छत्तीसगढ़ के मनेद्रगढ़-चिरमिरी- भरतपुर में आदमखोर तेंदुए का आतंक जारी है. तेंदुआ अबतक दो महिलाओं, एक पुरुष और एक 8 साल के मासूम बच्चे को अपना शिकार बना चुका है. ग्रामीणों का कहना है कि बावजूद इसके वन विभाग के अधिकारी तेंदुए को आदमखोर मानने से इंकार कर रहे हैं. वहीं स्थानीय विधायक ने तेंदुए को पकड़ने के लिए मंत्री से गुहार लगाई लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी तेंदुआ पकड़ में नहीं आ रहा है. जिसकी वजह से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है.
रविवार सुबह वन मंडल इलाके के जनकपुर परिक्षेत्र-2 के सिंगरौली गांव की रहने वाले रणदमन बैगा (45) पर आदमखोर तेंदुए ने हमला किया और उसे उठाकर ले गया. कुछ देर बाद जंगल में उसकी लाश मिली. ग्रामीणों ने तुरंत ही इसकी सूचना पुलिस और वन विभाग को दी. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज मामले की जांच शुरू की. ग्रामीणों ने पुलिस और वन विभाग की टीम को बताया की यह तेंदुए का यह चौथा शिकार है.
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तेंदुए को पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं. पहली मौत के बाद ही तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया था. जिसमें एक बकरा भी बांधा गया गया. इसके अलावा तेंदुए को ट्रेस करने के लिए कई जगह पर कैमरे भी लगाए हैं. फिलहाल तेंदुआ पकड़ में नहीं आया है. कांकेर से यहां एक एक्सस्पर्ट की टीम आई है. उम्मीद से है जल्द ही तेंदुए को पकड़ लिया जाएगा. बता दें, अबतक 35 दिन में तेंदुआ 4 को अपना शिकार बना चुका है.
जानकारी के मुताबिक पहली मौत 11 दिसंबर को हुई जब 65 साल की फुलझरिया बाई जंगल में लड़की बीनने गई थी. तभी तेंदुए ने उन्हें अपना शिकार बनाया. दूसरी मौत 23 दिसंबर को हुई जब 8 साल का मासूम बच्चा अपने घर के बाहर खेल रहा था. तीसरी मौत 54 साल की उमा बाई की हुई. उमा शौच करने जंगल में गई थी. उसी दौरान आदमखोर तेंदुए ने उन पर हमला कर मौत के घाट उतारा. अब चौथी मौत 15 जनवरी को हुई जब 45 वर्ष का रणदमन बैगा अपने घर के बीच खेत पर किसी काम से गया था. तभी घात लगाए तेंदुए ने उस पर हमला कर मौत के घाट उतार दिया.
जिला अधिकारी पीएस ध्रुव ने कुवारपुर वन परिक्षेत्र का दौरा किया और ग्रामीणों से बात की. उन्होंने गांव वालों से सावधानी बरतने की अपील की. साथ ही कहा कि तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहे हैं. उम्मीद है कि जल्द ही यह तेंदुआ पकड़ में आ जाएगा. उन्होंने लोगों से कहा है कि जंगल, झाड़ी, सुनसान इलाकों से आते-जाते समय बेहद सतर्क रहें और अपनी सुरक्षा के लिए लाठी-डंडा रखें.