छत्तीसगढ़ के रेड कॉरिडोर पर करारा प्रहार करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है. सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे.
गृह मंत्रालय ने जताई चिंता
जानकारी के अनुसार नक्सली छत्तीसगढ़ के बस्तर के कुछ इलाकों में एक बार फिर से नक्सलियों की भर्ती करने में जुटे हुए हैं. ऐसे में गृह मंत्रालय ने इस मुद्दे को लेकर चिंता जाहिर की है. गृह मंत्रालय का कहना है कि आतंक के नए बन रहे ट्राई जंक्शन पर एक बार फिर से करारा प्रहार किया जाना चाहिए. जिसके लिए केंद्रीय गृह सचिव ने खुद बस्तर के इलाके में जाकर एक समीक्षा बैठक बुलाई है.
कौन कौन होंगे बैठक में शामिल?
सूत्रों के मुताबिक इस समीक्षा बैठक में छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में नक्सल प्रभावित 8 जिलों के कलेक्टर, एसपी के साथ-साथ सीआरपीएफ के कोबरा कमांडो की टीम के अधिकारी भी मौजूद होंगे यही नहीं केंद्रीय गृह सचिव ने सीआरपीएफ के डीजी आरआर भटनागर को भी इस समीक्षा मीटिंग में बुलाया है.
बता दें कि कुछ दिन पहले केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने नक्सल समस्या को लेकर के केंद्र सरकार को एक रिपोर्ट भेजी थी. इस रिपोर्ट में केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि नक्सल ट्राई जंक्शन यानी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बॉर्डर के खतरनाक जंगलों में नक्सली ट्रेनिंग कैंप चला रहे हैं. इस ट्रेनिंग कैंप में नक्सलियों को गुरिल्ला वार की ट्रेनिंग दी जा रही है.
ट्रेनिंग कैंप चला रहे नक्सली
इस रिपोर्ट के आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों को इस इलाके में ज्यादा चौकसी बरतने और इस तरीके की ट्रेनिंग करने वाले इलाकों पर नजर रखने की हिदायत दी गई थी. आजतक को खुफिया सूत्रों से जो जानकारी मिली है कि बालाघाट और राजनादगांव के इलाकों में ऐसे अनेकों ट्रेनिंग कैंप चलाये जा रहे हैं. जिसमें नक्सली भोले-भाले लोगों को बरगला कर उनको नक्सल ट्रेनिंग और हथियारों की ट्रेनिंग देने की कोशिश में जुटे हुए हैं.
सुरक्षा महकमे के सूत्रों ने यह भी जानकारी दी है कि सीपीआई (एम) सेंट्रल कमेटी ने कंसोलिडेशन कैंपेन को भी इस समय अलग-अलग जगह पर चला रखा है. जिसके जरिए वह नक्सलियों को जहां ट्रेनिंग देने की कोशिश कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ उनकी भर्ती का भी अभियान चलाने में जुटे हुए हैं. साथ ही सूत्रों का कहना है की बड़े ऑर्गनाइजेशन के सेटअप की कोशिश भी सीपीआई (एम) करने में जुटा हुआ है.
100 गांव से नमिलिशिया बनाने की कोशिश
सुरक्षा महकमे की एक रिपोर्ट से इस बात की भी जानकारी मिल रही है कि नक्सली बालाघाट और राजनांदगांव के बॉर्डर के आस-पास मौजूद 100 गांव से जनमिलिशिया बनाने की फिराक में है. दरअसल जनमिलिशिया का इस्तेमाल नक्सली सुरक्षाबलों के खिलाफ इंटेलिजेंस यानी खुफिया जानकारी एकत्र करने और नक्सलियों के लिए बेसिक सपोर्ट मुहैया कराने के लिए इस्तेमाल करते हैं.
सूत्रों का कहना है कि लगातार सुरक्षाबलों के ऑपरेशन के चलते बॉर्डर के कई इलाकों में जन मिलिशिया या तो अपना काम छोड़ चुके थे या फिर अंडर ग्राउंड हो गए थे पर एक बार फिर नक्सली अपनी पैठ और अपने आप को मजबूत करने के लिए इस तरीके के जनमिलिशिया को खड़ा कर रहे हैं.
क्या है जनमिलिशिया?
जनमिलिशिया नक्सलियों का वह एक हिस्सा है जो इनकी रीढ़ के तौर पर जाना जाता है. वहीं जनमिलिशिया को समाप्त करना नक्सलियों की रीढ़ खत्म करना है. सरकार इसे खत्म करने के लिए कई कदम भी उठा रही है पर नक्सली कमांडर यह नहीं चाहते की जनमिलिशिया खत्म हो. जनमिलिशिया नक्सलियों का एक ऐसा हथियार है जो नक्सली कमांडरों के लिए ओवर ग्राउंड वर्कर के तौर पर काम करते हैं.
यह नक्सलियों के समर्थक तो होते ही हैं साथ ही सुरक्षाबलों के खिलाफ नक्सलियों को गुप्त सूचनाएं भी देते हैं. इसके अलावा नक्सलियों को हथियार पहुंचाने और उनकी हर तरीके से मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं.
जनमिलिशिया की कमर तोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने जो कदम उठाए हैं उससे इनकी कमर तो टूटी है. इसका परिणाम यह हुआ कि अब नक्सली कमांडर और अधिक जनमिलिशिया को अपने गुट में शामिल करने की कोशिश में लगे हुए हैं.