छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खात्मे के लिए 'ऑपरेशन ऑल आउट' के तहत अब नक्सलियों के खात्मे के बीड़ा उठाया गया है. फौलादी जिस्म और चट्टान जैसा सीना रखने वाले कोबरा कमांडो की आहट भर से नक्सली अपनी मांद में छुप जाते हैं. इन घातक कमांडो के सामने नक्सलियों के आने का मतलब मौत होता है.
केंद्र सरकार ने अब पूरे रेड कॉरिडोर का खात्मा करने का बीड़ा उठा लिया है, जिसमें नक्सलियों के आका हिडिमा जैसे लोगों ने अपना गढ़ बना
रखा है और छुपकर सुरक्षा बलों पर गुरिल्ला वॉर करते हैं. नक्सली जंगल के टेरेन के चप्पे-चप्पे से वाकिफ होते हैं, जिसके चलते जंगल में इनसे
मुकाबला करना बेहद कठिन होता है.
अगर कोबरा कमांडो अपने हथियारों के साथ इन जंगल में उतरते हैं, तो नक्सली अपनी जान बचाकर भागने लगते हैं. नक्सली अब सुकमा जैसे अपने गढ़ में बच नहीं पाएंगे. यहां पर नक्सली गुरिल्ला युद्ध के जरिए जवानों पर हमला करते रहते हैं. ऑपरेशन ऑल आउट के जरिए इस पूरे इलाके में घातक कोबरा तैनात की जा रही है, जो इन नक्सलियों को उनकी मांद में घुसकर मारेंगे.
यदि नक्सली सरेंडर नहीं करते हैं, तो उनको ऑपरेशन के तहत खत्म कर दिया जाएगा. हाल ही में सुकमा में नक्सलियों के हमले में 25 जवानों को खोने के बाद केंद्र सरकार ने इस पूरे इलाके में कोबरा बटालियन के दो हजार जांबाजों को तैनात करने का फैसला लिया है. कोबरा कमांडो के लिए न तो यह जगह नई है और न ही नक्सलियों की ओर से किया जाने वाला युद्ध. ये कमांडो अत्याधुनिक हथियारों से लैस होते हैं. इनको मडाडीनो ट्रेनिंग देकर फौलाद बनाया जाता है.