छत्तीसगढ़ में पालनार की लिंगे के लिए रक्षाबंधन खुशियां लेकर आया है. 12 साल की उम्र से नक्सल संगठन में शामिल होकर खून खराबा करने वाले उसके भाई ने सरेंडर किया. इसका नाम मल्ला है जिसपर 8 लाख का इनाम था. सुकमा जिले के मल्ला ने अपनी बहन लिंगे की ही पहल पर सरेंडर किया. इसके बाद बहन ने खुशी-खुशी इस बार अपने भाई की कलाई पर राखी बांधी.
दरअसल, 14 साल बाद नक्सली मल्ला तामों छिपते-छिपाते घर वालों से मिलने पहुंचा था. परिवार से मिलकर वह वापस जा ही रहा था कि बहन ढाल बनकर खड़ी हो गई. बहन ने उसे वापस जाने से रोक दिया. बहन उसे पुलिस के पास लेकर पहुंच गई और सरेंडर करा दिया. लिंगे के लिए यह रक्षा बंधन बेहद खास है क्योंकि अपने बड़े भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए लिंगे को बरसो इंतजार करना पड़ा. मुख्यधारा में लौटने के बाद लिंगे ने भाई को राखी बांधी, आरती उतारी. उसे मिठाई खिलाई और लंबी उम्र की कामना की.
यह सबकुछ पुलिस के लोन वर्राटू अभियान के तहत हुआ है. बचपन से ही हिंसा के रास्ते पर चले मल्ला के रक्षाबंधन से दो दिन पहले लौटने पर अफ़सरों ने भी तालियां बजाकर स्वागत किया. एसपी डॉ अभिषेक पल्लव ने इसे लोन वर्राटू अभियान की सफलता बताया और कहा कि मुख्यधारा में लौटने वालों का स्वागत है. मल्ला ने बताया कि वह वर्तमान में भैरमगढ़ एरिया कमेटी का प्लाटून नंबर 13 का डिप्टी कमांडर था. वह कई बड़ी घटनाओं में शामिल था. बहन के बुलावे पर 14 साल बाद घर लौटा.
मल्ला ने बताया कि बहन और परिवार को देख मन बदला और बहन के कहने पर उसने पुलिस के सामने हथियार डाल दिए. मल्ला ने कहा, 14 सालों बाद मेरे हाथों पर मेरी बहन ने राखी बांधी है, मैं बहुत खुश हूं. लिंगे ने बताया कि भाई 12 साल की उम्र में चाचा के पास गया था. चाचा नक्सल संगठन में थे. उन्होंने भाई मल्ला को भी शामिल करा लिया. इसके बाद वह लौटा ही नहीं. 14 साल बाद जब वह घर आया तो खुशी हुई. मैंने वापस जाने से रोक दिया क्योंकि मैं उसे एनकाउंटर में मरते नहीं देखना चाहती थी. भाई को राखी बांधने तरसती थी. अब हर साल हम साथ में रक्षाबंधन का पर्व मनाएंगे. सरेंडर के बाद मल्ला भी बहुत खुश है.