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'छत्तीसगढ़ में कांग्रेस जीती तो भूपेश बघेल ही होंगे मुख्यमंत्री', डिप्टी सीएम बनते ही TS सिंहदेव ने दिया 'वॉकओवर'

जब टीएस सिंहदेव से पूछा गया कि ढाई साल के लिए उन्हें सीएम न बनाए जाने पर क्या विश्वासघात की भावना महसूस हुई. इस पर उन्होंने कहा कि मैं इसे विश्वासघात के रूप में नहीं देखता हूं. मैं इसे एक निर्णय के रूप में देखता हूं, जो कि आलाकमान लेता है.

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भूपेश बघेल के साथ TS सिंहदेव (फाइल फोटो)
भूपेश बघेल के साथ TS सिंहदेव (फाइल फोटो)

छत्तीसगढ़ में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं. इसे लेकर कांग्रेस-बीजेपी रणनीति तैयार करने में जुट गई हैं. वहीं, उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के "सामूहिक नेतृत्व" में लड़ेगी. अगर पार्टी जीतती है, तो सीएम पद के लिए बघेल के नाम पर सबसे पहले विचार किया जाएगा. दरअसल, भूपेश बघेल और सिंहदेव के बीच लंबे समय से तनातनी चली आ रही थी.

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सिंहदेव 2018 चुनाव के बाद मुख्यमंत्री बनने की रेस में भी थे. वे भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली अपनी ही सरकार के खिलाफ भी मुखर भी रहे. ढाई-ढाई साल के सीएम के फॉर्मूले को लेकर सिंहदेव खेमे की ओर से लगातार संकेत दिए जाते रहे. सिंहदेव ने तीन साल पहले ढाई-ढाई साल के सीएम फॉर्मूले को लेकर बहस तेज की थी. लंबी तकरार के बाद कांग्रेस ने सिंहदेव को डिप्टी सीएम बनाने का ऐलान कर दिया था. इसके बाद उनके तेवर नरम पड़ गए. लिहाजा, उन्होंने बघेल को 'वॉकओवर' दे दिया.

एजेंसी के मुताबिक, सिंहदेव ने कहा कि अगर किसी मौजूदा मुख्यमंत्री को नहीं हटाया गया है, तो इसका मतलब ये है कि पार्टी उस व्यक्ति में अपना विश्वास बनाए रखती है, जो टीम को जीत दिलाने में सक्षम है और जीत के बाद कप्तान क्यों बदला जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को 90 सदस्यीय विधानसभा में शानदार जनादेश मिलेगा. उन्होंने कहा कि कुछ लोग अनुमान लगा रहे हैं कि कांग्रेस को 75 से ज्यादा सीटें मिलेंगी. लेकिन मेरा अनुमान है कि कांग्रेस के खाते में 60 से 75 सीटें आएंगी. बता दें कि 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 68 सीटें जीती थीं.

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बघेल से तनातनी पर क्या बोले सिंहदेव?

यह पूछे जाने पर कि क्या पिछले महीने उप मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद बघेल और उनके बीच तनाव इतिहास की बात है. इस पर सिंहदेव ने कहा कि कोई वास्तविक कड़वाहट या दुश्मनी नहीं थी, हम (बघेल और वह) साथ मिलकर काम कर रहे थे. ढाई-ढाई साल सीएम बनाए जाने का मुद्दा था. मुझे लगता है कि यह हमारे दिमाग के साथ-साथ हम दोनों से जुड़े सभी लोगों के दिमाग पर असर कर रहा था. हालांकि अब वह समय बीत चुका है. यहां तक ​​कि जब उन मामलों पर चर्चा हो रही थी, तब भी हम अपनी क्षमता के अनुसार सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे थे.

"हमारी पार्टी में आलाकमान ही लेता है फाइनल फैसला'

जब टीएस सिंहदेव से पूछा गया कि ढाई साल के लिए उन्हें सीएम न बनाए जाने पर क्या विश्वासघात की भावना महसूस हुई. इस पर उन्होंने कहा कि मैं इसे विश्वासघात के रूप में नहीं देखता हूं. मैं इसे एक निर्णय के रूप में देखता हूं, जो कि आलाकमान लेता है, यह उनका फैसला है. मैं मुख्यमंत्री नहीं बन सकता. आलाकमान फीडबैक के आधार पर हम सभी को भूमिकाएं सौंपता है. सिंहदेव ने कहा कि कोई विश्वासघात नहीं है क्योंकि यह आलाकमान का फैसला है और हम उसका पालन करते हैं.

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सिंहदेव ने बताई खुद की पोजिशन

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें डिप्टी सीएम बनाया जाना उनका प्रमोशन है या डिमोशन? इस पर सिंहदेव ने कहा कि प्रोटोकॉल के तहत वह पहले से ही कैबिनेट में नंबर दो हैं. उन्होंने कहा कि सीएम ने मुझे उनके बाद प्रोटोकॉल दिया था. वह नंबर एक थे और मैं नंबर 2 था. ताम्रध्वज साहू जी नंबर 3 थे. मैं डिप्टी सीएम हूं, इसलिए मुझे यकीन है कि बहुत से लोग इसे प्रमोशन  के रूप में देख रहे होंगे. उन्होंने कहा कि मैं कैबिनेट में मंत्रियों में से एक था. अब मैं उन मंत्रियों में से एक हूं जिन्हें उपमुख्यमंत्री भी नियुक्त किया गया है. मैं पार्टी का आभारी हूं, पार्टी आलाकमान और भूपेश भाई का बहुत आभारी हूं, क्योंकि सभी की सहमति और आशीर्वाद से यह हुआ होता.
 

 

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