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155 km की 'सनातन एकता पदयात्रा' निकालने की तैयारी में धीरेंद्र शास्त्री, बोले- अब 'करो या मरो' की बात

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि पदयात्रा 21 से 29 नवंबर तक बागेश्वर धाम से निकाली जाएगी. पदयात्रा का उद्देश्य भारत को एक करना है. जातिवाद के भेदभाव को जड़ से मिटाना है और भारत को भव्य बनाना है

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कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री. (फाइल फोटो)
कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री. (फाइल फोटो)

प्रख्यात कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जातिवाद समाप्त के उद्देश्य को लेकर एक पदयात्रा शुरू करने जा रहे हैं. पदयात्रा की शुरुआत मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम से होगी.  

छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने जातिवाद और भेदभाव को मिटाने के लिए पदयात्रा के बारे में जानकारी दी. धमतरी पहुंचे शास्त्री ने बताया कि पदयात्रा 21 से 29 नवंबर तक बागेश्वर धाम से निकाली जाएगी. पदयात्रा का उद्देश्य भारत को एक करना है. जातिवाद के भेदभाव को जड़ से मिटाना है और भारत को भव्य बनाना है, क्योंकि अब 'करो या मरो' की बात है. 

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यह यात्रा छतरपुर से मध्य प्रदेश के ओरछा तक निकाली जाएगी. यह 155 किलोमीटर की यात्रा होगी, जिसका नाम सनातन एकता पदयात्रा है. अभी रूट तय किया जा रहा है.

जानिए कौन हैं धीरेंद्र शास्त्री?

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री मध्य प्रदेश राज्य के छतरपुर जिले स्थित बागेश्वर धाम सरकार मंदिर के मुख्य पुजारी हैं. बाबा बागेश्वर के नाम से विख्यात शास्त्री सभाओं में धार्मिक कथाएं सुनाते हैं.

धीरेंद्र का जन्म 4 जुलाई 1996 को छतरपुर जिले के ही गढ़ा गांव में हुआ था. वह सामान्य गरीब परिवार से आते हैं. उनकी प्रारंभिक शिक्षा सरकारी स्कूल से हुई है. शास्त्री कथाओं के साथ अपने 'दिव्य दरबार' लगाने के लिए जाने जाते हैं. इस दरबार में बागेश्वर धाम महाराज लोगों के अंतर्मन की बात जानने और उनकी समस्याओं का निदान करने का दावा करते हैं. 

अंधविश्वास का विरोध करने वाले एक समूह ने महाराष्ट्र की एक सभा में धीरेंद्र शास्त्री से अपनी चमत्कारी क्षमताओं का प्रदर्शन करने के लिए बुलाया था. कहा जाता है कि उस कार्यक्रम में शास्त्री शामिल नहीं हुए थे. 

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नागपुर की अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के श्याम मानव ने धीरेंद्र शास्त्री के दिव्य दरबार को चुनौती दी और उनकी आध्यात्मिक शक्तियों पर सवाल उठाया.  श्याम  मानव ने धीरेंद्र  शास्त्री पर अंधविश्वास को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया. जब मीडिया में विवाद शुरू हुआ, तो शास्त्री ने मानव को अपने दिव्य दरबार में आमंत्रित किया और पूछा कि वह क्या जानना चाहता है? स्वामी रामदेव, सद्गुरु जग्गी वासुदेव, रामभद्राचार्य, साध्वी प्राची, प्रज्ञा ठाकुर और राजनेता गिरिराज सिंह जैसे कई प्रमुख हिंदू धार्मिक नेता शास्त्री के समर्थन में आ गए थे.

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