विवाह समारोह में शामिल होने वाले सभी अतिथियों को मुफ्त नाश्ता और भोजन भी मिलता है. इससे दूल्हा- दुल्हन के परिजनों को शादी के लिए किसी भी तरह का आर्थिक बोझ नहीं पड़ता. इसलिए इस योजना में शामिल होकर ज्यादातर लोग इन्ही मंडप में अपने बच्चों की शादी करवाना पसंद करते हैं.
20 जुलाई को नहीं हुई शादी तो अफसरों पर गिर सकती है गाज
20 जुलाई को शादी विवाह का योग टला तो अफसरों पर गाज गिर सकती है, लिहाजा अफसर 20 जुलाई को ही शादी करवाने पर आमादा हैं. दरअसल राज्य में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सितंबर महीने के पहले हफ्ते में ही आदर्श आचार संहिता प्रभावशील हो जाएगी, ऐसे में इस तरह के सरकारी आयोजन पर भी रोक लग जाएगी. लिहाजा विवाह आयोजन की स्वीकृति लेने के बाद भी उसे तय समय सीमा के भीतर आयोजित ना कर पाने पर अफसरों के खिलाफ अनुशात्मक कार्रवाई हो सकती है. इस डर से महिला और बाल विकास विभाग का अमला डरा हुआ है और इसके चलते वो विवाह योग्य लड़के लड़कियों को 20 जुलाई को ही शादी करने के लिए जोर दे रहा है. इसके लिए विभाग के अफसरों ने अपने कुछ खास पंडितों से चर्चा भी की है.
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना काफी कामयाब और लोकप्रिय साबित हुई है. इस योजना के तहत सजने वाला विवाह मंडप बारातियों, घरातियों, मेहमानों, अफसरों और राजनेताओं से खचाखच भरा होता है. विवाह के मौके पर होने वाली फिजूलखर्ची से बचने के लिए भी जोड़े इस सामूहिक विवाह में परिणय सूत्र में बंधते हैं. अब देखना होगा कि 20 जुलाई को सरकारी मंडप में शादी की शहनाई बजेगी या नहीं.